Lucknow Coaching Centre Fire: लखनऊ अग्निकांड में 15 की मौत, 4 आरोपी गिरफ्तार, 4 अफसर निलंबित
Lucknow Coaching Centre Fire: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 5 महिलाएं और 10 पुरुष छात्र शामिल हैं, जिनकी उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच बताई जा रही है। घटना के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
अलीगंज के कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग
सोमवार को अलीगंज क्षेत्र स्थित एक कोचिंग सेंटर में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि भवन में मौजूद छात्रों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ ही मिनटों में धुआं पूरे भवन में भर गया, जिससे कई छात्र अंदर ही फंस गए।
आग की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत एजेंसियां सक्रिय हुईं, लेकिन तब तक स्थिति काफी गंभीर हो चुकी थी।
15 लोगों की मौत, कई परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में अधिकांश छात्र थे, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रहे थे।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मृतकों में उत्तर प्रदेश के 11 लोग शामिल हैं। इनमें लखनऊ के 8, कानपुर के 2 तथा बाराबंकी का 1 व्यक्ति शामिल है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के 2, मध्य प्रदेश का 1 और हरियाणा का 1 व्यक्ति भी हादसे का शिकार हुआ है।
घटना के बाद मृतकों के परिजनों में शोक और आक्रोश का माहौल है। कई परिवारों ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
40 मिनट बाद पहुंची फायर ब्रिगेड
जानकारी के अनुसार आग लगने की सूचना मिलने के लगभग 40 मिनट बाद फायर ब्रिगेड की टीम घटनास्थल पर पहुंची। तब तक आग काफी विकराल रूप ले चुकी थी।
आग बुझाने के लिए फायर कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं SDRF और NDRF की टीमों ने संयुक्त रूप से करीब सात घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। कई स्थानों पर दीवारें तोड़कर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया गया और शवों को बाहर निकाला गया।
फॉरेंसिक टीम जुटी जांच में
घटना के बाद फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम भी मौके पर पहुंच गई है। FSL लखनऊ के निदेशक प्रोफेसर आदर्श कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम आग लगने के कारणों की जांच कर रही है।
फॉरेंसिक विशेषज्ञ घटनास्थल से नमूने एकत्र कर रहे हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि आग शॉर्ट सर्किट, तकनीकी खराबी या किसी अन्य कारण से लगी थी।
2016 में दिया गया था भवन गिराने का आदेश
जांच के दौरान एक बड़ा खुलासा सामने आया है। जिस भवन में आग लगी थी, उसे वर्ष 2016 में अवैध निर्माण मानते हुए गिराने का आदेश जारी किया गया था। हालांकि दो महीने के भीतर ही यह आदेश निरस्त कर दिया गया।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार भवन स्वामी को पुनः नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
भवन मालिक समेत चार आरोपी गिरफ्तार
बताया जा रहा है कि यह भवन रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट कॉलेज के संचालक वीरेंद्र शुक्ला का है। पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर वीरेंद्र शुक्ला समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई है। इसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
फायर सेफ्टी व्यवस्था पूरी तरह नदारद
पुलिस और प्रशासनिक जांच में कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। अधिकारियों के अनुसार भवन में आग से बचाव के लिए आवश्यक फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद नहीं थे।
इसके अलावा इमरजेंसी एग्जिट का अभाव था। धुआं बाहर निकालने की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी। सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि घटना के समय भवन की छत का दरवाजा बंद था, जिसके कारण कई छात्र बाहर नहीं निकल सके।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अधिकांश लोगों की मौत आग से झुलसने के बजाय दम घुटने के कारण हुई।
चार अफसर निलंबित, अन्य पर भी कार्रवाई की तैयारी
घटना के बाद सरकार ने जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लखनऊ विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार भवन को अनुमति देने और निगरानी में लापरवाही बरतने वाले करीब 16 अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जांच रिपोर्ट के आधार पर इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्यमंत्री योगी ने गठित की SIT
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उनके निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
इस जांच दल में अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग) अमृत अभिजात तथा अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री ने SIT को सात दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जवाबदेही तय करने की तैयारी
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर भवन संचालकों तक सभी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
अलीगंज अग्निकांड ने एक बार फिर कोचिंग संस्थानों, शैक्षणिक परिसरों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा मानकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में छात्रों वाले संस्थानों में फायर सेफ्टी ऑडिट और नियमित निरीक्षण अनिवार्य होना चाहिए।
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्थाओं में मौजूद खामियों का भी बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। अब सभी की निगाहें SIT जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस त्रासदी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
