माँ ब्रह्मचारिणी: तपस्या, धैर्य और सदाचार का संदेश देती पूनम रमेश गांधी की भक्ति रचना
“तेरी पूजा तभी सफल हो, जब जीवन में सदाचार हो”, नवरात्रि पर श्री मार्तंड फाउंडेशन की प्रस्तुति
राजस्थान, 12 अक्टूबर। श्री मार्तंड फाउंडेशन की ओर से नवरात्रि के अवसर पर माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित पूनम रमेश गांधी (राजस्थान) की भक्ति रचना प्रस्तुत की गई है। रचना में माँ की तपस्या, संकल्प और धैर्य से मिलने वाली सीख को शब्द दिए गए हैं।
कठिन राह चुनने वाली तपस्विनी माँ
रचना में कहा गया है कि माँ ब्रह्मचारिणी ने फूलों की नहीं, काँटों की राह चुनी। उनके संकल्प के आगे हर कठिनाई छोटी पड़ गई। उनकी साधना यह सिखाती है कि धैर्य से हर हाल बदल जाता है और मंजिल उन्हीं को मिलती है, जो हिम्मत नहीं हारते।
हर मनके में छिपी है एक सीख
रचना के अनुसार माँ के हाथों की माला में केवल मोती नहीं, हर मनके में एक सीख छिपी है। जब मन डगमगाता है तो माँ का ध्यान सहारा देता है और जब उम्मीदें टूटती हैं तो उनका विश्वास राह दिखाता है।
“ऐसा मन देना जो दुख में भी मुस्काए”
रचनाकार माँ से प्रार्थना करती हैं कि उन्हें ऐसा मन मिले जो दुख में भी मुस्कुराए, दूसरों का दर्द समझे और किसी का दिल न दुखाए। उनके अनुसार पूजा तभी सफल होती है, जब जीवन में सदाचार हो, मन में दया, वाणी में मिठास और कर्मों में संस्कार हों।
बुराइयों को हरने और सत्य के पथ पर चलने का वरदान
अंत में रचना में माँ से वरदान माँगा गया है कि वे भीतर की बुराइयों को दूर करें, ताकि तपस्या का अर्थ समझा जा सके, धैर्य को गहना बनाया जा सके और सत्य के पथ पर चलते हुए माँ में समाया जा सके।
(रचना: पूनम रमेश गांधी, राजस्थान)
