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LPG Price Hike 2026: गैस कंपनियों का घाटा 59 हजार करोड़ के पार, क्या महंगा होगा घरेलू LPG सिलेंडर?

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Published On: 11 August 2026
Domestic LPG cylinder and rising gas prices in India, highlighting the ₹59,000 crore under-recovery faced by oil marketing companies in 2026
— Domestic LPG cylinder and rising gas prices in India, highlighting the ₹59,000 crore under-recovery faced by oil marketing companies in 2026

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LPG Price Hike 2026: गैस कंपनियों का घाटा 59 हजार करोड़ के पार, क्या महंगा होगा घरेलू LPG सिलेंडर?

घरेलू एलपीजी की बिक्री पर सरकारी तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी बढ़ी; सरकार की ओर से करीब 52 हजार करोड़ रुपये की मदद के बावजूद घाटा बना चिंता का विषय

LPG Price News: घरेलू एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले करोड़ों परिवारों के लिए गैस की कीमतों से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। सरकारी तेल कंपनियों को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 तक घरेलू एलपीजी पर तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की कुल अंडर-रिकवरी 59,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

कंपनियों को हो रहे इस नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार की ओर से भी बड़ी रकम उपलब्ध कराई गई है। रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने करीब 52,000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया है। इसके बावजूद कंपनियों की अंडर-रिकवरी 59 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा होना इस पूरे मामले को महत्वपूर्ण बनाता है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ा इजाफा हो सकता है? फिलहाल सरकार या तेल कंपनियों की ओर से घरेलू एलपीजी की कीमत बढ़ाने की कोई नई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अगले महीने से गैस सिलेंडर निश्चित रूप से महंगा हो जाएगा।

आखिर घरेलू LPG पर इतना घाटा क्यों हो रहा है?

सरकारी तेल कंपनियां घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी सिलेंडर की कीमत को कई बार उसकी वास्तविक लागत से कम स्तर पर रखती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमत बढ़ने पर कंपनियों की खरीद लागत भी बढ़ जाती है।

लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं पर इस बढ़ी हुई लागत का पूरा असर तत्काल नहीं डाला जाता। यानी कंपनियां जिस कीमत पर एलपीजी खरीदती हैं और जिस कीमत पर घरेलू ग्राहकों को सिलेंडर बेचती हैं, उनके बीच अंतर पैदा हो जाता है।

इसी अंतर को कंपनियों की अंडर-रिकवरी कहा जाता है। आसान भाषा में समझें तो अगर किसी सिलेंडर की वास्तविक लागत अधिक है लेकिन उसे ग्राहकों को उससे कम कीमत पर बेचा जाता है, तो कंपनियों को प्रति सिलेंडर नुकसान होता है।

जब ऐसे लाखों-करोड़ों सिलेंडरों की बिक्री होती है, तो यह अंतर बड़ी रकम में बदल जाता है।

59 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंची अंडर-रिकवरी

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 तक घरेलू एलपीजी की बिक्री पर सरकारी तेल कंपनियों की कुल अंडर-रिकवरी 59,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई।

यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार की ओर से कंपनियों को नुकसान की भरपाई के लिए बड़ी आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। इसके बावजूद कंपनियों पर अंडर-रिकवरी का बोझ बना हुआ है।

इस स्थिति का सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों, आयात लागत, मुद्रा विनिमय दर और घरेलू स्तर पर तय बिक्री कीमतों से है।

सरकार ने कंपनियों को कितने रुपये दिए?

घरेलू एलपीजी की बिक्री से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से सरकारी तेल कंपनियों को मुआवजा दिया गया है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सरकार ने कुल करीब 52,000 करोड़ रुपये की मदद दी है। इसमें वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान OMCs को करीब 22,000 करोड़ रुपये की भरपाई शामिल है।

इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए करीब 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे का प्रावधान किया गया है।

इस आर्थिक सहायता का उद्देश्य घरेलू एलपीजी को उपभोक्ताओं के लिए अपेक्षाकृत सस्ती दर पर उपलब्ध कराना और तेल कंपनियों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना है।

जून में 700 रुपये से ज्यादा था अंतर

घरेलू एलपीजी की बिक्री और उसकी लागत के बीच का अंतर हर महीने एक जैसा नहीं रहता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण कंपनियों की अंडर-रिकवरी भी बदलती रहती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में घरेलू एलपीजी पर यह अंतर 700 रुपये प्रति सिलेंडर से ज्यादा था। यानी उस समय कंपनियों की लागत और बिक्री मूल्य के बीच काफी बड़ा अंतर मौजूद था।

जुलाई में यह अंतर घटकर करीब 500 रुपये प्रति सिलेंडर रह गया।

वहीं अगस्त में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यह अंतर घटकर करीब 188 रुपये प्रति सिलेंडर रह गया है। इससे संकेत मिलता है कि हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों और लागत के स्तर में कुछ बदलाव आया है।

क्या LPG सिलेंडर की कीमत बढ़ने वाली है?

59 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अंडर-रिकवरी के आंकड़े के बाद उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या सरकार घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। इसलिए अभी यह दावा करना सही नहीं होगा कि आने वाले दिनों में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत निश्चित रूप से बढ़ाई जाएगी।

एलपीजी की कीमत तय करने में कई कारक भूमिका निभाते हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात लागत, सरकारी नीति और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ प्रमुख हैं।

अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमत लगातार ऊंची रहती है और कंपनियों की अंडर-रिकवरी दोबारा बढ़ती है, तो भविष्य में कीमतों की समीक्षा की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित तेल कंपनियों की नीति पर निर्भर करेगा।

घरेलू उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?

घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवारों के मासिक बजट पर पड़ सकता है। खासकर मध्यम वर्ग और कम आय वाले परिवारों के लिए रसोई गैस की कीमत में छोटा बदलाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

दूसरी ओर, यदि अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों में कमी आती है और तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी घटती है, तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

यही वजह है कि मौजूदा 59 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अंडर-रिकवरी को देखते हुए भी सिर्फ इस आंकड़े के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि घरेलू सिलेंडर की कीमत तुरंत बढ़ने वाली है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों पर रहेगी नजर

घरेलू LPG की कीमतों से जुड़े अगले फैसले के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी। यदि कच्चे तेल और LPG की वैश्विक कीमतों में बड़ा बदलाव होता है तो उसका असर भारतीय तेल कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है।

इसके अलावा सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी या मुआवजे की नीति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार यदि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कंपनियों को आर्थिक सहायता जारी रखती है, तो बढ़ती लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालने की जरूरत कम हो सकती है।

अभी सिलेंडर महंगा होने की आधिकारिक घोषणा नहीं

फिलहाल घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में तत्काल बढ़ोतरी को लेकर कोई नया आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। इसलिए उपभोक्ताओं को अफवाहों के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है।

59,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की अंडर-रिकवरी निश्चित रूप से तेल कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इतनी ही राशि सीधे उपभोक्ताओं से वसूल की जाएगी।

आने वाले समय में LPG की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, सरकारी मुआवजे और तेल कंपनियों की लागत की स्थिति पर नजर रहेगी। इन्हीं कारकों के आधार पर घरेलू LPG की कीमतों को लेकर आगे कोई फैसला हो सकता है।

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