1 अगस्त से 23 दवाओं की कीमतें तय, सरकार ने जारी किया नया रेट चार्ट; ज्यादा पैसे वसूलने पर होगी कार्रवाई
केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देते हुए दवाओं की कीमतों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। 1 अगस्त 2026 से 23 महत्वपूर्ण दवाओं और फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं की नई खुदरा कीमतें लागू कर दी गई हैं। सरकार ने इन दवाओं के रिटेल प्राइस तय कर दिए हैं, जिसके बाद दवा कंपनियां, डिस्ट्रीब्यूटर और मेडिकल स्टोर संचालक निर्धारित कीमत से अधिक राशि नहीं वसूल सकेंगे।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, नई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। सरकार का उद्देश्य जरूरी दवाओं को किफायती दरों पर उपलब्ध कराना और मरीजों पर बढ़ते इलाज के खर्च का बोझ कम करना है।
किन दवाओं की कीमतों में हुआ बदलाव?
नई कीमतों की सूची में कई गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें हृदय रोग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, बुखार, एंटीबायोटिक, मानसिक स्वास्थ्य, आयरन और फोलिक एसिड से जुड़ी दवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा पैरासिटामोल, एंग्जायटी यानी चिंता संबंधी समस्याओं की दवाएं और महिलाओं की प्रजनन क्षमता तथा PCOS से जुड़ी कुछ दवाओं के रिटेल प्राइस भी निर्धारित किए गए हैं।
सरकार के इस फैसले के बाद अब इन दवाओं को तय कीमत से अधिक दाम पर बेचना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
मेडिकल स्टोर पर लागू होंगे नए रेट
NPPA ने नए रेट चार्ट को सभी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर तक पहुंचाने की व्यवस्था की है। स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से दुकानदारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नई कीमतों के अनुसार ही दवाओं की बिक्री करें।
दवा विक्रेताओं को यह भी कहा गया है कि वे ग्राहकों को नई कीमतों की जानकारी उपलब्ध कराएं और निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली न करें।
ज्यादा पैसे वसूलने पर लौटानी होगी राशि
सरकार ने नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई कंपनी, डिस्ट्रीब्यूटर या मेडिकल स्टोर तय कीमत से अधिक पैसे वसूलता है तो उसे अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी।
इतना ही नहीं, अतिरिक्त वसूली गई रकम को ब्याज सहित लौटाना पड़ेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।
GST को लेकर भी दिए गए निर्देश
सरकार ने दवाओं पर लगने वाले GST को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाए हैं। दुकानदार केवल उसी स्थिति में GST अलग से जोड़ सकते हैं, जब उन्होंने वास्तव में सरकार को GST का भुगतान किया हो।
यदि कोई विक्रेता गलत तरीके से अतिरिक्त टैक्स या अन्य शुल्क के नाम पर ज्यादा पैसे लेता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
इससे पहले 39 दवाओं के रेट किए गए थे तय
इससे पहले भी NPPA ने 8 जुलाई को 39 दवाओं की कीमतें तय की थीं। औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश-2013 के तहत सरकार समय-समय पर आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है।
इन 39 दवाओं में ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और अन्य गंभीर बीमारियों में उपयोग होने वाली दवाएं शामिल थीं। इनमें एमलोडिपाइन, बिसोप्रोलोल और टेल्मिसार्टन जैसी दवाओं की कीमतें तय की गई थीं।
इसके अलावा आंखों की दवा, नेपाफेनाक और मोक्सीफ्लोक्सासिन ऑप्थेल्मिक सॉल्यूशन जैसी दवाओं के रेट भी निर्धारित किए गए थे। हार्ट से जुड़ी दवाओं जैसे क्लोपिडोग्रेल, एस्पिरिन और एटोरवास्टेटिन की कीमतें भी नियंत्रित की गई थीं।
मरीजों को मिलेगी राहत
दवाओं की कीमतों में नियंत्रण से सबसे ज्यादा फायदा उन मरीजों को मिलेगा, जो लंबे समय से इलाज करा रहे हैं। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों को हर महीने बड़ी मात्रा में दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।
सरकार का मानना है कि जरूरी दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण रखने से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती बनाया जा सकेगा।
सरकार का सख्त रुख
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि दवाओं की कीमतों को लेकर किसी भी तरह की मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी। दवा कंपनियों और विक्रेताओं को नए नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
यदि कोई कंपनी या दुकानदार तय कीमतों का उल्लंघन करता है तो उससे अतिरिक्त वसूली की रकम ब्याज सहित वापस कराई जाएगी और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने का यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और आम जनता को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
