रीवा घटना के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतरे, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
कोतमा (अनूपपुर)। रीवा में जैन साध्वियों के साथ हुई दर्दनाक दुर्घटना को लेकर पूरे प्रदेश में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में कोतमा नगर में रविवार को Jain समाज द्वारा एक विशाल और ऐतिहासिक मौन जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में हजारों की संख्या में पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हुए।
जुलूस का उद्देश्य रीवा में हुई घटना के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी भावनाएं व्यक्त करना और प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करना था। पूरा नगर “शांत लेकिन आक्रोशित” माहौल में नजर आया।
CCTV फुटेज को लेकर हत्या की आशंका गहराई
जैन समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि सामने आए सीसीटीवी फुटेज में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि साध्वियां सड़क किनारे शांतिपूर्वक पैदल विहार कर रही थीं। इसके बावजूद वाहन चालक ने कथित रूप से लापरवाही या जानबूझकर सीधे उनकी ओर वाहन मोड़ दिया।
समाजजनों का कहना है कि यह घटना केवल दुर्घटना नहीं बल्कि एक सुनियोजित कृत्य प्रतीत होती है। इसी कारण पूरे समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है और लोग इसे “सोची-समझी हत्या” के रूप में देख रहे हैं।
नगर के प्रमुख मार्गों से निकला मौन जुलूस
कोतमा नगर में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होने लगे थे। हाथों में तख्तियां लिए और काली पट्टियां बांधकर समाजजन मौन रूप से जुलूस में शामिल हुए।
यह जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ एसडीएम कार्यालय तक पहुंचा। पूरे रास्ते लोग बिना नारेबाजी के शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराते रहे। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था।
एसडीएम को सौंपा गया ज्ञापन, रखी गई प्रमुख मांगें
मौन जुलूस के समापन पर जैन समाज ने मुख्यमंत्री के नाम अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं—
- रीवा घटना की निष्पक्ष SIT या न्यायिक जांच कराई जाए
- सभी CCTV और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए
- जैन साधु-साध्वियों के लिए “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू किया जाए
- विहार मार्गों पर विशेष पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
- संतों से जुड़े मामलों को संवेदनशील श्रेणी में रखकर त्वरित कार्रवाई हो
समाज ने कहा कि जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक उनका आक्रोश शांत नहीं होगा।
“संतों की सुरक्षा शासन का नैतिक दायित्व”
ज्ञापन सौंपने के दौरान समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि जैन साधु-संत पूर्णतः अहिंसक जीवन जीते हैं और पैदल विहार करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में संत समाज की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।
हजारों की भीड़, शांतिपूर्ण लेकिन आक्रोशित माहौल
जुलूस में हजारों लोगों की भागीदारी ने कोतमा नगर को एक बड़े जनआंदोलन का रूप दे दिया। हालांकि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन लोगों के चेहरे पर गहरा आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था।
महिलाओं और युवाओं की भी बड़ी संख्या इस विरोध में शामिल रही। कई समाजजनों ने इसे “इतिहास का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण विरोध” बताया।
प्रशासन रहा सतर्क, पुलिस बल तैनात
स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की थी। अधिकारियों ने जुलूस पर लगातार नजर बनाए रखी और यह सुनिश्चित किया कि कानून व्यवस्था बनी रहे।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हुआ, जिससे प्रशासन ने भी राहत की सांस ली।
निष्कर्ष
रीवा में जैन साध्वियों के साथ हुई दुर्घटना को लेकर कोतमा में निकला यह मौन जुलूस केवल विरोध नहीं बल्कि न्याय की एक शांत लेकिन मजबूत आवाज बनकर सामने आया है।
जैन समाज ने स्पष्ट संदेश दिया है कि संतों की सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर वह लगातार आवाज उठाता रहेगा, जब तक सरकार और प्रशासन ठोस कदम नहीं उठाते।
