—Advertisement—

Middle East Crisis का असर नहीं, “Made in India” का जलवा जारी; विदेशों में बढ़ी जेनेरिक दवाओं की मांग

Author Picture
Published On: 21 April 2026
Middle East Crisis का असर नहीं, “Made in India” का जलवा जारी; विदेशों में बढ़ी जेनेरिक दवाओं की मांग

—Advertisement—

Middle East Crisis का असर नहीं, “Made in India” का जलवा जारी; 

पीथमपुर स्थित स्पेशल इकोनॉमिक जोन (मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड) की फार्मा कंपनियों ने एक बार फिर भारत की दवा निर्माण क्षमता को वैश्विक मंच पर मजबूत किया है। अंतरराष्ट्रीय तनाव, विशेषकर Middle East Crisis और वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद, जेनेरिक दवाओं के निर्यात में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि लॉजिस्टिक स्तर पर कुछ बाधाएँ सामने आई हैं, जिनमें मुख्य रूप से कंटेनरों की समय पर उपलब्धता और शिपमेंट में देरी शामिल है।

वाणिज्यिक एवं उद्योग विभाग के सेज कमिश्नर तथा मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) द्वारा जारी प्रगति रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि पीथमपुर एसईजेड की फार्मा इंडस्ट्री ने इस वित्तीय वर्ष में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट के अनुसार एसईजेड में 70 से 80 प्रतिशत इकाइयाँ फार्मा क्षेत्र से संबंधित हैं, जो इसे एक प्रमुख फार्मा हब बनाती हैं।

14,302 करोड़ रुपये का निर्यात, पिछले वर्ष से 10.46% अधिक

अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच पीथमपुर एसईजेड से कुल 14,302.25 करोड़ रुपये का निर्यात दर्ज किया गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10.46 प्रतिशत अधिक है, जो वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय फार्मा उद्योग की मजबूती को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि केवल उत्पादन क्षमता का परिणाम नहीं है, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की जेनेरिक दवाओं की बढ़ती स्वीकार्यता का भी प्रमाण है।

अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में मजबूत पकड़

पीथमपुर एसईजेड की फार्मा कंपनियों द्वारा निर्मित दवाएं अमेरिका, जर्मनी, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और खाड़ी देशों सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात की जा रही हैं।

इन देशों में भारतीय दवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण इनकी सस्ती कीमत और उच्च गुणवत्ता है। हाल ही में एसईजेड इकाइयों को देश के भीतर भी दवा बिक्री की अनुमति मिलने से व्यवसायिक अवसर और अधिक बढ़े हैं।

क्यों बढ़ रही है भारतीय जेनेरिक दवाओं की वैश्विक मांग

भारत को “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाता है, और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है यहां की किफायती और भरोसेमंद दवा उत्पादन क्षमता।

भारतीय जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं, जबकि गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होती है। इसी वजह से अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों में इन दवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।

इसके अलावा वैश्विक स्तर पर बढ़ते स्वास्थ्य खर्च और बीमा कंपनियों के दबाव के कारण भी कई देश अब सस्ती दवाओं की ओर रुख कर रहे हैं।

वैश्विक कंपनियों का भारत की ओर रुझान

एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी देखने को मिल रहा है कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से दवाएं बनवा रही हैं। ये कंपनियां भारत में उत्पादन कर अपने ब्रांड नाम से विश्व बाजार में बिक्री कर रही हैं।

यह न केवल भारतीय फार्मा सेक्टर की विश्वसनीयता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत अब वैश्विक सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

निर्यात में वृद्धि के बावजूद चुनौतियाँ भी मौजूद

हालांकि निर्यात में वृद्धि जारी है, लेकिन उद्योग को कुछ व्यावहारिक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है।

कंटेनर समय पर उपलब्ध न होने और लॉजिस्टिक बाधाओं के चलते कई बार माल समय पर विदेशी बाजारों तक नहीं पहुँच पा रहा है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति सामान्य होने पर निर्यात और भी तेजी से बढ़ सकता है।

उद्योग विशेषज्ञों की राय

बेसिक ड्रग्स डीलर्स एसोसिएशन, मध्यप्रदेश के प्रेसिडेंट जेपी मूलचंदानी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर दवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत की दवाएं सस्ती होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी मजबूत पकड़ बनी हुई है। हालांकि युद्ध और तनावपूर्ण परिस्थितियों के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है।

वहीं, एमपी स्मॉल ड्रग मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. दर्शन कटारिया ने कहा कि युद्ध और वैश्विक संकट का असर फार्मा उद्योग पर भी पड़ा है, लेकिन भारतीय दवाओं की सस्ती लागत और उच्च गुणवत्ता के कारण मांग बनी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में स्थिति सामान्य होने पर निर्यात और भी मजबूत होगा।

निष्कर्ष: चुनौतियों के बीच मजबूत होता “मेड इन इंडिया” फार्मा सेक्टर

पीथमपुर एसईजेड का यह प्रदर्शन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारतीय फार्मा उद्योग अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। जेनेरिक दवाओं की बढ़ती मांग ने न केवल निर्यात को बढ़ावा दिया है, बल्कि “मेड इन इंडिया” ब्रांड को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती प्रदान की है।

लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद उद्योग का आत्मविश्वास और उत्पादन क्षमता यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक फार्मा बाजार में और भी बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp