मध्य प्रदेश में पाल-गड़रिया समाज बोर्ड का होगा गठन, CM मोहन यादव ने कहा- समाज को मिलेगा उचित प्रतिनिधित्व
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार पाल और गड़रिया समाज के लिए एक संयुक्त बोर्ड का गठन करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के 231वें स्मृति समारोह में यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही पाल-गड़रिया समाज के लिए बोर्ड का गठन करेगी, जिससे समाज के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी मंच मिल सके।
समारोह में बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पाल-गड़रिया समाज की सामाजिक और ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समाज गोपाल कृष्ण के वंशजों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समाज के सुख-दुख और कल्याण के लिए हमेशा तत्पर है।
पाल-गड़रिया समाज के लिए बनेगा संयुक्त बोर्ड
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में पाल और गड़रिया समाज के लिए एक संयुक्त बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड के माध्यम से समाज से जुड़े मुद्दों, कल्याणकारी योजनाओं और विकास से संबंधित विषयों पर सरकार तक सुझाव और मांगें पहुंचाने के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार होगी।
सरकार का कहना है कि बोर्ड के गठन का उद्देश्य समाज के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व देना और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं को आगे बढ़ाना है। हालांकि बोर्ड के स्वरूप, सदस्यों की नियुक्ति और कार्यक्षेत्र को लेकर विस्तृत जानकारी सरकार की ओर से बाद में सामने आ सकती है।
मुख्यमंत्री बोले- समाज के कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का मूल मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ है और इसी भावना के साथ प्रदेश में विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने पाल-गड़रिया समाज के लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार समाज की समस्याओं और जरूरतों को गंभीरता से ले रही है। बोर्ड के गठन से समाज को अपनी बात सरकार तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
पशुपालन और दूध उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश की आर्थिक समृद्धि के लिए दूध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है।
सरकार की ओर से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़े क्षेत्रों में प्रोत्साहन देने पर जोर दिया जा रहा है। पाल और गड़रिया समाज का पारंपरिक रूप से पशुपालन से जुड़ाव रहा है, इसलिए इन क्षेत्रों में विकास की संभावनाओं को समाज के आर्थिक सशक्तिकरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
अहिल्याबाई होल्कर के योगदान को किया याद
रवींद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन और उनके शासनकाल के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर मालवा की ऐसी महान शासिका थीं, जिनके शासन और कार्यों से मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरा देश गौरवान्वित होता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, अहिल्याबाई होल्कर ने अपने शासनकाल में सुशासन, न्याय, सेवा और जनकल्याण के नए प्रतिमान स्थापित किए। उन्होंने अपने शासन में जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दी और प्रशासन को जनहित से जोड़ने का उदाहरण प्रस्तुत किया।
सुशासन और जनसेवा की मिसाल थीं अहिल्याबाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को सुशासन की प्रतिमूर्ति के रूप में याद किया जाता है। उनका जीवन सेवा, साधना, न्याय और त्याग का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर के जीवन से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार सेवा, सुशासन, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकमाता के विचार आज भी समाज और शासन के लिए प्रासंगिक हैं। उनके आदर्शों को वर्तमान समय में लागू करके प्रदेश के विकास को नई दिशा दी जा सकती है।
महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर जोर
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण को भी विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर का जीवन महिलाओं के नेतृत्व और क्षमता का उदाहरण है।
उनके शासनकाल में किए गए जनहित के कार्यों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में भी महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें विकास के समान अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्जागरण की दिशा में भी कार्य कर रही है।
स्मृति समारोह में बड़ी संख्या में समाजजन हुए शामिल
भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित स्मृति समारोह में पाल-गड़रिया समाज सहित बड़ी संख्या में नागरिक और समाजजन मौजूद रहे। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद समाज के लोगों में उत्साह देखने को मिला।
समाज के प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि प्रस्तावित बोर्ड प्रभावी तरीके से काम करता है तो इससे समाज की विभिन्न समस्याओं को सरकार के सामने रखने और उनके समाधान की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
बोर्ड के गठन से प्रतिनिधित्व की उम्मीद
पाल-गड़रिया समाज के लिए संयुक्त बोर्ड के गठन की मुख्यमंत्री की घोषणा को समाज के प्रतिनिधित्व और कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बोर्ड के माध्यम से शिक्षा, रोजगार, पशुपालन, सामाजिक कल्याण और अन्य आवश्यकताओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार के साथ समन्वय की उम्मीद की जा रही है।
फिलहाल सरकार की ओर से बोर्ड के गठन की घोषणा की गई है। अब समाज की नजर इसके गठन की औपचारिक प्रक्रिया, बोर्ड के स्वरूप और कार्यक्षेत्र पर रहेगी।
मुख्यमंत्री ने समारोह में यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर प्रदेश के विकास को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। पाल-गड़रिया समाज के लिए बोर्ड का गठन इसी व्यापक नीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
