LPG Crisis in Madhya Pradesh: आम लोगों की रसोई गैस मुश्किलों में फंसी, इंदौर और भोपाल में संकट
मध्य प्रदेश। राज्य में रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति और नए कनेक्शन के मामले लगातार आम जनता के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। इंदौर में नए LPG कनेक्शन के लिए ऑनलाइन पोर्टल को अस्थायी रूप से एक महीने के लिए बंद कर दिया गया है। इसके चलते e-KYC और नए कनेक्शन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं फिलहाल रोक दी गई हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी मोहनलाल मारू के अनुसार यह निर्णय अस्थायी रूप से लागू किया गया है और जनता को जल्द ही सुविधा प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है।
इंदौर की यह स्थिति आम लोगों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि नए कनेक्शन लेने वाले कई परिवार अब असुविधा का सामना कर रहे हैं। वहीं, ऑनलाइन पोर्टल बंद होने से ग्राहक न केवल नए कनेक्शन के लिए प्रतीक्षा में हैं, बल्कि पुराने कनेक्शन में गैस की सप्लाई में भी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।
भोपाल में एजेंसी पर उपभोक्ताओं का गुस्सा
इसी बीच राजधानी भोपाल में लालघाटी इलाके में स्थित प्रियंका गैस एजेंसी पर शुक्रवार को उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग सिलेंडर लेने के लिए एजेंसी पहुंचे, जिनमें कई ऐसे ग्राहक भी शामिल थे जिन्होंने 4-5 दिन पहले गैस बुक कराई थी, लेकिन उन्हें अब तक सिलेंडर नहीं मिला।
ग्राहकों ने आरोप लगाया कि जब वे एजेंसी पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनका सिलेंडर पहले ही डिलीवर किया जा चुका है। हालाँकि, वास्तविकता में उनके घर तक कोई डिलीवरी नहीं हुई थी। इस पर लोगों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने एजेंसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
बुकिंग के बावजूद नहीं मिली सप्लाई
एक उपभोक्ता ने बताया कि उन्होंने 28 मार्च को गैस बुक कराई थी, लेकिन 3 अप्रैल की सुबह तक भी सिलेंडर नहीं मिला। जब वे एजेंसी पहुंचे तो पता चला कि रिकॉर्ड में उनका सिलेंडर पहले ही डिलीवर दिखाया जा चुका है। अन्य ग्राहकों ने भी इसी तरह की शिकायतें कीं कि बुकिंग के बावजूद उन्हें गैस नहीं मिल रही है।
ग्राहक शिकायत कर रहे हैं कि लगातार देरी और असंगत जानकारी के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। कई लोग खाना बनाने और रोजमर्रा के कामों में असुविधा का सामना कर रहे हैं।
भोपाल में लंबित बुकिंग की संख्या
जानकारी के मुताबिक, भोपाल में इस समय 25 हजार से अधिक गैस बुकिंग लंबित हैं। रोजाना 12 से 14 हजार तक बुकिंग हो रही हैं, जबकि सप्लाई केवल 10 से 11 हजार सिलेंडरों की ही हो पा रही है। इस असंतुलन के कारण ग्राहकों में असंतोष और संकट बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या न केवल भोपाल तक सीमित है, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में LPG आपूर्ति की स्थिरता को चुनौती दे रही है।
प्रशासन ने लिया सख्त कदम
स्थिति का तूल पकड़ने के बाद प्रशासन भी हरकत में आया है। भोपाल कलेक्टर ने गैस वितरण में अनियमितताओं, अतिरिक्त वसूली और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने 4 अप्रैल 2026 को सभी SDM और तहसीलदारों को अपने-अपने क्षेत्रों में गैस एजेंसियों की सख्त जांच के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सभी एजेंसियों को नियमों का पालन करना होगा और उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की लापरवाही या गैर-जिम्मेदारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आम जनता की परेशानियां
ग्राहकों का कहना है कि लगातार गैस की कमी और देरी से उनकी दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो रही है। खाना बनाने, बच्चों की जरूरतों और घरेलू कामों में कठिनाई आ रही है। कई लोग अब वैकल्पिक उपाय अपनाने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे आर्थिक और समय की हानि भी हो रही है।
विशेष रूप से, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार इस संकट से अधिक प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उनके पास सिलेंडर की अनुपलब्धता के कारण रोजमर्रा के खाने और जरूरतों के लिए विकल्प कम हैं।
LPG कनेक्शन और पोर्टल बंद
इंदौर में ऑनलाइन पोर्टल को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय e-KYC प्रक्रिया और नए कनेक्शन को प्रभावित कर रहा है। अधिकारी मोहनलाल मारू के अनुसार, पोर्टल बंद करने का उद्देश्य तकनीकी समस्याओं का समाधान करना और सिस्टम को मजबूत बनाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह अस्थायी बंदी है और जल्द ही नई प्रणाली के माध्यम से ग्राहकों को सुविधा दी जाएगी। इसके बावजूद, आम जनता फिलहाल असुविधा का सामना कर रही है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में LPG संकट ने आम लोगों के लिए चिंता और परेशानी बढ़ा दी है। इंदौर में नए कनेक्शन के लिए पोर्टल बंद होना और भोपाल में लंबित बुकिंग तथा डिलीवरी की अनियमितताएं स्थिति को और गंभीर बना रही हैं। प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं, लेकिन जनता की सुविधा और समस्याओं के समाधान के लिए स्थायी और प्रभावी उपाय आवश्यक हैं।
भविष्य में, बेहतर आपूर्ति और ऑनलाइन सिस्टम को मजबूत करना राज्य के लिए प्राथमिकता बननी चाहिए, ताकि आम जनता को रसोई गैस जैसी मूलभूत जरूरत के लिए परेशानियों का सामना न करना पड़े।
