Lamatola भूमिगत कोयला खदान परियोजना की लोक सुनवाई सम्पन्न, ग्रामीणों ने जताया व्यापक समर्थन
अनूपपुर, 17 जून 2026
अनूपपुर जिले की कोतमा तहसील अंतर्गत प्रस्तावित Lamatola भूमिगत कोयला खदान परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया के तहत आयोजित लोक सुनवाई बुधवार को ग्राम पंचायत बसखली स्थित शासकीय हाई स्कूल परिसर में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। यह लोक सुनवाई शांतिपूर्ण माहौल में आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।
इस दौरान ग्रामीणों ने परियोजना के पक्ष में स्पष्ट समर्थन व्यक्त किया और इसे क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया।
लोक सुनवाई में भारी जनभागीदारी और उत्साह
लोक सुनवाई में परियोजना से प्रभावित सात गांवों—लामाटोला, रेउला, गढ़ी, बिचारपुर, बसखली, मौहारी एवं थोड़ाहा—के लगभग 1,500 ग्रामीणों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। ग्रामीणों की इस बड़ी भागीदारी ने आयोजन को अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान लोगों ने न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराई बल्कि खुलकर अपने विचार और सुझाव भी प्रस्तुत किए। कई ग्रामीणों ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित विकास कार्यों को गति प्रदान करेगी।
लोक सुनवाई का संचालन अनुविभागीय अधिकारी, कोतमा श्री सतीश वर्मा एवं मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि डॉ. अशोक कुमार तिवारी की उपस्थिति में किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और सभी सुझावों को रिकॉर्ड में दर्ज किया।
परियोजना की पृष्ठभूमि और आवंटन प्रक्रिया
लामाटोला भूमिगत कोयला खदान परियोजना भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा वाणिज्यिक खनन नीति के अंतर्गत अगस्त 2024 में प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से मेसर्स ए.सी.सी. लिमिटेड को आवंटित की गई है।
यह परियोजना लगभग 1,030 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है और कोतमा तहसील के सात गांवों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। परियोजना का संचालन लगभग 35 वर्षों तक प्रस्तावित है, जिसके दौरान प्रति वर्ष लगभग 20 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
इस परियोजना को ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया और अध्ययन
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप इस परियोजना पर विस्तृत पर्यावरणीय अध्ययन किया गया है। अध्ययन में वायु गुणवत्ता, जल गुणवत्ता, ध्वनि स्तर, मृदा गुणवत्ता और जैव विविधता जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन शामिल था।
रिपोर्ट के अनुसार, सभी प्रमुख पर्यावरणीय मानक निर्धारित सीमा के भीतर पाए गए हैं। इसके साथ ही परियोजना के लिए एक विस्तृत पर्यावरण प्रबंधन योजना (Environmental Management Plan) भी तैयार की गई है।
इस योजना के तहत प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष उपायों को शामिल किया गया है।
ग्रामीणों की राय और समर्थन
लोक सुनवाई के दौरान उपस्थित अधिकांश ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने परियोजना का समर्थन किया। लोगों का कहना था कि इस परियोजना से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय युवाओं को बेहतर भविष्य मिलेगा।
कई ग्रामीणों ने यह भी कहा कि क्षेत्र में अब तक रोजगार के सीमित साधन रहे हैं, ऐसे में यह परियोजना आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती है।
कुछ ग्रामीणों ने सुझाव दिया कि परियोजना के संचालन के दौरान स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए ताकि इसका लाभ सीधे समुदाय तक पहुंचे।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
परियोजना के लागू होने से क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के बड़े अवसर उत्पन्न होने की संभावना है। इससे न केवल बेरोजगारी में कमी आएगी बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा परिवहन, छोटे व्यापार, सेवा क्षेत्र और सहायक उद्योगों में भी विकास की संभावना जताई जा रही है।
राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि होने से विकास योजनाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है।
एसीसी लिमिटेड की विकास और CSR योजनाएं
परियोजना संचालक ए.सी.सी. लिमिटेड ने क्षेत्र में सामाजिक विकास के लिए व्यापक योजनाएं तैयार की हैं। इनमें स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, शिक्षा सुविधाओं में सुधार, पेयजल व्यवस्था, कौशल विकास कार्यक्रम और बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है।
कंपनी ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने का आश्वासन भी दिया है। इसके तहत नियमित जल छिड़काव, वृक्षारोपण, हरित पट्टी विकास और धूल नियंत्रण के उपाय किए जाएंगे।
इसके अलावा खनन क्षेत्र और परिवहन मार्गों के आसपास हरित क्षेत्र विकसित करने की भी योजना है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष उपाय
परियोजना में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम शामिल किए गए हैं। इनमें शामिल हैं—
- नियमित जल छिड़काव
- वृक्षारोपण अभियान
- धूल और प्रदूषण नियंत्रण तकनीक
- वर्षा जल संचयन प्रणाली
- व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का उपयोग
- खनन क्षेत्र के आसपास हरित पट्टी विकास
इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
लोक सुनवाई में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने परियोजना का समर्थन करते हुए कहा कि यह क्षेत्र के लिए विकास का एक बड़ा अवसर है।
जनपद उपाध्यक्ष ने कहा कि इस परियोजना से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और क्षेत्रीय विकास में तेजी आएगी। वहीं अन्य प्रतिनिधियों ने भी इसे सकारात्मक पहल बताया।
कुछ ग्रामीणों ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि परियोजना से शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा।
सरकारी और प्रशासनिक भूमिका
प्रशासनिक अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि लोक सुनवाई पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप सम्पन्न हो। सभी ग्रामीणों की बातों को गंभीरता से सुना गया और उन्हें रिकॉर्ड में शामिल किया गया।
प्रशासन का कहना है कि परियोजना से जुड़े सभी निर्णय पर्यावरणीय मानकों और स्थानीय हितों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।
संभावित चुनौतियां और संतुलन की आवश्यकता
हालांकि परियोजना के कई आर्थिक लाभ सामने आ रहे हैं, लेकिन पर्यावरण और सामाजिक संतुलन बनाए रखना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि खनन परियोजनाओं में दीर्घकालिक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए सतत विकास मॉडल अपनाना आवश्यक है।
इसलिए परियोजना के संचालन में पारदर्शिता और निगरानी बेहद जरूरी होगी।
निष्कर्ष
लामाटोला भूमिगत कोयला खदान परियोजना की लोक सुनवाई का सफल आयोजन इस बात का संकेत है कि परियोजना अब आगे की पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया की ओर बढ़ रही है।
ग्रामीणों के व्यापक समर्थन और प्रशासनिक तैयारी के बीच यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले वर्षों में इसके क्रियान्वयन और पर्यावरणीय संतुलन पर निर्भर करेगा।
