मोहन कैबिनेट में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर चर्चा संभव, SPV कंपनी तलाशेगी जमीन | दैनिक स्वराज वाणी
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार, 15 अक्टूबर को मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक प्रस्तावित है। बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इनमें इंदौर-भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेस-वे के आसपास प्रदेश का बड़ा औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना प्रमुख मानी जा रही है। इस प्रस्ताव के तहत एक विशेष प्रयोजन कंपनी यानी स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) गठित करने पर विचार किया जा सकता है। कंपनी एक्सप्रेस-वे के आसपास उद्योगों के लिए उपयुक्त जमीन तलाशने और औद्योगिक विकास की संभावनाओं का आकलन करेगी।
फिलहाल कॉरिडोर और SPV कंपनी को लेकर कैबिनेट की मंजूरी की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे प्रस्तावित योजना के रूप में ही देखा जा रहा है। मंजूरी मिलने की स्थिति में आगे जमीन की उपलब्धता, स्थानों के चयन और औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
करीब 600 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे के आसपास योजना
प्रस्तावित इंदौर-भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेस-वे की लंबाई करीब 600 किलोमीटर बताई जा रही है। योजना के अनुसार, यह मार्ग तीन बड़े शहरों को जोड़ेगा और इसके आसपास नए औद्योगिक क्षेत्रों की संभावनाएं तलाश की जाएंगी। रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार सड़क संपर्क और जमीन की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ऐसे स्थानों की पहचान करना चाहती है, जहां उद्योग स्थापित किए जा सकें।
एक्सप्रेस-वे के किनारे उद्योग विकसित होने से माल परिवहन और शहरों के बीच संपर्क को सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना का वास्तविक स्वरूप, स्थानों की संख्या और निवेश से जुड़े विवरण आगे की योजना और आधिकारिक फैसलों के बाद ही स्पष्ट होंगे।
जमीन की तलाश और औद्योगिक स्थानों का आकलन करेगी SPV
प्रस्तावित SPV कंपनी का मुख्य काम एक्सप्रेस-वे के आसपास उपलब्ध जमीन और औद्योगिक विकास की संभावनाओं का अध्ययन करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी को संभावित स्थान चिह्नित करने और जमीन से जुड़े विकल्पों का आकलन करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। जमीन अधिग्रहण से संबंधित अधिकारों पर भी विचार होने की बात सामने आई है, लेकिन इस संबंध में अंतिम निर्णय कैबिनेट की मंजूरी और सरकारी आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।
कंपनी बनने के बाद किन इलाकों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जा सकती हैं, यह तय करने के लिए जमीन, सड़क संपर्क और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद संभावित क्षेत्रों के विकास की आगे की रूपरेखा तैयार हो सकती है। रिपोर्टों में इस काम के लिए करीब एक वर्ष की समय-सीमा का उल्लेख है।
आष्टा और धरमपुरा के औद्योगिक पार्क भी चर्चा में
औद्योगिक कॉरिडोर की योजना के साथ सीहोर जिले के आष्टा और जबलपुर-भोपाल मार्ग के बीच धरमपुरा में औद्योगिक पार्क विकसित करने की संभावनाओं का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, धरमपुरा में 954 एकड़ में मल्टी-प्रोडक्ट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की योजना है, जिसकी लागत 576 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं आष्टा में करीब 21 हजार एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक पार्क का प्रस्ताव सामने आया है। इन योजनाओं से जुड़े भूमि और विकास संबंधी विवरणों पर अंतिम स्थिति आधिकारिक निर्णयों के बाद स्पष्ट होगी।
रोजगार और निवेश की संभावनाएं
औद्योगिक कॉरिडोर की योजना का उद्देश्य सड़क संपर्क के साथ नए औद्योगिक क्षेत्रों की संभावनाएं तलाशना है। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो इससे निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर तैयार करने की संभावना बन सकती है। हालांकि, उद्योगों की संख्या, निवेश, रोजगार और परियोजना की समय-सीमा को लेकर अभी कोई अंतिम आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
कैबिनेट बैठक में SPV के गठन पर फैसला होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कंपनी को कौन-सी जिम्मेदारियां और अधिकार दिए जाएंगे। फिलहाल एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक जमीन तलाशने और संभावित क्षेत्रों की पहचान करने का प्रस्ताव चर्चा में है।### Sources:
