Indore: भगवान महावीर अलंकरण से समाजजन सम्मानित, इंदौर में जैन एकता का ऐतिहासिक संगम
Indore में भव्य आयोजन, पहली बार एक मंच पर आए दिगंबर और श्वेतांबर समाज
Indore में रविवार को जैन समाज की एकता, सामाजिक समरसता और भगवान महावीर के सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार को समर्पित एक भव्य और ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ। दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन एवं श्वेतांबर जैन सोशल ग्रुप्स फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने पहली बार दोनों प्रमुख जैन परंपराओं को एक मंच पर लाकर नई मिसाल पेश की।
“महावीर अलंकरण समारोह” के माध्यम से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले समाजसेवियों का सम्मान किया गया। यह आयोजन स्कीम नंबर 78 स्थित संगीत कला अकादमी के मनमोहन मेहता ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ, जहाँ बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया सम्मान
Indore कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रहे। उन्होंने अपने हाथों से चयनित समाजसेवियों को शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
सम्मान प्राप्त करने वालों में हंसराज जैन, संतोष कुमार जैन (इंडोरामा), हंसमुख गांधी और चंदनमल चोरड़िया प्रमुख रहे। इन सभी ने समाज सेवा, धर्म प्रचार और सामाजिक उत्थान में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

कार्यक्रम में उपस्थित रहे गणमान्य अतिथि
इस अवसर पर सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा, समाजसेवी अमित कासलीवाल, विजय मेहता, स्वप्निल कोठारी, राकेश विनायका और ‘अग्निबाण’ के प्रधान संपादक राजेश चेलावत सहित कई प्रमुख व्यक्ति मंचासीन रहे।
इसके साथ ही फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक रमेश मेंदोला और गोलू शुक्ला सहित अनेक जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
भगवान महावीर के सिद्धांतों पर मुख्यमंत्री का संबोधन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में भगवान महावीर के सिद्धांतों की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “जियो और जीने दो” का संदेश आज के समय में अत्यंत आवश्यक है, जो केवल मानव समाज ही नहीं बल्कि समस्त जीव जगत के लिए करुणा और सह-अस्तित्व की भावना को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि पेड़-पौधों में भी जीवन होता है और हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए। उन्होंने भगवान महावीर के चार मूल सिद्धांत—अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह—को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने भगवान महावीर जन्म कल्याणक की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका स्मरण केवल विशेष अवसरों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। प्रसिद्ध गायक एवं संगीतकार लवेश बुरण ने णमोकार मंत्र की संगीतमय प्रस्तुति दी, जिससे पूरा सभागार भक्तिमय हो उठा। इसके अलावा भजन प्रस्तुतियों ने भी उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
वैश्विक शांति पर विशेष संवाद
इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा “वैश्विक शांति पर संवाद” भी रहा। इस दौरान वक्ताओं ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भगवान महावीर के दर्शन की प्रासंगिकता पर चर्चा की।
वक्ताओं ने कहा कि आज जब विश्व विभिन्न संघर्षों और चुनौतियों से जूझ रहा है, तब भगवान महावीर के अहिंसा और सहिष्णुता के सिद्धांत मानवता को नई दिशा दे सकते हैं।
आयोजन समिति ने जताया आभार
कार्यक्रम का संचालन प्रदीप चौधरी ने किया। आयोजन समिति के अध्यक्ष स्वप्निल कोठारी ने इस ऐतिहासिक आयोजन के सफल आयोजन पर सभी जैन बंधुओं और भगिनियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने और नई पीढ़ी को अपने मूल्यों से जोड़ने का प्रयास है।
निष्कर्ष
समग्र रूप से यह आयोजन जैन समाज की एकता, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक मूल्यों का प्रतीक बनकर सामने आया। इसने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर कार्य करता है, तो वह न केवल अपनी पहचान को मजबूत करता है, बल्कि पूरे समाज को सकारात्मक दिशा भी प्रदान करता है।
भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपनाकर एक शांतिपूर्ण, सहिष्णु और नैतिक समाज की स्थापना की दिशा में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
