जमीन अधिग्रहण के खिलाफ गांव-गांव पहुंचीं विधायक सेना महेश पटेल, ग्राम सभाओं में ग्रामीणों ने जताया विरोध
दैनिक स्वराज वाणी | ब्यूरो रिपोर्ट — खलील मंसूरी, अलीराजपुर
ग्रामीणों का दो टूक संदेश—“जमीन हम नहीं देंगे, चाहे कुछ भी हो जाए”; सरपंचों ने प्रस्ताव पारित कराने के लिए बार-बार फोन आने का लगाया आरोप, 25 अगस्त को जिला मुख्यालय पहुंचने का आह्वान
जोबट/अलीराजपुर। प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण को लेकर जोबट विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। शनिवार को जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने विभिन्न गांवों का दौरा कर ग्रामीणों, सरपंचों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज के वरिष्ठ लोगों से जमीन से जुड़े मुद्दे पर सीधा संवाद किया। इस दौरान कई स्थानों पर ग्रामीणों ने प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण का विरोध करते हुए स्पष्ट कहा कि वे अपनी जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं।
विधायक ने मोटा उमर, सेवड़, बड़ी जुवारी, छोटी जुवारी, सेमलाया, उबगारी और पनेरी सहित विभिन्न गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों की राय जानी। उन्होंने ग्रामीणों से 25 अगस्त को जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित आंदोलन में बड़ी संख्या में पहुंचने का आह्वान भी किया।
जनसंवाद के दौरान ग्रामीणों ने अपनी जमीन को आजीविका, परिवार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा बताते हुए कहा—“जमीन हम नहीं देंगे, चाहे कुछ भी हो जाए।”
हालांकि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया, संबंधित परियोजना, प्रस्तावों की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति और सरपंचों द्वारा लगाए गए दबाव संबंधी आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
विधायक बोलीं—यह राजनीति नहीं, जल-जंगल-जमीन के अधिकार का सवाल
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए विधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि जमीन का मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल या चुनाव तक सीमित नहीं है। उन्होंने इसे स्थानीय समाज और ग्रामीणों के जल-जंगल-जमीन से जुड़े अधिकारों का विषय बताया।
विधायक ने कहा कि इस मुद्दे को भाजपा-कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के रूप में देखने के बजाय ग्रामीणों के भविष्य और उनकी जमीन से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “यह हमारे समाज, हमारी जमीन और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की लड़ाई है। पहले समाज और जमीन, राजनीति बाद में।”
विधायक ने ग्रामीणों से संगठित होकर अपनी बात लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन के सामने रखने की अपील की।
कई गांवों की जमीन को लेकर ग्रामीणों में चिंता
विधायक सेना पटेल ने जनसंवाद के दौरान दावा किया कि पिछले दो-तीन वर्षों से क्षेत्र में जमीन से जुड़ी प्रक्रिया और पत्राचार चल रहा है। उन्होंने उबलड, खेरवा, बलदमूंग, खट्टाली, डाबडी, तलावाडी, जुवारी, उबगारी और पनेरी सहित कई गांवों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में जमीन को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।
उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि जमीन से संबंधित मुद्दे को पूर्व में भी प्रशासन और सरकार के विभिन्न स्तरों पर उठाया गया है। विधायक के अनुसार इस मामले को जिला स्तर से लेकर भोपाल तक पहुंचाया जा चुका है।
उन्होंने डाबडी में पूर्व में आयोजित जनसभा और आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जमीन से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रखी थी।
विधानसभा में भी उठाया जमीन का मामला
सेना महेश पटेल ने ग्रामीणों से संवाद के दौरान कहा कि उन्होंने विधानसभा में भी क्षेत्र की जमीन से संबंधित विषय उठाया था। विधायक ने मुख्यमंत्री की ओर से आदिवासी परिवारों की जमीन नहीं लिए जाने संबंधी कथित आश्वासन का उल्लेख करते हुए बाद में जारी हुए पत्रों को लेकर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी परिवारों की जमीन नहीं लेने की बात कही गई थी, तो इसके बाद जमीन से संबंधित पत्राचार क्यों जारी रहा।
विधायक ने अपने संबोधन में 25 अक्टूबर 2024, 13 नवंबर 2024 और 27 मई 2025 की तारीख वाले पत्रों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि पंचायतों से जमीन संबंधी प्रस्ताव पारित कराने की कथित प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में आशंका और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
इन पत्रों की विषयवस्तु और वर्तमान प्रशासनिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभागीय रिकॉर्ड से होना बाकी है।
सरपंचों ने लगाया बार-बार फोन आने का आरोप
गांवों में आयोजित जनसंवाद के दौरान कुछ सरपंचों ने भी विधायक के सामने अपनी बात रखी। उनका आरोप है कि जिला पंचायत और जनपद पंचायत के अधिकारियों के माध्यम से ग्राम पंचायतों को जमीन से संबंधित प्रस्ताव पारित करने के लिए बार-बार फोन किए जा रहे हैं।
सरपंचों का दावा है कि उनसे प्रस्ताव जल्द पारित कर आगे भेजने के लिए कहा जा रहा है। कुछ पंचायत प्रतिनिधियों ने एक ही विषय को लेकर कई बार फोन आने की बात भी कही।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब गांव के लोग जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं और ग्राम सभाओं में इसका विरोध किया जा रहा है, तो पंचायतों से जमीन संबंधी प्रस्ताव पारित कराने के लिए कथित रूप से बार-बार संपर्क क्यों किया जा रहा है।
हालांकि अधिकारियों की ओर से फोन कर दबाव बनाए जाने के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित जिला एवं जनपद पंचायत अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
मोटा उमर में ग्राम सभा ने जताई आपत्ति
प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण को लेकर मोटा उमर में ग्राम सभा आयोजित की गई। ग्रामीणों के अनुसार बैठक में जमीन नहीं देने को लेकर सामूहिक रूप से आपत्ति दर्ज की गई और इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया।
बताया गया कि ग्राम सभा में पेसा कानून के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए ग्रामीणों ने अपनी जमीन को लेकर निर्णय में ग्राम सभा की भूमिका पर जोर दिया।
बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने कहा कि जमीन उनके जीवन और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए उससे संबंधित किसी भी निर्णय में स्थानीय लोगों की बात को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बड़ी जुवारी में भी जमीन देने के खिलाफ प्रस्ताव
बड़ी जुवारी ग्राम पंचायत क्षेत्र में भी ग्राम सभा की बैठक के दौरान जमीन देने का विरोध सामने आया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जमीन नहीं देने की बात कही और प्रस्ताव पारित किए जाने की जानकारी दी गई।
ग्रामीणों का कहना था कि वे अपनी जमीन के संबंध में किसी भी निर्णय से पहले पूरी जानकारी और ग्राम सभा की सहमति चाहते हैं। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जमीन अधिग्रहण का विरोध दर्ज कराया।
इस दौरान कई ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा—“जमीन हम नहीं देंगे, चाहे कुछ भी हो जाए।”
सरपंच हिरला चौहान बोले—ग्राम सभा के निर्णय के साथ हैं

मोटा उमर के सरपंच हिरला चौहान ने कहा कि गांव की जमीन से संबंधित निर्णय ग्रामीणों की भावना और ग्राम सभा के निर्णय के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गांव के लोग जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं और वे ग्राम सभा द्वारा लिए गए सामूहिक निर्णय के साथ खड़े हैं।
उनका कहना था कि गांव के हित से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर ग्रामीणों की राय को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
बड़ी जुवारी के सरपंच राजू भाई ने उठाए सवाल
बड़ी जुवारी ग्राम पंचायत के सरपंच राजू भाई ने भी ग्रामीणों की भावना का समर्थन करते हुए कहा कि पंचायत क्षेत्र के लोग जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं।
उन्होंने सवाल किया कि “जब ग्रामीण अपनी जमीन नहीं देना चाहते तो पंचायत स्तर पर जमीन अधिग्रहण से संबंधित प्रस्ताव पारित करने का सवाल क्यों उठ रहा है?”
सरपंच ने कहा कि पंचायत को गांव के लोगों की सामूहिक भावना के अनुसार कार्य करना चाहिए और जमीन जैसे संवेदनशील विषय पर ग्राम सभा की बात को महत्व दिया जाना चाहिए।
25 अगस्त को जिला मुख्यालय पहुंचने का आह्वान

गांवों के दौरे के दौरान विधायक सेना महेश पटेल ने ग्रामीणों से 25 अगस्त को जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि विभिन्न गांवों के लोग एकजुट होकर अपनी मांग और आपत्ति प्रशासन के सामने रखेंगे।
विधायक ने ग्रामीणों से अपनी बात शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से रखने को कहा। उनका कहना था कि बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी के माध्यम से प्रशासन और सरकार तक क्षेत्र की भावना पहुंचाई जाएगी।
प्रशासनिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति होगी स्पष्ट
फिलहाल जमीन अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रिया को लेकर विधायक, सरपंचों और ग्रामीणों की ओर से कई दावे एवं आरोप सामने आए हैं। पंचायतों पर प्रस्ताव पारित कराने के लिए कथित दबाव, संबंधित पत्राचार और जमीन अधिग्रहण की वास्तविक स्थिति को लेकर प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है।
ऐसे में इन दावों की वास्तविकता संबंधित सरकारी दस्तावेजों और अधिकारियों के आधिकारिक जवाब से ही स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों की ओर से विरोध जारी है और अब सभी की नजर 25 अगस्त को जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित आंदोलन तथा प्रशासन की प्रतिक्रिया पर रहेगी।
