जल संरक्षण में MP बना देश के लिए मिसाल, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गिनाईं उपलब्धियां
जनसहयोग से जल संरक्षण में अग्रणी राज्य बना मध्यप्रदेश
भोपाल, 16 मई 2026।
MP जल संरक्षण और जल संचयन के क्षेत्र में देशभर के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण कार्यों में सरकार के साथ-साथ आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य बना दिया है।Madhya Pradesh becomes national model in water conservation,
मुख्यमंत्री ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा किए गए जल संरक्षण और जनसंचयन कार्यों की रैंकिंग में मध्यप्रदेश ने बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि नर्मदा मिशन जैसी संस्थाएं जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
रवीन्द्र भवन में नर्मदा चिंतन संगोष्ठी का आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन में आयोजित नर्मदा चिंतन बौद्धिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी शासकीय विभाग जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम में देशी उत्पादों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया गया। मुख्यमंत्री को बाल चित्रकार विक्रम लोधी ने मां नर्मदा का चित्र भेंट किया, जिसे विशेष सम्मान के रूप में स्वीकार किया गया।
समर्थ नर्मदा सम्मान से सामाजिक कार्यकर्ताओं का सम्मान
इस आयोजन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सेवाभावी व्यक्तियों को “समर्थ नर्मदा अलंकरण” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान जल संरक्षण और समाजसेवा में योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक कार्यों के लिए प्रेरणा का कार्य करते हैं।
जल गंगा संवर्धन अभियान से बढ़ी जनभागीदारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कुंए, बावड़ियों, पोखर, नहर और अन्य जल संरचनाओं के पुनर्जीवन के कार्य तेजी से चल रहे हैं। गुड़ी पड़वा से शुरू हुआ जल गंगा संवर्धन अभियान 30 जून तक जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल जल संरचनाओं का संरक्षण ही नहीं, बल्कि लोगों में पानी के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाना भी है। इस अभियान को प्रदेशभर में व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।
प्रधानमंत्री के विजन से जुड़ा मध्यप्रदेश का विकास मॉडल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकास और विरासत संरक्षण” के आह्वान पर मध्यप्रदेश निरंतर कार्य कर रहा है। प्रदेश में जल संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहरों को भी संरक्षित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि त्योहारों और सामाजिक आयोजनों में भी शासन और जनता मिलकर भागीदारी कर रहे हैं, जिससे समाज में एकता और जागरूकता बढ़ रही है।
नदियां हमारी प्रत्यक्ष शक्तियां हैं: दादा गुरु
कार्यक्रम में दादा गुरु भगवान ने कहा कि भारत की संस्कृति ने पूरी दुनिया को दर्शन और जीवन मूल्यों की दिशा दी है। उन्होंने कहा कि हमारी नदियां केवल जल स्रोत नहीं बल्कि प्रत्यक्ष शक्तियां हैं।
उन्होंने गंगा, यमुना और नर्मदा को जीवनदायिनी शक्ति बताते हुए कहा कि प्रकृति हमें लगातार पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है। नर्मदा पथ को उन्होंने व्यक्तित्व निर्माण का मार्ग बताया और प्रदेश में चल रहे जल संरक्षण अभियानों की सराहना की।
साधक और शासक के सहयोग से मिलते हैं श्रेष्ठ परिणाम: गोपाल आर्य
वरिष्ठ राष्ट्रवादी विचारक गोपाल आर्य ने कहा कि जब समाज में साधक और शासक मिलकर कार्य करते हैं, तो परिणाम अत्यंत सकारात्मक होते हैं। उन्होंने अमृता देवी जैसी वीरांगनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे देश में प्रकृति संरक्षण के लिए बलिदान की परंपरा रही है।
उन्होंने कहा कि जल और पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की भूमिका
कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण और उन्हें उपयोगी बनाए रखने की दिशा में विभाग निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि इन प्रयासों में ग्रामीण क्षेत्रों से उल्लेखनीय जनभागीदारी मिल रही है।
जनअभियान परिषद ने दिए जल संरक्षण कार्यों के आंकड़े
मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर ने प्रदेश में चल रहे जल संरक्षण कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि हजारों जल संरचनाओं का पुनर्जीवन जनसहयोग से किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट कम हो रहा है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में जल संरक्षण केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनआंदोलन का रूप ले चुका है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य ने जल संचयन और जल संरचना पुनर्जीवन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बनाई है।
नर्मदा चिंतन संगोष्ठी जैसे आयोजन न केवल जागरूकता बढ़ा रहे हैं, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।
