—Advertisement—

गंगा दशहरा पर कालीसिंध तट पर उमड़ा जनसैलाब, मंत्री Gautam Tetwal ने जल संरक्षण का दिलाया संकल्प

Author Picture
Published On: 25 May 2026
गंगा दशहरा पर कालीसिंध तट पर उमड़ा जनसैलाब, मंत्री Gautam Tetwal ने जल संरक्षण का दिलाया संकल्प

—Advertisement—

गंगा दशहरा पर कालीसिंध तट पर उमड़ा जनसैलाब, मंत्री गौतम टेटवाल ने जल संरक्षण का दिलाया संकल्प

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सारंगपुर में हुआ विशेष आयोजन

गंगा दशहरा के पावन अवसर पर सारंगपुर में धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल कपिलेश्वर महादेव धाम पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में राज्य मंत्री Gautam Tetwal ने मां कालीसिंध नदी का विधिवत पूजन-अर्चन कर प्रदेश की खुशहाली, समृद्धि और शुद्ध जल की कामना की।

कार्यक्रम “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और नदियों, तालाबों तथा अन्य जल स्रोतों के संरक्षण के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करना था। धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला यह आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ मां कालीसिंध का पूजन

सोमवार सुबह से ही कपिलेश्वर महादेव धाम पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। गंगा दशहरा के अवसर पर नदी तट को विशेष रूप से सजाया गया था। पूजा स्थल को पारंपरिक फूलों, रंगोलियों और धार्मिक प्रतीकों से सजाया गया।

राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने वैदिक ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार के बीच मां कालीसिंध की पूजा-अर्चना की। उन्होंने नदी को चुनरी अर्पित की और प्रदेश में सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और शुद्ध जल की कामना की।

पूजन के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने “हर हर महादेव” और “मां कालीसिंध की जय” के जयकारों के साथ धार्मिक उत्साह व्यक्त किया।

जल संरक्षण को बताया सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी

पूजन-अर्चन के बाद मंत्री गौतम टेटवाल ने लोगों को संबोधित करते हुए जल संरक्षण के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि नदियां, तालाब और जल स्रोत केवल पानी का माध्यम नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता की पहचान हैं।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ जल उपलब्ध कराना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

मंत्री ने कहा:

“हम सभी को मिलकर जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना होगा। यदि आज हमने जल स्रोतों को नहीं बचाया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।”

b 18

घाट पर सफाई अभियान और श्रमदान

कार्यक्रम के दौरान जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत कालीसिंध नदी घाट पर विशेष सफाई अभियान भी चलाया गया। मंत्री गौतम टेटवाल ने स्वयं घाट पर पहुंचकर श्रमदान किया और सफाई कार्य में भाग लिया।

उन्होंने घाट पर मौजूद लोगों को स्वच्छता बनाए रखने और नदियों में कचरा न डालने की अपील की। इस दौरान स्वयंसेवी संस्थाओं, नगर पालिका कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों ने भी अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई।

सफाई अभियान के दौरान नदी किनारे फैले प्लास्टिक, पूजा सामग्री और अन्य कचरे को हटाया गया। लोगों ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।

“जल है तो कल है” का दिया संदेश

कार्यक्रम में मंत्री टेटवाल ने “जल है तो कल है” का संदेश देते हुए कहा कि जल संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती आबादी, भूजल स्तर में गिरावट और जल स्रोतों के प्रदूषण ने स्थिति को गंभीर बना दिया है।

उन्होंने लोगों से वर्षा जल संरक्षण, जल का सीमित उपयोग और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण की अपील की।

मंत्री ने कहा कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करें तो जल संकट जैसी समस्या से बचा जा सकता है।

जल गंगा संवर्धन अभियान की विशेषता

प्रदेश सरकार द्वारा चलाया जा रहा जल गंगा संवर्धन अभियान जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत नदियों, तालाबों, कुओं और बावड़ियों की सफाई, गहरीकरण और संरक्षण कार्य किए जा रहे हैं।

सारंगपुर में आयोजित यह कार्यक्रम भी उसी अभियान का हिस्सा था। अभियान का उद्देश्य केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों में जल संरक्षण के प्रति स्थायी जागरूकता पैदा करना भी है।

b1 2

बड़ी संख्या में शामिल हुए नागरिक

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नगरवासी, सामाजिक कार्यकर्ता और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। लोगों ने मंत्री के साथ घाट की सफाई में हिस्सा लिया और जल संरक्षण का संकल्प लिया।

कई युवाओं और विद्यार्थियों ने भी अभियान में भागीदारी की। स्थानीय लोगों का कहना था कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाते हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों की रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष पंकज पालीवाल, उपाध्यक्ष प्रतिनिधि नीलेश वर्मा, एसडीएम रोहित भमोर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी हेमेंद्र सिंह गोहिल तथा नगर पालिका अधिकारी दीपक रानवे सहित कई प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

सभी अधिकारियों ने सफाई अभियान में भाग लिया और नागरिकों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया। प्रशासन की ओर से घाट क्षेत्र में स्वच्छता और सुरक्षा के विशेष इंतजाम भी किए गए थे।

धार्मिक आस्था और पर्यावरण जागरूकता का संगम

गंगा दशहरा जैसे धार्मिक पर्व पर आयोजित इस कार्यक्रम ने धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के साथ जल संरक्षण का संकल्प लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि धार्मिक आयोजनों को पर्यावरण जागरूकता से जोड़ा जाए तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से लाया जा सकता है।

b2 2

कालीसिंध नदी का क्षेत्रीय महत्व

कालीसिंध नदी मालवा क्षेत्र की प्रमुख नदियों में से एक मानी जाती है। यह नदी क्षेत्र के किसानों, ग्रामीणों और नगरवासियों के लिए जीवनरेखा की तरह है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी का जल स्तर बनाए रखना और उसकी स्वच्छता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण कई जल स्रोत प्रभावित हुए हैं।

ऐसे में जल संरक्षण से जुड़े अभियान लोगों में नई जागरूकता पैदा कर रहे हैं।

युवाओं को आगे आने की अपील

मंत्री गौतम टेटवाल ने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे जल संरक्षण और स्वच्छता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी यदि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होगी तो भविष्य सुरक्षित रहेगा।

उन्होंने विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों से गांव-गांव और मोहल्लों तक जल संरक्षण का संदेश पहुंचाने की बात कही।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने की पहल की सराहना

पर्यावरण से जुड़े लोगों और सामाजिक संगठनों ने सारंगपुर में आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना की। उनका कहना है कि जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना न मानकर सामाजिक आंदोलन बनाना समय की जरूरत है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि समाज सामूहिक रूप से जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण में भाग ले तो जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

b4

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रही जल संरक्षण की जागरूकता

पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में भी जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी है। लोग अब वर्षा जल संचयन, तालाबों के संरक्षण और भूजल स्तर सुधारने के प्रयासों में रुचि दिखा रहे हैं।

सारंगपुर जैसे कार्यक्रम लोगों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे सामाजिक सहभागिता भी बढ़ती है और लोगों में जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा

कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण को लेकर भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में क्षेत्र के अन्य जल स्रोतों के संरक्षण और सफाई के लिए भी अभियान चलाए जाएंगे।

इसके अलावा स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

निष्कर्ष

गंगा दशहरा के अवसर पर सारंगपुर के कपिलेश्वर महादेव धाम में आयोजित यह कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का बड़ा संदेश देने वाला अभियान साबित हुआ।

राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने मां कालीसिंध की पूजा-अर्चना कर जहां प्रदेश की खुशहाली और शुद्ध जल की कामना की, वहीं लोगों को जल संरक्षण का संकल्प भी दिलाया।

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण बना कि यदि समाज, प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर प्रयास करें तो जल संरक्षण को वास्तव में जनआंदोलन बनाया जा सकता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp