MP: आबकारी विभाग ने 1400 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया शराब के कारोबार में सख्ती जारी
MP आबकारी विभाग ने पिछले तीन साल में शराब के कारोबार पर सख्ती बढ़ाते हुए अपने राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की है। 2025 के पहले नौ महीनों में ही विभाग ने कुल 1400 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है, जो कि लगातार बढ़ते हुए आंकड़ों को दर्शाता है। वर्ष 2023 में आबकारी विभाग ने 8408 केस दर्ज किए थे, जो 2024 में बढ़कर 9537 हो गए, और अब तक 2025 में 9989 प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। इस तरह, पिछले तीन वर्षों में कुल 27,934 मामलों की जांच की गई है।
देशी शराब की जब्ती में उतार-चढ़ाव
सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी के अनुसार, देशी शराब की जब्ती में वर्ष 2023 में 17,917 लीटर शराब जब्त की गई थी, जो 2024 में घटकर 11,170 लीटर रह गई। 2025 में यह आंकड़ा फिर बढ़कर 14,589 लीटर तक पहुंच गया, हालांकि यह 2023 के स्तर तक नहीं पहुंच सका। वहीं, महुआ लाहन की जब्ती में लगातार गिरावट देखी गई। 2023 में 1.72 लाख क्विंटल महुआ लाहन जब्त किया गया था, जो 2024 में घटकर 1.65 लाख क्विंटल और 2025 में सिर्फ 1.16 लाख क्विंटल रह गया है।
विदेशी शराब की जब्ती में बढ़ोतरी
विदेशी शराब की जब्ती में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2024 में जहां 1941 लीटर विदेशी शराब जब्त की गई थी, वही 2025 में यह संख्या बढ़कर 5232 लीटर तक पहुंच गई। इसके अलावा, बियर की जब्ती भी बढ़ी है, 2023 में जहां 4703 लीटर बियर जब्त की गई, वही 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 6304 लीटर तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी शहर में रेस्टोरेंट, बार, पब और नाइट-लाइफ कल्चर के कारण देखी जा रही है, जो इस क्षेत्र में शराब की खपत को बढ़ावा दे रहे हैं।

कम लाइसेंस में अधिक कारोबार
आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में FL-2, FL-3 और FL-4 लाइसेंसों की संख्या लगभग स्थिर रही है, लेकिन इन लाइसेंसों के तहत होने वाली शराब की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2023 में विदेशी माल्ट शराब से विभाग की आय 251.53 करोड़ रुपये थी, जो 2024 में बढ़कर 277.77 करोड़ रुपये हो गई, और 2025 में यह बढ़कर 330.03 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इससे स्पष्ट है कि कम लाइसेंसों के बावजूद शराब के कारोबार में बड़ा इजाफा हुआ है, जो प्रति काउंटर खपत और प्रीमियमाइजेशन में बढ़ोतरी को दर्शाता है।
यह बढ़ती बिक्री इस तथ्य को भी स्पष्ट करती है कि ग्राहकों की मांग और शराब की विविधता में वृद्धि हो रही है। प्रीमियम श्रेणी की शराब और विदेशी ब्रांडों की खपत में बढ़ोतरी हो रही है, जिसका असर विभाग के राजस्व पर दिख रहा है। इसके साथ ही, शराब के खपत पैटर्न में बदलाव भी देखा गया है, जहां पहले लोग सस्ती शराब की ओर रुख करते थे, वहीं अब प्रीमियम और विदेशी ब्रांड्स को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस बदलाव के कारण, शराब व्यापार में अब सिर्फ मात्रा ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे न केवल राज्य को अतिरिक्त राजस्व मिल रहा है, बल्कि यह व्यापारियों और खुदरा विक्रेताओं के लिए भी फायदे का सौदा साबित हो रहा है, जो उच्चतम मुनाफा कमाने के लिए प्रीमियम शराब पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
रेस्टोरेंट-बार से बढ़ी कमाई
आबकारी विभाग की कुल आय भी लगातार बढ़ रही है। 2023 में विभाग ने कुल 593.30 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, जो 2024 में बढ़कर 614.67 करोड़ रुपये हो गया, और 2025 में यह आंकड़ा 617.22 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके अलावा, रेस्टोरेंट और बार क्षेत्र से विभाग की कमाई में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। 2023-24 में यह आय 1502.24 करोड़ रुपये रही, जो 2024-25 में बढ़कर 1702.47 करोड़ रुपये हो गई। 2025-26 में दिसंबर तक ही 1408.82 करोड़ रुपये का राजस्व आ चुका है।
आबकारी विभाग की सख्त कार्रवाई जारी
इस बीच, ग्रामीण क्षेत्रों में देशी शराब निर्माण और शराब के अवैध कारोबार पर सख्ती बढ़ाने के लिए विभाग ने विशेष कदम उठाए हैं। विभाग ने हाल ही में कई प्रमुख कार्रवाई की है, जिसमें अवैध शराब की निर्माण, बिक्री और परिवहन के खिलाफ कठोर कदम उठाए गए हैं। आने वाले दिनों में भी इस प्रकार की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी ताकि प्रदेश में शराब के अवैध कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
आबकारी विभाग की यह सख्ती और राजस्व में बढ़ोतरी, राज्य सरकार की शराब नीति को लागू करने और स्वास्थ्य के लिहाज से भी शराब के दुरुपयोग को नियंत्रित करने के उद्देश्य से की जा रही है।
