गेंदा की फसल में किस्म के अंतर से किसानों की बढ़ी चिंता, 83,250 पौधों की जांच के बाद रिपोर्ट का इंतजार
धुलेट के किसानों का आरोप- ‘अप्सरा येलो’ के नाम पर मिली दूसरी किस्म, उत्पादन और फूलों की गुणवत्ता प्रभावित; नुकसान की भरपाई की मांग
धुलेट, राजगढ़। खेतों में लहलहाती गेंदा की फसल देखकर बेहतर आमदनी की उम्मीद लगाए बैठे किसानों की चिंता अब बढ़ गई है। फूल निकलने के बाद किसानों ने पौधों की किस्म को लेकर सवाल उठाए हैं। धुलेट क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि उन्होंने ‘अप्सरा येलो’ किस्म के नाम पर गेंदा के पौधे खरीदे थे, लेकिन खेतों में पौधे और फूल अपेक्षित किस्म से अलग दिखाई दे रहे हैं।
मामला अब विभागीय जांच तक पहुंच चुका है। करीब 83,250 पौधों को लेकर किसानों की शिकायत पर उद्यानिकी और कृषि विशेषज्ञों की टीम ने खेतों का निरीक्षण किया है। मौके पर पंचनामा तैयार किया गया है और अब किसान जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
शिमलावदा की नर्सरी से खरीदे थे पौधे
किसानों के अनुसार उन्होंने रतलाम जिले के शिमलावदा गांव स्थित पाटीदार हाईटेक नर्सरी से गेंदा के पौधे खरीदे थे। किसानों को बताया गया था कि ये पौधे ‘अप्सरा येलो’ किस्म के हैं।
किसानों का कहना है कि इस किस्म में सामान्य तौर पर करीब 45 दिन में फूलों की तुड़ाई शुरू होने की उम्मीद थी। लेकिन उनके खेतों में करीब 70 दिन बाद फूल निकलना शुरू हुए। इसके साथ ही फूलों की गुणवत्ता भी किसानों की अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही।
किसानों का दावा है कि फूलों के देर से आने और गुणवत्ता प्रभावित होने के कारण मंडी में भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फूल जल्दी खराब हो रहे हैं और अपेक्षित मांग नहीं मिलने से बिक्री और भाव दोनों प्रभावित हुए हैं।
लागत बढ़ी, लेकिन उत्पादन नहीं मिला
किसानों के मुताबिक नुकसान केवल पौधों की कीमत तक सीमित नहीं है। फसल तैयार करने के लिए खेत की तैयारी, पौधों की रोपाई, खाद, दवाइयां, सिंचाई और मजदूरी सहित कई स्तर पर खर्च किया गया।
जब फसल तैयार हुई तो पौधों और फूलों में अपेक्षित किस्म का अंतर सामने आया। किसानों का कहना है कि इससे उत्पादन प्रभावित हुआ और उनकी लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
किसान कमलेश काग के अनुसार, किसानों ने निर्धारित किस्म के पौधों पर भरोसा करके खेती की थी। उन्होंने बताया कि आसपास के कुछ खेतों में अच्छी गुणवत्ता वाले गेंदा फूलों का उत्पादन बेहतर दिखाई दे रहा है, जबकि शिकायत करने वाले किसानों के खेतों में उत्पादन अपेक्षाकृत कम है।
प्रशासन तक पहुंची शिकायत
किसानों ने मामले की शिकायत प्रशासन और संबंधित विभागों तक पहुंचाई। इसके बाद धार में आयोजित जनसुनवाई के दौरान भी किसानों ने आवेदन देकर समस्या से अधिकारियों को अवगत कराया।
शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। किसानों की शिकायत की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को संबंधित अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों की टीम ने खेतों का निरीक्षण किया।

विभागीय टीम ने खेतों का किया निरीक्षण
शुक्रवार को धार उद्यानिकी विभाग की उपसंचालक नीरज सांवलिया, कृषि विज्ञान केंद्र धार के वैज्ञानिक डॉ. डी.एस. मंडलोई और उद्यानिकी सरदारपुर एसडीओ सकाराम मुजाल्दा किसानों के खेतों में पहुंचे।
टीम ने खेतों में लगी गेंदा की फसल की स्थिति देखी। पौधों और फूलों का बारीकी से निरीक्षण किया गया। इसके साथ ही मौके पर पंचनामा भी तैयार किया गया।
जांच के दौरान किसानों के खेतों में लगे पौधों की तुलना ‘अप्सरा येलो’ के वास्तविक पौधों से किए जाने की बात सामने आई है।
प्रथम दृष्टया किस्म में अंतर के संकेत
जांच दल की ओर से प्रथम दृष्टया किसानों को उपलब्ध कराए गए पौधों में किस्म का अंतर पाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि मामले की अंतिम स्थिति विभागीय जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
किसानों का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि उन्हें मांगी गई किस्म के बजाय दूसरी किस्म के पौधे उपलब्ध कराए गए थे, तो उनके आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
किसानों ने पूछा- नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल अब उनकी फसल से हुए नुकसान की भरपाई का है। किसानों का कहना है कि उन्होंने पौधे खरीदने के साथ-साथ खेती की पूरी प्रक्रिया पर बड़ी रकम खर्च की। यदि पौधों की किस्म गलत थी और इसी वजह से उत्पादन व गुणवत्ता प्रभावित हुई है, तो किसानों को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन होना चाहिए।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच जल्द पूरी की जाए और रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही किसानों ने नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी की है।
नर्सरी के रिकॉर्ड की जांच की मांग
किसानों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि संबंधित नर्सरी से पौधों की खरीद, किसानों को उपलब्ध कराई गई किस्म और उससे जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाए।
किसानों का कहना है कि पौधों की खरीद से लेकर खेतों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस स्तर पर गड़बड़ी हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
83,250 पौधों पर टिकी नजर
इस पूरे मामले में करीब 83,250 गेंदा पौधे जांच के दायरे में हैं। किसानों को अब विभाग की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पौधों की किस्म में वास्तव में अंतर था या नहीं और यदि अंतर पाया जाता है तो किसानों के नुकसान की जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
जांच रिपोर्ट किसानों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के आधार पर आगे की कार्रवाई और संभावित राहत का रास्ता साफ होगा।
इस दौरान अमर सिंह काग, अंतिम राठौर, गोविंद गहलोत, कमलेश काग, गोकुल चौधरी, गोपाल हामड, विष्णु चोयल, नारायण बर्फा, कानालाल जमादारी, भोला काग, ईंदरमल हामड सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
जल्द दी जाएगी जांच रिपोर्ट
कृषि विज्ञान केंद्र धार के वैज्ञानिक डॉ. डी.एस. मंडलोई ने बताया कि किसानों के खेतों का निरीक्षण किया गया है और पंचनामा बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर जल्द रिपोर्ट उद्यानिकी विभाग को दी जाएगी।
फिलहाल धुलेट क्षेत्र के किसान जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि गेंदा की फसल में किस्म के अंतर की शिकायत कितनी सही है और किसानों को हुए नुकसान के लिए आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
रिपोर्ट: नरेन्द्र सिरवी | धुलेट, राजगढ़
