Ujjain: राम भक्त स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में राम नाम के बेलपत्रों से हुआ दिव्य श्रृंगार
Ujjain विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। ज्येष्ठ अधिकमास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसमें उन्हें राम भक्त स्वरूप में अलंकृत किया गया। राम नाम अंकित बेलपत्रों से किए गए इस अनूठे श्रृंगार ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया और बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर भक्त भावविभोर हो उठे।
मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु देर रात से ही दर्शन के लिए कतारों में खड़े थे। जैसे ही प्रातः चार बजे मंदिर के पट खुले, पूरे परिसर में “जय श्री महाकाल” और “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंज उठे। अलौकिक वातावरण, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति रस से सराबोर माहौल ने हर श्रद्धालु को आध्यात्मिक अनुभूति कराई।
परंपरा अनुसार संपन्न हुई भस्म आरती
Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, प्रतिदिन की भांति मंगलवार को भी भस्म आरती का शुभारंभ पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया। सबसे पहले वीरभद्र भगवान से अनुमति लेने की परंपरा निभाई गई, जिसके बाद मंदिर के पट खोले गए। इसके पश्चात गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया।
मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ पूजा-अर्चना संपन्न की। श्रद्धालुओं को इस दौरान मंदिर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक गरिमा का विशेष अनुभव हुआ।
पंचामृत और फलों के रस से हुआ अभिषेक
Ujjain भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का भव्य अभिषेक किया गया। जलाभिषेक के साथ दूध, दही, घी, शक्कर से बने पंचामृत और विभिन्न फलों के रसों से भगवान का स्नान कराया गया। इस दौरान प्रथम घंटाल बजाकर ‘हरि ओम’ का जल अर्पित किया गया।
पूजन के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया और कपूर आरती अर्पित की गई। गर्भगृह में गूंजते मंत्रोच्चार और आरती की दिव्य छटा ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
राम भक्त स्वरूप में विराजे बाबा महाकाल
मंगलवार की भस्म आरती का मुख्य आकर्षण भगवान महाकाल का विशेष राम भक्त स्वरूप रहा। श्रृंगार के दौरान बाबा महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया और राम नाम अंकित बेलपत्र अर्पित किए गए। विशेष पूजन सामग्री और पारंपरिक अलंकरण से उन्हें अद्भुत स्वरूप प्रदान किया गया।
भगवान महाकाल के इस अनूठे रूप को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। बड़ी संख्या में मौजूद भक्तों ने इस दिव्य दृश्य को अपने जीवन के अविस्मरणीय क्षणों में से एक बताया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि राम नाम से सुशोभित बाबा महाकाल का यह स्वरूप श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संदेश देता है।
महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से अर्पित की गई पवित्र भस्म
Ujjain कपूर आरती के उपरांत महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की मंगल ध्वनियों के बीच भस्म आरती संपन्न हुई।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल की भस्म आरती को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन उज्जैन पहुंचते हैं।
देश-दुनिया में प्रसिद्ध है महाकाल की भस्म आरती
Ujjain महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती हिंदू धर्म की सबसे अनूठी और प्राचीन धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। यह आरती प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में संपन्न होती है और इसका सीधा प्रसारण भी विभिन्न माध्यमों से किया जाता है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि भस्म आरती के दर्शन करने से विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यही वजह है कि हर दिन हजारों भक्त इस दिव्य अनुष्ठान में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।
महाकाल मंदिर में आरतियों का संशोधित समय
महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक मंदिर की आरतियों का संशोधित समय प्रभावी रहेगा।
- भस्म आरती : प्रातः 4:00 बजे से 6:00 बजे तक
- दद्योदक आरती : सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
- भोग आरती : सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक
- संध्या पूजन : शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक
- संध्या आरती : शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
- शयन आरती : रात्रि 10:30 बजे से 11:00 बजे तक
शिवमय हुआ महाकाल मंदिर परिसर
विशेष श्रृंगार और भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया। “जय श्री महाकाल” और “हर-हर महादेव” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा। राम भक्त स्वरूप में बाबा महाकाल के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने स्वयं को धन्य महसूस किया।
Ujjain की पावन धरती पर एक बार फिर ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि बाबा महाकाल के प्रति भक्तों की आस्था और श्रद्धा आज भी उतनी ही अटूट और प्रगाढ़ है जितनी सदियों पहले थी।
