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LPG Cylinder Price Update: बढ़ते क्रूड ऑयल और वैश्विक तनाव के बीच भारत में रसोई गैस की कीमतों पर असर, सब्सिडी से करोड़ों परिवारों को राहत

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Published On: 4 June 2026
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LPG Cylinder Price Update: बढ़ते क्रूड ऑयल और वैश्विक तनाव के बीच भारत में रसोई गैस की कीमतों पर असर,

अंतरराष्ट्रीय हालात का असर घरेलू ईंधन बाजार पर

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार अस्थिरता देखने को मिल रही है। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आए दिन उतार-चढ़ाव का सीधा असर दुनिया भर के ईंधन बाजारों पर पड़ रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। इसी वजह से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में समय-समय पर बढ़ोतरी देखने को मिली है, और इसका असर एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों पर भी पड़ रहा है।

पिछले कुछ महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मार्च में ही घरेलू सिलेंडर की कीमत में करीब 60 रुपये की वृद्धि की गई थी। वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भी लगातार बदलाव देखा गया है, जिसमें मई में 993 रुपये की बढ़ोतरी और जून में 42 रुपये की अतिरिक्त वृद्धि शामिल है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारत में सप्लाई लागत

जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण भारत में एलपीजी की वास्तविक सप्लाई लागत बढ़कर लगभग 1200 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच जाती है। हालांकि, उपभोक्ताओं को यह सिलेंडर इस वास्तविक लागत पर नहीं मिलता, बल्कि सरकार की सब्सिडी और मूल्य नियंत्रण प्रणाली के कारण उन्हें काफी कम कीमत चुकानी पड़ती है।

इस समय सामान्य उपभोक्ताओं को बिना सब्सिडी वाला एलपीजी सिलेंडर लगभग 913 रुपये में मिल रहा है, जो वास्तविक सप्लाई लागत से करीब 287 रुपये कम है। इसका मतलब यह है कि सरकार उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी आर्थिक राहत प्रदान कर रही है।

करोड़ों परिवारों को मिल रही सब्सिडी की सुविधा

भारत में 10 करोड़ से अधिक परिवार ऐसे हैं जिन्हें एलपीजी सिलेंडर पर किसी न किसी रूप में सब्सिडी का लाभ मिल रहा है। यह सब्सिडी सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है।

सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत अलग-अलग वर्गों को अलग-अलग स्तर की सहायता मिलती है, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर बढ़ती कीमतों का दबाव कम किया जा सके।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) से बड़ी राहत

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) देश की सबसे बड़ी रसोई गैस कनेक्शन योजनाओं में से एक है, जिसके तहत करोड़ों गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाकर स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना है।

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सरकार की ओर से प्रति सिलेंडर 300 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है, जो सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। इस सहायता के बाद इन परिवारों को एक एलपीजी सिलेंडर लगभग 613 रुपये में उपलब्ध हो जाता है, जो सामान्य बाजार दर की तुलना में काफी कम है।

कुछ राज्यों में राज्य सरकारें भी अतिरिक्त सहायता प्रदान करती हैं। जहां वैट (VAT) में छूट दी जाती है या 20 से 25 रुपये तक की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है, वहां उपभोक्ताओं के लिए प्रभावी कीमत और भी कम हो जाती है। इसी वजह से कुछ क्षेत्रों में उज्ज्वला लाभार्थियों को सिलेंडर लगभग 587 रुपये तक सस्ता पड़ता है।

बिना सब्सिडी उपभोक्ताओं के लिए स्थिति

जो उपभोक्ता उज्ज्वला योजना के अंतर्गत नहीं आते, उन्हें भी सरकार द्वारा नियंत्रित दरों पर एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराया जाता है। वर्तमान में ऐसे उपभोक्ताओं के लिए सिलेंडर की कीमत लगभग 913 रुपये के आसपास है।

हालांकि यह कीमत भी अंतरराष्ट्रीय सप्लाई लागत से कम है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी व्यवस्था को जारी रखे हुए है। बढ़ती वैश्विक कीमतों के बावजूद भारत में एलपीजी की उपलब्धता और कीमत नियंत्रण एक महत्वपूर्ण नीति के रूप में काम कर रहा है।

उज्ज्वला योजना के लिए पात्रता शर्तें

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ पाने के लिए सरकार ने कुछ स्पष्ट पात्रता शर्तें निर्धारित की हैं। सबसे पहले, गैस कनेक्शन केवल परिवार की सबसे वयस्क महिला सदस्य के नाम पर ही जारी किया जाता है, जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।

इसके अलावा, परिवार के पास पहले से किसी भी गैस कंपनी जैसे इंडेन (Indane), भारत गैस (Bharat Gas) या एचपी गैस (HP Gas) का कोई अन्य एलपीजी कनेक्शन नहीं होना चाहिए।

लाभार्थी महिला का संबंध गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवार से होना आवश्यक है। साथ ही अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अंत्योदय अन्न योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी तथा वनवासी और पिछड़े वर्ग के लोग भी इस योजना के पात्र माने जाते हैं।

सब्सिडी प्रणाली का आर्थिक प्रभाव

एलपीजी सब्सिडी प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह सीधे जरूरतमंद परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाती है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली के माध्यम से सरकार बिचौलियों को हटाकर पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।

इस व्यवस्था से न केवल गरीब परिवारों को राहत मिलती है, बल्कि देश में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को भी बढ़ावा मिलता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी और कोयले जैसे पारंपरिक ईंधन के उपयोग में कमी आई है, जिससे पर्यावरणीय लाभ भी हुआ है।

भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां

हालांकि वैश्विक बाजार की अनिश्चितता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि होती है, तो आने वाले समय में एलपीजी की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार के लिए सब्सिडी संतुलन बनाए रखना एक महत्वपूर्ण नीति चुनौती होगी।

इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सब्सिडी का लाभ सही और पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचे, ताकि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय तनाव और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के बावजूद भारत में एलपीजी उपभोक्ताओं को सरकार की सब्सिडी योजनाओं के कारण बड़ी राहत मिल रही है। उज्ज्वला योजना और DBT व्यवस्था ने करोड़ों परिवारों को सस्ती रसोई गैस उपलब्ध कराई है। आने वाले समय में वैश्विक बाजार की स्थिति इस क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगी, लेकिन फिलहाल भारत में एलपीजी की पहुंच और कीमत नियंत्रण एक मजबूत व्यवस्था के रूप में काम कर रही है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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