हेड कांस्टेबल की 75 लाख रुपये की नौकरी, संपत्ति 6.26 करोड़ रुपये; लोकायुक्त ने 15 ठिकानों पर मारे छापे — दैनिक स्वराज वाणी
देवास। पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर में पदस्थ प्रधान आरक्षक फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर लोकायुक्त ने कार्रवाई की है। बुधवार सुबह लोकायुक्त उज्जैन और इंदौर की संयुक्त टीमों ने देवास और इंदौर जिले में उनसे जुड़े 15 ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान टीमों ने संपत्ति और आय से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। शुरुआती आकलन के अनुसार, फिरोज खान के पास करीब 6.26 करोड़ रुपये की संपत्ति होने की जानकारी सामने आई है।
मिली जानकारी के मुताबिक, प्रधान आरक्षक को अब तक की नौकरी में वेतन के रूप में लगभग 75 लाख रुपये मिले हैं। लोकायुक्त टीम अब इस आय और उनकी संपत्ति के बीच अंतर की जांच कर रही है। छापेमारी में मिले दस्तावेजों और अन्य जानकारियों का मिलान किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही संपत्ति के मूल्य और आय के स्रोतों को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।
देवास और इंदौर के 15 ठिकानों पर कार्रवाई
लोकायुक्त की अलग-अलग टीमों ने बुधवार सुबह एक साथ देवास और इंदौर में कार्रवाई शुरू की। प्रधान आरक्षक फिरोज खान देवास में रहते हैं और उनकी वर्तमान पदस्थापना इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में बताई गई है। जांच दलों ने दोनों जिलों में उनसे संबंधित 15 ठिकानों पर पहुंचकर तलाशी ली।
कार्रवाई का उद्देश्य शिकायत में बताए गए आय और संपत्ति के ब्योरे की जांच करना है। टीमों ने ठिकानों पर उपलब्ध दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान सामने आने वाली जानकारी को दर्ज किया जा रहा है। लोकायुक्त की टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संपत्ति और खर्च का विवरण उनकी ज्ञात आय से मेल खाता है या नहीं।
वेतन और संपत्ति के बीच अंतर की जांच
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रधान आरक्षक के पास ज्ञात आय से अधिक संपत्ति है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक की नौकरी के दौरान उन्हें वेतन के रूप में करीब 75 लाख रुपये मिले हैं, जबकि जांच में उनकी संपत्ति का मूल्य लगभग 6.26 करोड़ रुपये बताया गया है। इसी अंतर के आधार पर लोकायुक्त ने जांच शुरू की है।
हालांकि, छापेमारी के शुरुआती चरण में सामने आए आंकड़ों को जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। संपत्ति का आकलन, उसके स्वामित्व, आय के स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेजों की पुष्टि जांच के बाद होगी। लोकायुक्त टीम विभिन्न रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाएगी कि संपत्ति किस अवधि में अर्जित की गई और उसके लिए धन कहां से आया।
काफी समय से गैरहाजिर रहने की जानकारी
प्रधान आरक्षक फिरोज खान की इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थापना बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह काफी समय से गैरहाजिर चल रहे हैं। उनकी गैरहाजिरी और वर्तमान स्थिति से जुड़े पहलुओं की जानकारी भी मामले में सामने आई है। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई का मुख्य केंद्र आय से अधिक संपत्ति की शिकायत और उससे संबंधित दस्तावेजों की जांच है।
जांच जारी, दस्तावेजों का किया जा रहा मिलान
देवास और इंदौर में लोकायुक्त की टीमें जांच में जुटी हैं। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर संपत्तियों का विवरण तैयार किया जा रहा है। जांच दल यह भी देखेंगे कि सामने आई संपत्ति प्रधान आरक्षक के नाम पर है या उनसे जुड़े अन्य लोगों अथवा संस्थाओं के नाम पर दर्ज है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी जांच के आगे बढ़ने पर स्पष्ट होगी।
लोकायुक्त की संयुक्त कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग और संबंधित क्षेत्रों में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल टीमों की जांच जारी है और कार्रवाई से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दर्ज संपत्तियों और प्रधान आरक्षक की ज्ञात आय के बीच कितना अंतर है तथा शिकायत में लगाए गए आरोप किस हद तक प्रमाणित होते हैं।
