भगवान महावीर के सिद्धांतों की वर्तमान समाज में उपयोगिता पर राष्ट्रीय वेबीनार आयोजित
वीर शासन जयंती दिवस पर विद्वानों ने शांति, अहिंसा और भाईचारे का दिया संदेश
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन विद्वत्परिषद के तत्वावधान में वीर शासन जयंती दिवस के अवसर पर 30 जुलाई 2026 (श्रावण कृष्ण प्रतिपदा) को एक राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। वेबीनार का विषय था “भगवान महावीर के सिद्धांतों की समाज में उपयोगिता”, जिसमें देशभर के जैन विद्वानों ने भगवान महावीर के उपदेशों की प्रासंगिकता और आधुनिक समाज में उनकी आवश्यकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
वेबीनार की अध्यक्षता प्राचार्य अरुण कुमार जैन, सांगानेर ने की। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों ने भगवान महावीर के सिद्धांतों को वर्तमान समय की सामाजिक, नैतिक और मानवीय चुनौतियों का प्रभावी समाधान बताते हुए उनके व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल दिया।
भगवान महावीर के पंच सिद्धांत आज भी हैं प्रासंगिक
मुख्य वक्ता डॉ. नरेंद्र कुमार जैन, सनावद ने अपने व्याख्यान में भगवान महावीर स्वामी के शासन, उनके उपदेशों तथा पंच सिद्धांतों की वर्तमान समाज में उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज विश्व हिंसा, असहिष्णुता, तनाव और सामाजिक विभाजन जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में भगवान महावीर के अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय और ब्रह्मचर्य जैसे सिद्धांत मानव समाज को शांति, सद्भाव और भाईचारे की दिशा प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति, परिवार और समाज इन सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं तो विश्व में स्थायी शांति और मानवीय मूल्यों की स्थापना संभव है।
भगवान महावीर के वंश वृद्धि का अर्थ उनके अनुयायियों से
दूसरे वक्ता डॉ. नरेंद्र कुमार जैन, टीकमगढ़ ने “भगवान महावीर के वंश वृद्धि” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि इसका आशय केवल जैविक वंश से नहीं, बल्कि उन लोगों से है जो भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपनाकर उनके आदर्शों के अनुरूप जीवन जीते हैं।
उन्होंने कहा कि जब समाज सामूहिक रूप से जैन सिद्धांतों का पालन करेगा, तभी भगवान महावीर के विचारों का वास्तविक विस्तार होगा और उनके संदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार संभव हो सकेगा।
समाज में शांति के लिए जैन सिद्धांतों को अपनाने का आह्वान
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन विद्वत्परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार जैन, भारती (बुरहानपुर) ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में शांति, सद्भाव और नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए उन कार्यों को प्रोत्साहन देना चाहिए जो मानवीय कल्याण से जुड़े हों।
उन्होंने कहा कि विद्वानों और समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वे जैन दर्शन और भगवान महावीर के सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय योगदान दें। इससे समाज में नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होगा।
कार्यशालाओं के माध्यम से जैन सिद्धांतों का हो प्रचार
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य अरुण कुमार जैन, सांगानेर ने कहा कि भगवान महावीर के विचार केवल किसी एक समाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जैन सिद्धांतों को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाने के लिए नियमित कार्यशालाओं, संगोष्ठियों और वेबीनारों का आयोजन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर नई पीढ़ी तक इन मूल्यों को प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
डॉ. दर्शना जैन ने किया कार्यक्रम का संचालन
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. दर्शना जैन, जयपुर ने किया। वेबीनार में देशभर से जैन विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं समाज के अनेक लोगों ने ऑनलाइन सहभागिता की और भगवान महावीर के सिद्धांतों को वर्तमान समय में अपनाने की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।
वेबीनार का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि भगवान महावीर के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने हजारों वर्ष पूर्व थे, और उनके सिद्धांतों का पालन कर एक शांतिपूर्ण, नैतिक एवं समरस समाज का निर्माण किया जा सकता है।
