इंदौर वस्तुत्व महाकाव्य’ पर पीएचडी करने वाली डॉ. ममता अशोक खासगीवाला को सामाजिक संसद करेगी सम्मानित। आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज संसघ के पावन सान्निध्य में घूंघट गार्डन में होगा समारोह।
इंदौर :गर्भ संस्कार की प्रणेता डॉ. ममता खासगीवाला का सामाजिक संसद करेगी विशेष सम्मान
‘वस्तुत्व महाकाव्य’ पर की है पीएचडी, आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के सान्निध्य में 5 सितंबर को होगा अलंकरण
राजेश जैन दद्दू
इंदौर।
डॉ. ममता खासगीवाला सम्मान समारोह का आयोजन 5 सितंबर को इंदौर में किया जाएगा। जैन समाज की सुप्रसिद्ध समाज सेविका, गर्भ संस्कार की प्रखर प्रणेता एवं साहित्य साधिका डॉ. ममता अशोक खासगीवाला (Ph.D.) को उनकी बहुआयामी सेवाओं और साहित्यिक योगदान के लिए सामाजिक संसद द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।
यह पावन सम्मान समारोह प्रकृताचार्य परम पूज्य 108 श्री सुनीलसागर जी महाराज संसघ के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा। आयोजन को लेकर जैन समाज में उत्साह का वातावरण है।
Table of Contents
- डॉ. ममता खासगीवाला सम्मान समारोह कब और कहां होगा
- गर्भ संस्कार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान
- ‘वस्तुत्व महाकाव्य’ पर किया गहन शोध
- समाज सेवा और साहित्य साधना का होगा सम्मान
- धर्मप्रेमी बंधुओं से आयोजन में शामिल होने का आग्रह
5 सितंबर को घूंघट गार्डन में होगा डॉ. ममता खासगीवाला सम्मान
सामाजिक संसद द्वारा आयोजित कार्यक्रम 5 सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर दोपहर 1:30 बजे से आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का स्थान घूंघट गार्डन, जैन कॉलोनी, इंदौर निर्धारित किया गया है।
इस अवसर पर संत सान्निध्य में डॉ. ममता खासगीवाला को विशेष अलंकरण प्रदान कर उनके सामाजिक, साहित्यिक एवं संस्कार संबंधी कार्यों का अभिनंदन किया जाएगा।
गर्भ संस्कार की प्रखर प्रणेता के रूप में बनाई पहचान
डॉ. ममता खासगीवाला न केवल एक समर्पित समाज सेविका हैं, बल्कि मातृत्व को संस्कारित करने वाली गर्भ संस्कार की अद्भुत कार्यशाला के माध्यम से सैकड़ों परिवारों को लाभान्वित कर रही हैं।
गर्भ संस्कार के माध्यम से भावी पीढ़ी में संस्कार, पारिवारिक मूल्यों और सकारात्मक जीवन दृष्टि के विकास के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों ने उन्हें समाज में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।
उनकी यही सक्रियता डॉ. ममता खासगीवाला सम्मान को विशेष बनाती है, क्योंकि सामाजिक संसद द्वारा उनकी समाज सेवा के साथ गर्भ संस्कार और साहित्य साधना के क्षेत्र में किए गए कार्यों को भी सम्मानित किया जा रहा है।
आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के ‘वस्तुत्व महाकाव्य’ पर की पीएचडी
साहित्य के क्षेत्र में डॉ. ममता खासगीवाला का सबसे बड़ा अवदान श्रमण संस्कृति के महामहिम, दिगंबर जैन पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज द्वारा रचित ‘वस्तुत्व महाकाव्य’ पर किया गया उनका गहन शोध है।
डॉ. ममता खासगीवाला ने ‘वस्तुत्व महाकाव्य’ ग्रंथ पर शोध करते हुए पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। यह शोध जैन साहित्य जगत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।
जैन दर्शन और साहित्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण ग्रंथ को शोध का विषय बनाकर उन्होंने साहित्यिक और अकादमिक क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।
समाज सेवा, गर्भ संस्कार और साहित्य साधना का विशेष अलंकरण
डॉ. ममता खासगीवाला की बहुआयामी प्रतिभा—समाज सेवा, गर्भ संस्कार एवं साहित्य साधना—को देखते हुए सामाजिक संसद द्वारा उनके विशेष सम्मान का निर्णय लिया गया है।
विशेष बात यह है कि यह सम्मान प्रकृताचार्य परम पूज्य 108 श्री सुनीलसागर जी महाराज संसघ के पावन सान्निध्य में प्रदान किया जाएगा। संत सान्निध्य में होने वाले इस आयोजन को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह है।
आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से कार्यक्रम में पधारकर संत सान्निध्य का पुण्यार्जन करने और डॉ. ममता खासगीवाला का उत्साहवर्धन करने का विनम्र आग्रह किया है।
