मोहन यादव पर संकट: अमित शाह की फटकार, बच्चों की मौत और मध्यप्रदेश में बढ़ता भ्रष्टाचार
भोपाल/दिल्ली, 2025: मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की कुर्सी अब खतरे में दिखाई दे रही है। राजधानी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई ताज़ा बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मोहन यादव को सुधार का अंतिम अवसर मिल चुका है। यदि उन्होंने अगले कुछ महीनों में कार्यशैली में सुधार नहीं किया तो उनकी विदाई तय मानी जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि बैठक का माहौल अत्यंत तनावपूर्ण था। अमित शाह ने सीधे तौर पर मोहन यादव को चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार, अफसरशाही और जनता से दूरी जैसी समस्याओं को तुरंत दूर किया जाए।
दिल्ली बैठक में मोहन यादव की फटकार
आज दिल्ली में हुई बैठक में अमित शाह ने साफ कर दिया कि मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कार्यशैली सुधारना अब सर्वोच्च प्राथमिकता है।
-
तीन महीने पहले अमित शाह ने मोहन यादव को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया था। कहा गया कि प्रदेश की सरकार की छवि सुधारो, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाओ और जनता का विश्वास जीतो।
-
लेकिन इन तीन महीनों में स्थिति और बिगड़ गई। मोहन यादव ने सुधार के बजाय भ्रष्टाचार और अफसरशाही की नई हदें पार कर दी।
-
बैठक के बाद मुख्यमंत्री घबराए और डरे हुए नजर आए। सूत्रों की मानें तो दिल्ली से लेकर भोपाल तक पार्टी नेतृत्व की नजर अब उनकी कार्यशैली पर है।

बच्चों की मौत और सरकार की बेरुखी
मध्यप्रदेश में हाल ही में ज़हरीली कफ़ सिरप से 19 मासूम बच्चों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया।
जांच और कार्रवाई में देरी
-
जब बच्चों की जान जा रही थी, तब राज्य सरकार केवल बयान जारी करने और जिम्मेदारी टालने में लगी रही।
-
किसी मंत्री ने इस्तीफ़ा नहीं दिया, न ही मुख्यमंत्री ने कठोर कदम उठाए।
-
दिल्ली में अमित शाह को मिली रिपोर्ट में यह कहा गया कि सरकार ने पूरे मामले को दबाने की कोशिश की।
जनता में नाराज़गी
- इस घटना ने प्रदेश में सरकार की विश्वसनीयता को बुरी तरह नुकसान पहुँचाया।
- लोग सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं और अब यह धारणा बन चुकी है कि सरकार जनता की नहीं, अफसरों और दलालों की सुनती है।
- भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी बेचैनी बढ़ गई है।
भ्रष्टाचार और अफसरशाही का बोलबाला
मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार अब आम बात बन चुका है।
भर्ती और तबादला घोटाले
- हर सरकारी पद पर पैसों का खेल चल रहा है।
- बिना रिश्वत कोई भी प्रशासनिक कार्य संभव नहीं।
- शिकायतों की संख्या बढ़ रही है और पार्टी की साख को गंभीर नुकसान हो रहा है।
अमित शाह की चेतावनी बेअसर
- अमित शाह ने साफ कहा था कि भ्रष्टाचार पर रोक लगाएं।
- लेकिन उल्टा, हालात और बिगड़े। शिकायतें बढ़ गई और जनता का भरोसा टूट रहा है।
प्रभाव
- प्रदेश में जनता और पार्टी दोनों का विश्वास कमजोर हुआ।
- भाजपा के लिए यह चिंता का विषय बन गया कि यदि सुधार नहीं हुआ तो अगले चुनाव में बड़ा नुकसान होगा।
अपराध और माफिया का बढ़ता प्रभाव
प्रदेश में अपराध दर लगातार बढ़ रही है।
- महिलाओं पर हमले, लूट और नशे का कारोबार बढ़ गया।
- कई जगह माफिया नेताओं के संरक्षण में सक्रिय हैं।
- पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है।
- कानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है।
अमित शाह ने इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लिया है और कहा है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो पार्टी नेतृत्व नए चेहरे की तलाश करेगा।
जनता से दूरी और अफसरों पर भरोसा
मोहन यादव पर आरोप हैं कि वे जनता से कट चुके हैं।
- ज्यादातर फैसले कुछ अफसरों और सलाहकारों की राय से लिए जाते हैं।
- कई बीजेपी विधायक शिकायत कर चुके हैं कि मुख्यमंत्री उनसे संवाद नहीं करते।
- पार्टी संगठन में भी यह बात फैल चुकी है कि मोहन यादव न तो जनता के बीच लोकप्रिय हैं और न ही पार्टी में भरोसेमंद।
यह दूरी जनता और पार्टी दोनों के लिए खतरा बन रही है।
अमित शाह का अल्टीमेटम और विदाई की संभावना
सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने मोहन यादव को तीन महीने का अंतिम अवसर दिया था।
- लक्ष्य था कि मध्यप्रदेश में प्रशासनिक सुधार और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाए।
- नतीजा उल्टा निकला, हालात और बिगड़े।
- अब पार्टी नेतृत्व नए चेहरे की तलाश कर रहा है, जो साफ छवि वाला हो और जनता में भरोसा पैदा कर सके।
कहा जा रहा है कि नवंबर या दिसंबर तक मोहन यादव की विदाई तय हो सकती है।
जनता का गुस्सा और बीजेपी में बेचैनी
प्रदेश में जनता नाराज़ है।
- लोग कहते हैं कि सरकार सिर्फ बयान देती है, काम कुछ नहीं करती।
- बच्चों की मौत, बढ़ते भ्रष्टाचार और अपराध ने यह धारणा मजबूत कर दी है कि सरकार जनता के बजाय अफसरों और दलालों की सुनती है।
- पार्टी के अंदर डर है कि यदि जल्दी बदलाव नहीं हुआ तो अगले चुनाव में बड़ा नुकसान होगा।
मोहन यादव के लिए उलटी गिनती शुरू
मोहन यादव को सुधार का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने इसे कमाई का आखिरी समय मान लिया।
- अब उनकी कुर्सी पर संकट स्पष्ट है।
- दिल्ली से लेकर भोपाल तक सभी जानते हैं कि मोहन यादव की “उलटी गिनती” शुरू हो चुकी है।
- अगले दो महीनों में सुधार न हुआ तो मध्यप्रदेश में नया नेतृत्व देखने को मिलेगा।
