मकर संक्रांति का त्योहार करीब है और बाजारों में पतंगों की दुकानें सज चुकी हैं, लेकिन पिछले कुछ समय में चाइनीज मांझे से हुए हादसों ने त्योहार की खुशियों को खतरे में डाल दिया है। इंदौर हाई कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के 14 जिलों में चाइनीज मांझे की बिक्री पूरी तरह से बैन कर दी है। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे बाजारों में कड़ी निगरानी रखें और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त न करें।
क्या है पूरा मामला?
हाल के दिनों में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में चाइनीज मांझे से कई गंभीर हादसे हुए हैं। कनाडिया थाना क्षेत्र में एक नाबालिग बच्चे की गर्दन कटने से मौत हो गई, जबकि खजराना थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति का अंगूठा कट गया। ऐसी घटनाओं ने हाई कोर्ट को सजग किया और अदालत ने स्वत: संज्ञान लेकर सुरक्षा उपायों के आदेश दिए। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और बीके द्विवेदी की पीठ ने कहा कि चाइनीज मांझा खुलेआम बिक रहा है और प्रशासन सिर्फ कागजों में कार्रवाई दिखा रहा है।
14 जिलों में बैन और प्रशासन की जिम्मेदारी
इंदौर, देवास, उज्जैन, रतलाम, नीमच, मंदसौर, आगरा मालवा, शाजापुर, राजगढ़, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन और बड़वानी जिलों में चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि प्रशासन नियमित निरीक्षण करे और बड़े बाजारों जैसे राजवाड़ा, सियागंज, मालवायुक्ति, राऊ और खजराना में विशेष टीमें सक्रिय रहें। दुकानदारों से स्टॉक की जानकारी ली जाएगी और पुराने स्टॉक छुपाने या पैकेजिंग बदलकर बेचने वालों पर कार्रवाई होगी।
चाइनीज मांझा क्यों इतना खतरनाक है?

चाइनीज मांझा न केवल पतंग की डोर है, बल्कि यह अत्यंत तीखी और घातक धातु-लेपित नायलॉन से बना होता है। भारतीय मांझा सूती धागे का होता है, जबकि चाइनीज मांझा सिंथेटिक फाइबर, ग्लास पाउडर और धातु के महीन टुकड़ों से तैयार किया जाता है। यह गर्दन, हाथ और चेहरे को आसानी से काट सकता है। दोपहिया वाहन सवार इससे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। 2021-2024 के बीच देशभर में चाइनीज मांझे से 200 से अधिक मौतें और 500 से ज्यादा गंभीर चोटें हुई हैं।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध सिर्फ कागजों में नहीं बल्कि जमीन पर लागू होना चाहिए, ताकि मकर संक्रांति के त्योहार में कोई और हादसा न हो।
