MP में इस साल 15 लाख पेड़ों की कटाई विकास परियोजनाओं के नाम पर हरियाली पर संकट
MP में इस साल लगभग 15 लाख पेड़ों को काटने की योजना है। राजधानी भोपाल से लेकर सिंगरौली, मंडला, डिंडौरी, इंदौर, ग्वालियर और अन्य क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की बलि दी जा रही है। इनमें नई सड़क, रेलवे, मेट्रो, हाईवे और कोल ब्लॉक प्रोजेक्ट शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह विकास के नाम पर सरकारी अनुमति से हरियाली की सुनियोजित हत्या के समान है। प्रदेश के अधिकतर शहरों में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है और पेड़ों की कटाई से यह स्थिति और गंभीर हो जाएगी।
सिंगरौली-धिरौली कोल ब्लॉक में कटाई
सिंगरौली जिले में कोल ब्लॉक के लिए अब तक 35 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि 5.70 लाख पेड़ों को काटने की तैयारी है। धिरौली वन क्षेत्र में सरई, सागौन, साजा, हल्दू, धावन, महुआ, कारी, कोसम, जामुन, बहेड़ा, हर्रा, धवई, आंवला जैसी कई प्रजातियों के पेड़ों की बहुतायत है।
कोल ब्लॉक प्रोजेक्ट के लिए 1397.54 हेक्टेयर वन भूमि आवंटित की गई है, जिसमें 1335.35 हेक्टेयर घने जंगल शामिल हैं। इस क्षेत्र की कटाई से जैव विविधता पर भी गंभीर असर पड़ने की संभावना है।
सड़क और रेलवे परियोजनाओं के लिए कटाई
प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए भी बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं।
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खंडवा-खरगोन: महू-खंडवा रेलवे लाइन के गेज परिवर्तन के लिए 1.25 लाख पेड़ काटने का प्रस्ताव है। यह मामला फिलहाल होल्ड पर है।
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विदिशा-सागर-छतरपुर: भोपाल- कानपुर हाईवे के निर्माण में जंगल के बीच से गुजरते हुए 25,377 पेड़ काटे जा चुके हैं।
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इंदौर-उज्जैन: सड़क चौड़ीकरण और सिक्सलेन के लिए 3,000 पेड़ काटे जाएंगे।
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भोपाल: अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट के तहत सड़क को फोरलेन से 10 लेन अपग्रेड करने के लिए 7,871 पेड़ काटे जाएंगे। इसके अलावा कोलार बायपास और बंगरसिया से भोजपुर फोरलेन सड़क परियोजना में भी 4,105 और 488 पेड़ क्रमशः काटे जाएंगे।
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ग्वालियर: थाटीपुर रीडेंसिफिकेशन योजना में 3,000 पुराने पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि 6,700 पेड़ों की और कटाई प्रस्तावित है।

इन सभी परियोजनाओं में वन विभाग की अनुमति के तहत पेड़ों की कटाई हो रही है।
हवा की गुणवत्ता और पर्यावरणीय चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ों की इतनी बेतहाशा कटाई से प्रदेश में वायु गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ेगा। शहरों में पहले ही AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) चिंताजनक स्तर पर है, और पेड़ों की कटाई से प्रदूषण बढ़ सकता है।
वन विशेषज्ञ और पर्यावरणविद इस कटाई को हरियाली की सुनियोजित हत्या मान रहे हैं। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय प्रभाव का संतुलन बनाए बिना केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना भविष्य में गंभीर पारिस्थितिक संकट पैदा कर सकता है।
परियोजनाओं का विस्तृत विवरण
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सिंगरौली-धिरौली कोल ब्लॉक: लगभग 5.70 लाख पेड़ काटने की तैयारी।
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खंडवा-खरगोन रेलवे लाइन: 1.25 लाख पेड़ प्रस्तावित।
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विदिशा-सागर-छतरपुर हाईवे: 25,377 पेड़ काटे जा चुके हैं।
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इंदौर-उज्जैन रोड चौड़ीकरण: 3,000 पेड़।
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भोपाल अयोध्या बायपास और कोलार बायपास: 7,871 + 4,105 पेड़।
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ग्वालियर रीडेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट: 3,000 + 6,700 पेड़।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर हरियाली प्रभावित हो रही है।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती
MP सरकार द्वारा विकास परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई को अनुमति देना आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के दृष्टिकोण से जरूरी बताया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ों की इतनी व्यापक कटाई से जैव विविधता, पारिस्थितिकी और स्थानीय जलवायु पर स्थायी असर पड़ेगा।
वन और पर्यावरण विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि प्रत्येक परियोजना में ट्रांसपेरेंसी के साथ पेड़ लगाने और संरक्षण योजना बनाई जाए। नए पौधे लगाने के साथ-साथ पुराने हेरिटेज पेड़ों की सुरक्षा पर भी जोर दिया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
MP में साल 2026 में लगभग 15 लाख पेड़ों की कटाई विकास परियोजनाओं के नाम पर हो रही है। इसमें सड़क, रेलवे, कोल ब्लॉक और मेट्रो जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पर्यावरण संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो यह प्रदेश की हरियाली और हवा की गुणवत्ता दोनों के लिए गंभीर संकट बन सकता है।
