19 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा
बंकनाथ अटल दरबार से होगा शुभारंभ, सकल हिंदू समाज की सहभागिता*
ओडिशा की परंपरा की तर्ज पर सजेगा आस्था का महापर्व, हरे कृष्णा टीम व सकल हिंदू समाज की तैयारियां पूर्ण
कौशिक पण्डित कुशाग्र समाचार सेवा मनावर जिला धार मध्य प्रदेश
“जगन्नाथ के भात, जगत पसारे हाथ”
मनावर, जिला धार। भगवान श्री जगन्नाथ की ऐतिहासिक द्वितीय भव्य रथयात्रा आगामी 19 जुलाई 2026 (रविवार) को धार्मिक आस्था, श्रद्धा एवं उल्लास के साथ निकाली जाएगी। हरे कृष्णा टीम एवं सकल हिंदू समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाली यह रथयात्रा दोपहर 3:30 बजे श्री बंकनाथ अटल दरबार मंदिर से प्रारंभ होगी। आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं तथा विभिन्न समाजों के अध्यक्षों एवं गणमान्य नागरिकों को आमंत्रण भेजे जा रहे हैं।
रथयात्रा में भगवान श्री जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र (बलराम) एवं बहन सुभद्रा के साथ सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर नगर के प्रमुख मार्गों से भ्रमण करेंगे। श्रद्धालु रथ की रस्सी खींचकर भगवान की सेवा का सौभाग्य प्राप्त करेंगे। यात्रा के दौरान पूरे नगर में भजन-कीर्तन, जयघोष एवं भक्तिमय वातावरण रहेगा।

रथयात्रा की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में यात्रा की विस्तृत रूपरेखा तय की गई तथा विभिन्न पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। यात्रा में आकर्षक भजन मंडलियां, बैंड-बाजे विशेष आकर्षण रहेंगे। आयोजन की गरिमा बनाए रखने के लिए पदाधिकारियों का ड्रेस कोड भी निर्धारित किया गया है। पुरुष पीला कुर्ता एवं सफेद धोती, जबकि महिलाएं लाल परिधान में शामिल रहेगी। रथ यात्रा मार्ग पर जगह जगह शुद्ध पेयजल और प्रसादी की व्यवस्था रहेगी।

आयोजक समिति के सोनू पाटीदार (बोलबम) ने बताया कि रथयात्रा को सर्वसमाज का स्वरूप देने के उद्देश्य से विभिन्न समाजों के अध्यक्षों एवं धर्मप्रेमी नागरिकों को आमंत्रित किया जा रहा है। यात्रा का समापन पुनः बंकनाथ अटल दरबार मंदिर परिसर में महाआरती एवं महाप्रसादी वितरण के साथ होगा। आयोजक समिति ने नगर एवं आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भगवान श्री जगन्नाथ के दर्शन करने एवं रथयात्रा में सहभागी बनने का आग्रह किया जा रहा है।
भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल पंचमी के पावन अवसर पर निकाली जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा के साथ रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं। श्रद्धालु रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य मानते हैं। रथयात्रा का संदेश सामाजिक समरसता, सेवा, भक्ति एवं मानव कल्याण का प्रतीक माना जाता है।

