Modi Cabinet: कैबिनेट मीटिंग से पहले फेरबदल की अटकलें तेज, इस्तीफे और राष्ट्रपति-पीएम मुलाकात से बढ़ी सियासी हलचल
कैबिनेट बैठक पर टिकी देश की नजरें
Modi Cabinet: केंद्र सरकार की आज होने वाली कैबिनेट बैठक पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। बैठक से ठीक पहले दो अहम घटनाओं ने संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं को और तेज कर दिया है। केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषक मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की संभावनाएं जता रहे हैं।
हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों ने अटकलों को और मजबूत कर दिया है।
जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा: बड़ा राजनीतिक संकेत?
मंगलवार सुबह केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका था और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें दोबारा उच्च सदन में स्थान नहीं दिया।
जॉर्ज कुरियन अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि उनका मंत्री पद औपचारिक रूप से समाप्त हो चुका है।
उनके इस्तीफे को राजनीतिक गलियारों में संभावित कैबिनेट बदलाव के पहले संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति भवन में पीएम मोदी की मुलाकात बनी चर्चा का विषय
मंगलवार शाम राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर आधिकारिक रूप से कोई जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे भी संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़कर देख रहे हैं।
सरकारी स्तर पर इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन समय और राजनीतिक घटनाक्रम ने अटकलों को और हवा दे दी है।
राज्यसभा चुनाव के बाद बदलते समीकरण
हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों के बाद भाजपा ने कुछ मौजूदा मंत्रियों को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। इनमें जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू के नाम प्रमुख हैं।
जहां जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्होंने मंत्री पद छोड़ दिया, वहीं रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन उन्होंने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है।
नियमों के अनुसार, कोई भी मंत्री बिना सांसद बने छह महीने तक पद पर रह सकता है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे उनका राजनीतिक भविष्य किस दिशा में जाता है।
रवनीत सिंह बिट्टू ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि वे पंजाब की राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में भी भाग ले सकते हैं।
‘वन मैन, वन पोस्ट’ फॉर्मूला फिर चर्चा में
भाजपा के भीतर संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए ‘वन मैन, वन पोस्ट’ सिद्धांत पर भी चर्चा तेज हो गई है।
हाल ही में हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि वे केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। इसी तरह पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष होने के साथ-साथ वित्त राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद कुछ नेताओं से मंत्री पद छोड़ा जा सकता है, जिससे कैबिनेट में नए चेहरों को जगह मिल सके।
दल-बदल और नए सहयोगियों की भूमिका
हाल के महीनों में कई विपक्षी दलों के नेता और सांसद NDA के करीब आए हैं। इनमें कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनकी भूमिका को लेकर सरकार में नई जिम्मेदारियों की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
आम आदमी पार्टी से जुड़े कुछ सांसदों के नाम भी चर्चा में हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों के एनडीए के समर्थन में आने की खबरें भी सामने आई हैं।
इसके अलावा शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए सांसदों को भी सरकार या संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक रणनीति और संसद में बहुमत की गणना
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार संसद में अपनी स्थिति और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। भविष्य में कुछ बड़े संवैधानिक संशोधनों के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता पड़ सकती है।
ऐसे में सहयोगी दलों और नए समर्थन देने वाले सांसदों को सरकार और संगठन में स्थान देकर राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की जा सकती है।
चुनावी राज्यों पर विशेष फोकस
अगले साल पंजाब और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा मंत्रिमंडल फेरबदल में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रख सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि सरकार चुनावी राज्यों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल कर सकती है ताकि जमीनी स्तर पर राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया जा सके।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार की आज होने वाली कैबिनेट बैठक से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म है। जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री मुलाकात और संगठनात्मक समीकरणों ने कैबिनेट फेरबदल की अटकलों को और तेज कर दिया है।
हालांकि अंतिम निर्णय बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन मौजूदा संकेत बताते हैं कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की टीम में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
