MP विधानसभा में भर्ती नियमों में बड़ा बदलाव! 30 साल से उठते रहे सवालों के बीच अब PSC के जरिए हो सकती है अफसरों की नियुक्ति
MP Vidhan Sabha Recruitment Rules 2026: मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। विधानसभा में पिछले करीब तीन दशकों से भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रियाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब इन्हीं विवादों को देखते हुए नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में कदम उठाए जाने के संकेत मिले हैं।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने संकेत दिया है कि विधानसभा सचिवालय में सचिव और उप सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति के लिए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की व्यवस्था अपनाई जा सकती है। माना जा रहा है कि इस बदलाव का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और योग्यता को प्राथमिकता देना है।
हालांकि, नियुक्ति नियमों में अंतिम बदलाव के लिए संबंधित प्रक्रिया पूरी की जानी बाकी है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद विधानसभा सचिवालय में उच्च पदों पर नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से चली आ रही चर्चाओं को विराम मिलने की उम्मीद है।
करीब 30 साल से विवादों में रही भर्ती प्रक्रिया
MP विधानसभा सचिवालय में नियुक्तियों को लेकर विवाद कोई नया विषय नहीं है। पिछले करीब 30 वर्षों के दौरान अलग-अलग विधानसभा अध्यक्षों के कार्यकाल में भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और अस्थायी नियुक्तियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
इन मामलों में कभी योग्यता और चयन प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां सामने आईं तो कभी पदोन्नति के नियमों को लेकर विवाद हुआ। कई मामलों में शिकायतें जांच एजेंसियों और अदालतों तक भी पहुंचीं। इसी पृष्ठभूमि में अब विधानसभा सचिवालय की नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव की चर्चा तेज हुई है।
श्रीनिवास तिवारी के कार्यकाल में उठे सवाल
वर्ष 1993 से 2003 के बीच श्रीनिवास तिवारी विधानसभा अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल के दौरान विधानसभा सचिवालय में भर्ती और पदोन्नति से जुड़े कई मामलों को लेकर विवाद सामने आए।
आरोप लगाए गए कि कुछ नियुक्तियों में निर्धारित योग्यता और टाइपिंग परीक्षा जैसी आवश्यक शर्तों का पालन नहीं किया गया। सत्यनारायण शर्मा की नियुक्ति का मामला भी इसी संदर्भ में चर्चा में रहा। बताया गया कि बाबू के पद पर नियुक्ति के कुछ ही महीनों बाद उन्हें अंडर सेक्रेटरी के पद पर पदोन्नत कर दिया गया।
इसी तरह सब-इंजीनियर रमेश तिवारी और वेयरहाउसिंग विभाग से आए देवेंद्र तिवारी को सीधे सहायक यंत्री बनाए जाने को लेकर भी सवाल उठे थे।
उस दौर में अस्थायी नियुक्तियों और प्रतिनियुक्ति के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को विधानसभा सचिवालय में समायोजित किए जाने के आरोप भी सामने आए। इनमें 25 से अधिक लोगों से जुड़े मामले की जांच हुई। मामला आगे बढ़ने पर एफआईआर और बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई तक की स्थिति बनी।
ईश्वरदास रोहाणी के समय भी विवाद
इसके बाद ईश्वरदास रोहाणी के कार्यकाल के दौरान भी विधानसभा सचिवालय में कुछ नियुक्तियां विवादों में रहीं। खासतौर पर स्टेनोग्राफर और सुरक्षा गार्डों की भर्ती को लेकर प्रक्रिया और पात्रता से संबंधित सवाल उठाए गए।
शिकायतों में आरोप लगाया गया कि कुछ मामलों में निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और उम्मीदवारों की पात्रता को लेकर उठे सवालों के कारण यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा।
सीतासरन शर्मा के कार्यकाल में सीधी भर्ती पर सवाल
डॉ. सीतासरन शर्मा के कार्यकाल में विधानसभा सचिवालय में सीधी भर्ती को लेकर भी विवाद सामने आया। नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर कानूनी आपत्तियां दर्ज की गईं और कुछ मामले अदालत तक पहुंचे।
भर्ती प्रक्रिया से संबंधित कानूनी अड़चनों के कारण नियुक्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रही। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर विधानसभा सचिवालय की भर्ती व्यवस्था और उसके नियमों को लेकर बहस को जन्म दिया।
गिरीश गौतम के समय करीबियों की नियुक्ति के आरोप
गिरीश गौतम के कार्यकाल में भी विधानसभा सचिवालय की नियुक्तियों और पदोन्नतियों को लेकर आरोप लगाए गए। इस दौरान रिश्तेदारों और करीबी लोगों को नियुक्ति देने के आरोप सामने आए।
पुष्पेंद्र गौतम समेत कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति और पदोन्नति का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। इसके अलावा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति और बाद में उनके नियमितीकरण को लेकर भी सवाल उठाए गए।
बताया गया कि कुछ कर्मचारियों को शुरुआत में छह-छह महीने की अवधि के लिए अस्थायी तौर पर रखा गया। बाद में इनमें से कई कर्मचारियों को स्थायी कर दिया गया। आगे चलकर कुछ कर्मचारी पदोन्नति पाते हुए एडिशनल सेक्रेटरी जैसे वरिष्ठ पदों तक पहुंचे। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठते रहे।
अब MPPSC के जरिए नियुक्ति की तैयारी
लगातार सामने आते रहे विवादों के बीच अब विधानसभा सचिवालय में नियुक्तियों की प्रक्रिया को बदलने की दिशा में विचार किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के संकेतों के मुताबिक सचिव और उप सचिव जैसे पदों पर भर्ती के लिए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायता ली जा सकती है।
यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो चयन प्रक्रिया बाहरी और निर्धारित प्रतियोगी प्रणाली के माध्यम से होगी। इससे उम्मीदवारों के चयन में योग्यता और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
विधानसभा सचिवालय संवैधानिक संस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यहां होने वाली नियुक्तियों में निष्पक्षता और प्रशासनिक दक्षता बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है। प्रस्तावित बदलाव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
हालांकि, नई व्यवस्था लागू होने से पहले नियमों में आवश्यक संशोधन और संबंधित औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष के संकेतों के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। यदि MPPSC के माध्यम से नियुक्ति की व्यवस्था लागू होती है, तो यह विधानसभा सचिवालय की करीब तीन दशक पुरानी भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
