ममता बनर्जी का राजनीति से संन्यास पर बड़ा बयान, बोलीं- भाजपा को हाशिए पर पहुंचाने तक जारी रहेगी लड़ाई
नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) अध्यक्ष ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक भविष्य और संन्यास को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि फिलहाल उनका राजनीति छोड़ने का कोई इरादा नहीं है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ उनकी राजनीतिक लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। ममता बनर्जी ने कहा कि वे तब तक राजनीति से संन्यास नहीं लेंगी, जब तक भाजपा को राजनीतिक रूप से हाशिए पर नहीं पहुंचा देतीं।
फेसबुक लाइव के जरिए समर्थकों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से लेकर पुलिस की कार्रवाई, जनगणना, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और जाधवपुर यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद पर अपनी बात रखी।
हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं और भाजपा की ओर से इन आरोपों पर अलग पक्ष हो सकता है।
संन्यास की अटकलों पर ममता बनर्जी का जवाब
ममता बनर्जी ने राजनीति से संन्यास लेने से जुड़ी चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि जो लोग यह मान रहे हैं कि विभिन्न राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए अनुमति नहीं मिलने या अन्य परेशानियों के कारण वे राजनीति छोड़ देंगी, वे गलतफहमी में हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा के खिलाफ उनका राजनीतिक संघर्ष जारी रहेगा। ममता ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक उद्देश्यों और पार्टी कार्यकर्ताओं के हितों को लेकर है।
उनके इस बयान को पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री के बयान से यह संकेत भी मिलता है कि आने वाले समय में वह भाजपा के खिलाफ और अधिक सक्रिय राजनीतिक भूमिका में दिखाई दे सकती हैं।
TMC कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज करने का लगाया आरोप
ममता बनर्जी ने राज्य की पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
ममता ने दावा किया कि करीब 12 हजार से 14 हजार लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कुछ लोगों पर भाजपा में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी राजनीतिक पदाधिकारियों की तरह काम कर रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
जाधवपुर यूनिवर्सिटी विवाद पर भी भाजपा को घेरा
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन के दौरान जाधवपुर यूनिवर्सिटी से जुड़े हालिया विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में हुए हंगामे के पीछे भाजपा की भूमिका रही और यूनिवर्सिटी के प्रतीक चिह्न को नुकसान पहुंचाया गया।
उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ राजनीतिक या वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वह विद्यार्थियों का सम्मान करती हैं। ममता बनर्जी ने विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में शांति बनाए रखने पर भी जोर दिया।
जाधवपुर यूनिवर्सिटी लंबे समय से पश्चिम बंगाल की छात्र राजनीति और विभिन्न वैचारिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय से जुड़ा कोई भी राजनीतिक विवाद राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बन जाता है।
जनगणना को लेकर उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने जनगणना प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके जरिए केंद्र सरकार गुप्त रूप से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) जैसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकती है।
ममता बनर्जी ने लोगों से जनगणना से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने या निजी जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने सवाल उठाया कि नागरिकों से एकत्र की गई जानकारी का भविष्य में किस प्रकार इस्तेमाल किया जाएगा, इसे लेकर स्पष्टता होनी चाहिए।
ममता ने दावा किया कि महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर राजनीतिक दलों के साथ पर्याप्त सलाह-मशविरा नहीं किया गया। उन्होंने नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और उसके इस्तेमाल को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
SIR और मतदाता सूची पर भी सवाल
ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गलत तरीके से हटाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं तो उनकी पार्टी उन्हें दोबारा सूची में शामिल कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेगी। जरूरत पड़ने पर इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात भी उन्होंने कही।
ममता बनर्जी ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जोर देते हुए भाजपा पर चुनावी अनियमितताओं के आरोप भी लगाए। हालांकि, इन आरोपों पर चुनाव से जुड़े संबंधित संस्थानों और भाजपा का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
भाजपा पर तंज, बताया ‘मनी मून’ पीरियड
अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने भाजपा पर राजनीतिक तंज भी कसा। उन्होंने भाजपा के मौजूदा दौर को ‘हनीमून पीरियड’ के बजाय ‘मनी मून पीरियड’ बताया। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने भाजपा की राजनीति और आर्थिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की।
ममता ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के लोग भाजपा की राजनीति को समझ चुके हैं और आने वाले समय में जनता इसका जवाब देगी।
शुभेंदु अधिकारी पर भी साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने उन पर ‘बुलडोजर की राजनीति’ करने का आरोप लगाया। ममता बनर्जी ने दावा किया कि राज्य में राजनीतिक विरोधियों और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास नहीं होना चाहिए।
बंगाल की राजनीति में तेज हो सकती है सियासी लड़ाई
ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव लगातार सुर्खियों में है। सत्ता परिवर्तन के बाद भी ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख राजनीतिक चेहरे के रूप में सक्रिय हैं।
राजनीति से संन्यास नहीं लेने और भाजपा के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की घोषणा से साफ है कि आने वाले समय में बंगाल की राजनीति में TMC और BJP के बीच मुकाबला और तेज हो सकता है। ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों को भी संदेश दिया है कि वह सक्रिय राजनीति में बनी रहेंगी और पार्टी से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठाती रहेंगी।
