माँ भवानी को लगाया 56 भोग, भव्य भक्ति संध्या का आयोजन: देश–विदेश से पहुंचे हजारों भक्त
थांदला। नाहर परिवार की कुलदेवी माँ भवानी के अट्टीयासन (नागौर) स्थित भव्य मंदिर में इस वर्ष भैरव अष्टमी और माँ भवानी नवमी का पर्व अत्यंत धूमधाम और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर देवी को 56 भोग (Chhappan Bhog) अर्पित किए गए और दिव्य भक्ति संध्या का आयोजन आकर्षण का केंद्र रहा।
नाहर परिवार की पुत्री पूनम के जन्मदिन पर लगा 56 भोग
मंदिर व्यवस्थापक मनोज डी. नाहर (नागौर) और पवन नाहर (थांदला) ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष का आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि नाहर परिवार की पुत्री पूनम के जन्मदिन अवसर पर माँ भवानी की महापूजा और 56 भोग की विशेष आराधना की गई।
माँ भवानी को अर्पित किए गए इस 56 भोग प्रसाद ने आयोजन की आध्यात्मिक महत्ता और भी बढ़ा दी।
राजस्थान–मध्यप्रदेश–गुजरात–महाराष्ट्र से पहुंचे भक्त
भैरव अष्टमी और भवानी नवमी के शुभ अवसर पर आयोजित भक्ति संध्या में देश के विभिन्न राज्यों—
- राजस्थान
- मध्यप्रदेश
- गुजरात
- महाराष्ट्र
से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नाहर समाज के सदस्य पहुंचे।
लाभार्थी परिवार उदयपुर के—
प्यारेलाल, राजीव कुमार, संजय कुमार, कवीन्द्र, भास्कर, अचिंत और वंश नाहर
ने इस आयोजन को सामूहिक रूप से सफल बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई।
नागौर की राज कीलें में विराजित हैं नाहर परिवार की कुलदेवी
नाहर परिवार की कुलदेवी माँ भवानी का प्राचीन स्थान नागौर की राज कीलें में स्थित है। वर्षों से नाहर समाज इस स्थान को अपनी आध्यात्मिक पहचान और शक्ति केंद्र के रूप में मानता आया है।
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज ने अट्टीयासन में भव्य मंदिर का निर्माण कराया है, जो अब देश–विदेश में रहने वाले नाहर परिवार के लिए एकता, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का केंद्र बन चुका है।
अखिल भारतीय नाहर परिवार का वैश्विक जुड़ाव बढ़ा
अखिल भारतीय नाहर परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश पी. नाहर (पुणे) के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि उनके नेतृत्व में आज देश–विदेश के 5,000 से अधिक नाहर परिवार आस्था के इस सूत्र में बंध चुके हैं।
वे प्रतिवर्ष—
- चैत्र नवरात्रि
- कार्तिक नवरात्रि
में माँ भवानी का सामूहिक महोत्सव आयोजित करते हैं। दोनों ही पर्वों पर हजारों भक्त एकत्र होकर माँ भवानी की आराधना करते हैं और समाज में एकता का संदेश देते हैं।
जनवरी में होता है ध्वजारोहण का भव्य आयोजन
नाहर परिवार की परंपरा में जनवरी के प्रथम सप्ताहांत में आयोजित होने वाला ध्वजारोहण समारोह विशेष महत्त्व रखता है।
इस आयोजन में भी भारत और विदेशों से हजारों नाहर परिवार के सदस्य पहुंचते हैं। यह सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की एकता, प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है।
ध्वजारोहण महोत्सव में—
- देवी की विशेष पूजा–अर्चना
- सामूहिक आरती
- परिवार–मिलन समारोह
- सांस्कृतिक कार्यक्रम
आदि का आयोजन किया जाता है। यहां आने वाले भक्त “विश्व मंगल” और समाज की प्रगति के लिए माँ भवानी से आशीर्वाद मांगते हैं।
56 भोग और भक्ति संध्या बनी आकर्षण का केंद्र
इस बार के आयोजन की खास बात रही—
माँ भवानी 56 भोग प्रसादी
जिसमें मिठाई, फल, अनाज, खीर, हलवा, मेवे, पूर्णान्न और कई प्रकार के विशिष्ट व्यंजन शामिल थे। भक्तों ने 56 भोग महोत्सव को माँ भवानी की विशेष कृपा के रूप में देखा।
भक्ति संध्या
रात्रि में आयोजित भक्ति संध्या में देवी–भक्तिमय गीतों, भजनों और कीर्तन ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
भैरव अष्टमी और भवानी नवमी पर हजारों श्रद्धालुओं ने लिए दर्शन
भैरव अष्टमी और भवानी नवमी दोनों ही नाहर समाज के महत्वपूर्ण पर्व हैं, और इस वर्ष इनका उत्सव पहले से अधिक भव्य रूप में मनाया गया। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और पुष्पों से सजाया गया।
दूर–दूर से आए श्रद्धालुओं ने—
- माँ भवानी के दर्शन
- भैरव बाबा की आराधना
- सामूहिक पूजा
- प्रसाद ग्रहण
करके अपने को धन्य महसूस किया।
नाहर समाज की आस्था और संस्कृति का प्रतीक
अट्टीयासन मंदिर में आयोजित यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नाहर परिवार की एकजुटता, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
देश–विदेश में बसे लोग इस आयोजन में शामिल होकर अपनी जड़ों से जुड़ाव महसूस करते हैं।
निष्कर्ष
नाहर परिवार की कुलदेवी माँ भवानी के अट्टीयासन मंदिर में आयोजित 56 भोग, महापूजा, भक्ति संध्या और भैरव अष्टमी–भवानी नवमी के आयोजन ने समाज में एक नया उत्साह और एकता का वातावरण बनाया है।
नाहर परिवार के हजारों सदस्यों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि माँ भवानी की आस्था और नाहर समाज की एकता समय के साथ और मजबूत होती जा रही है।

