मेघनगर में नवंबर माह के मासिक पुरस्कारों का वितरण सम्पन्न — त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ की पाठशाला में बच्चों ने दिखाया उत्कृष्ट प्रदर्शन
मेघनगर।
जैन समाज में धार्मिक शिक्षा, संस्कार और अध्यात्मिक विकास को समर्पित श्री राज राजेन्द्र जयंतसेन पाठशाला में सोमवार को माह नवंबर के मासिक पुरस्कारों का भव्य वितरण किया गया। यह कार्यक्रम विश्व पूज्य दादा गुरुदेव श्रीमद विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब की पावन परंपरा और वर्तमान गादीपति पुण्य सम्राट गुरुदेव श्रीमद विजय जयंतसेन सुरीश्वरजी महाराज साहब के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सुरीश्वरजी महाराज साहब, तथा आचार्य श्रीमद विजय जयरत्न सुरीश्वरजी महाराज साहब का विशिष्ट आशीर्वाद रहा। वहीं पूज्य साध्वीश्री श्री तत्त्वलताश्रीजी महाराज साहब एवं साध्वीश्री अनेकांतलताश्रीजी महाराज साहब की प्रेरणा ने इस आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की।
पाठशाला में हर माह बच्चों को दिया जाता है सम्मान
मेघनगर का त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ एवं परिषद परिवार लंबे समय से बच्चों के नैतिक, बौद्धिक और धार्मिक विकास के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। इन्हीं गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है—मासिक पुरस्कार वितरण। पाठशाला की संचालिका श्रीमती निशा बाफना ने जानकारी देते हुए बताया कि पाठशाला में पढ़ने वाले बच्चों को प्रतिमाह उनके प्रदर्शन, अनुशासन, नियमितता, पाठ्य सामग्री के ज्ञान और आध्यात्मिक प्रगति के आधार पर पुरस्कृत किया जाता है।
नवंबर माह में जिन बच्चों ने श्रेष्ठ प्रदर्शन किया, उन्हें समाज की वरिष्ठ महिलाओं के हाथों सम्मानित किया गया।
वरिष्ठ जैन महिलाएँ बनीं मुख्य अतिथि
नवंबर माह के पुरस्कारों का वितरण महिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती मधुबाला चौरड़िया और वरिष्ठ सदस्य श्रीमती रतनबेन संघवी द्वारा किया गया। उन्होंने बच्चों को संस्कार, शिष्टाचार, अनुशासन और जैन धर्म के सिद्धांतों के पालन के लिए प्रेरित किया।
श्रीमती मधुबाला चौरड़िया ने अपने संबोधन में कहा कि—
“पाठशाला बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। नियमित अध्ययन और सत्संग उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति देता है।”
श्रीमती रतनबेन संघवी ने बच्चों को प्रतिदिन स्वाध्याय और अच्छा आचरण अपनाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि—
“जैन धर्म का दर्शन केवल उपदेश नहीं, बल्कि जीवन जीने की विधि है। बच्चों में यह संस्कार जितनी जल्दी आएँगे, उतना ही उनका भविष्य उज्ज्वल होगा।”
पाठशाला बच्चों का उत्साह चरम पर
नवंबर माह के पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। कई बच्चों को उत्तम अध्ययन, धर्म शास्त्र ज्ञान, श्लोक/सूत्र पाठ, अनुशासन, नियमित उपस्थिति और सहभागिता के लिए सम्मानित किया गया।
यह आयोजन बच्चों में आगे भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का उत्साह भर गया।
कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों और अभिभावकों ने जैन श्रीसंघ द्वारा निरंतर किए जा रहे ऐसे प्रयासों की प्रशंसा की। अभिभावकों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
महिला परिषद का योगदान सराहनीय
इस अवसर पर महिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती स्नेहलता कावड़िया भी मौजूद रहीं। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए पाठशाला संचालिका और समस्त टीम को शुभकामनाएँ दीं।
उन्होंने कहा कि महिला परिषद लंबे समय से पाठशाला की गतिविधियों में सहयोग करती आई है और आगे भी हर प्रकार से सहायता के लिए तत्पर रहेगी।
संस्कार–प्रधान शिक्षा की अनूठी परंपरा
मेघनगर जैन समाज में यह पाठशाला बच्चों को—
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जैन संस्कृति
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तत्त्वज्ञान
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आगम अध्ययन
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जीवन मूल्यों
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धार्मिक रीति-रिवाज
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प्रेरणादायी कथाएँ
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शिष्टाचार एवं संयम
—सिखाने के लिए जानी जाती है।
पाठशाला का उद्देश्य केवल धार्मिक शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि बच्चों में ऐसा व्यक्तित्व विकसित करना है जिससे वे समाज में आदर्श बन सकें।
समापन
नवंबर माह के मासिक पुरस्कार वितरण कार्यक्रम ने न केवल बच्चों को प्रोत्साहन दिया, बल्कि समाज और पाठशाला के बीच संबंधों को और भी मजबूत किया।
गुरुदेवों की प्रेरणा से संचालित यह परंपरा मेघनगर जैन समाज में संस्कार, शिक्षा और अध्यात्म का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।

