2025 में मोहन यादव की नई योजनाओं की झड़ी, 2026 में प्रदेश को मिलेगा भरपूर लाभ
भोपाल: साल 2025 मध्यप्रदेश के लिए निवेश, विकास और सामाजिक सुधार के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हुआ। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उद्योग, कृषि, परिवहन और सामाजिक क्षेत्र में कई नई योजनाएं शुरू की हैं। इन पहलों का लक्ष्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना और आम नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर करना है।
जीआईएस में निवेश और उद्योग नीतियों की बाढ़
फरवरी 2025 में राजधानी भोपाल में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (GIS) ने मध्यप्रदेश को निवेश का नया केंद्र बना दिया। इस समिट में 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिससे राज्य देश में तीसरे सबसे बड़े निवेश प्रस्ताव प्राप्त करने वाले राज्यों में शामिल हुआ।
इवेस्टर समिट के दौरान कई नई नीतियां लागू की गईं, जिनमें शामिल हैं:
- कृषि, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण नीति
- टेक्सटाइल, परिधान, फुटवेयर और खिलौने नीति
- एयरोस्पेस और रक्षा उत्पादन प्रोत्साहन नीति
- फार्मास्यूटिकल्स, बायोटेक्नोलॉजी और मेडिकल डिवाइस नीति
- ईवी विनिर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण नीति
- पर्यटन नीति 2025
इन नीतियों के माध्यम से निवेशकों को उद्योग स्थापित करने में मदद मिलेगी और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

कृषि और डेयरी क्षेत्र में नई पहल
अप्रैल 2025 में डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना शुरू की गई। इसके तहत 25 से अधिक पशुओं की इकाई लगाने वाले किसानों को 42 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही, राज्य सरकार द्वारा 25–33% तक की सब्सिडी दी जाती है।
प्रदेश के डेयरी उद्योग को मजबूत बनाने के लिए सांची दुग्ध संघ और नेशनल डेयरी बोर्ड के बीच समझौता हुआ। इस पहल से किसानों की आमदनी बढ़ेगी और राज्य का दुग्ध उत्पादन भी बढ़ेगा।
परिवहन और शहरों में बेहतर सुविधा
प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना शुरू की गई। इसके तहत शहरों और ग्रामीण इलाकों में बेहतर परिवहन सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया। योजना के लिए राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी गठित की जा रही है और इसकी प्रारंभिक पूंजी 101 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
इस पहल से न केवल यात्रियों के लिए यात्रा आसान होगी, बल्कि व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
किसानों के लिए भावांतर भुगतान और ऊर्जा समाधान
मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू की। केंद्र सरकार द्वारा तय MSP 5328 रुपये प्रति क्विंटल के अनुसार, मंडी में यदि सोयाबीन MSP से कम में बिकता है, तो सरकार बैंक खातों में अंतर राशि जारी करती है। यह योजना 24 अक्टूबर 2025 से पूरे प्रदेश में लागू की गई।
ऊर्जा क्षेत्र में, बकायादार उपभोक्ताओं का बोझ कम करने के लिए बकाया समाधान योजना शुरू की गई। इस योजना के तहत 90 लाख उपभोक्ताओं के बिजली बिलों पर 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का सरचार्ज माफ किया गया। योजना दो चरणों में लागू हुई:
- पहला चरण: 3 नवंबर – 31 दिसंबर 2025
- दूसरा चरण: 1 जनवरी – 28 फरवरी 2026
हालांकि योजना को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली, फिर भी यह नागरिकों को राहत देने वाला कदम साबित हुई।
धार्मिक और सामाजिक विकास की पहल
राज्य सरकार ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए श्रीकृष्ण पाथेय योजना की शुरुआत की। इसमें भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी जगहों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना के लिए 2025–26 के बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मां की बगिया योजना शुरू की गई। इसके तहत 30,000 स्व सहायता समूह की पात्र महिलाओं की निजी भूमि पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करेगी।
निष्कर्ष
2025 में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने निवेश, कृषि, परिवहन, ऊर्जा और सामाजिक क्षेत्रों में कई ठोस कदम उठाए। इन पहलों से न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली, बल्कि आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार के नए अवसर भी पैदा हुए। 2026 में इन योजनाओं के प्रभाव के चलते प्रदेश को आर्थिक और सामाजिक लाभ की भरपूर उम्मीद है।
