कुसाधुओं के खिलाफ FIR को लेकर जैन समाज के सदस्य हार्दिक हुंडिया ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर गलत कार्य करने वालों का विरोध करने वालों पर झूठी FIR दर्ज होना चिंता का विषय है। पढ़ें पूरी खबर।
कुसाधुओं के खिलाफ FIR: हार्दिक हुंडिया ने उठाए गंभीर सवाल, कहा- झूठी शिकायतों पर भी हो सख्त कार्रवाई
इंदौर। कुसाधुओं के खिलाफ FIR को लेकर जैन समाज के सदस्य एवं कल्याणी मित्र हार्दिक हुंडिया ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि साधु वेश में धर्म के नाम पर गलत कार्य करने वाले लोगों के खिलाफ कोई व्यक्ति आवाज़ उठाता है या सोशल मीडिया के माध्यम से समाज को उनकी कथित गतिविधियों की जानकारी देता है, तो ऐसे लोगों के समर्थकों द्वारा उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे सत्य की आवाज़ को दबाने की कोशिश बताया।
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि समाज को जागरूक करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। यदि कोई व्यक्ति साधु वेश धारण कर अनुचित कार्य करता है तो उसकी जानकारी समाज के सामने आना आवश्यक है। उनके अनुसार, ऐसे मामलों को उजागर करने वाले लोगों को प्रताड़ित करने के बजाय तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक जैन अनुयायी द्वारा यह कथित रूप से कहा गया कि “कुछ लोग प्रतिक्रमण के बाद शराब पीते हैं”, जिसके बाद दूसरे पक्ष ने धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज करा दी। हार्दिक हुंडिया का कहना है कि पुलिस को केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी जांच करनी चाहिए कि ऐसा बयान किन परिस्थितियों में दिया गया और क्या उसके पीछे कोई तथ्य मौजूद हैं।
उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने समाज के भीतर चल रही किसी कथित अनियमितता की ओर संकेत किया है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि कहीं शिकायत व्यक्तिगत द्वेष या प्रतिशोध की भावना से तो नहीं की गई है।
हार्दिक हुंडिया ने आरोप लगाया कि समाज में ऐसे कई लोग हैं जो साधु वेश में रहकर गलत गतिविधियां करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बजाय उन लोगों पर कार्रवाई की जाती है जो इन मुद्दों को सार्वजनिक करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में धर्म और समाज की रक्षा करनी है तो गलत कार्य करने वालों के खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने भारतीय दंड संहिता के स्थान पर लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं पूर्व में प्रचलित धारा 295A का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक भावनाएं भड़काने संबंधी प्रावधानों का उपयोग सोच-समझकर होना चाहिए। उनके अनुसार यदि समाज का ही कोई सदस्य समाज के भीतर कथित गलत गतिविधियों के प्रति लोगों को सावधान करता है, तो हर मामले को धार्मिक भावना भड़काने की श्रेणी में रखना उचित नहीं माना जा सकता।
हार्दिक हुंडिया ने सरकार से मांग की कि धार्मिक भावना से जुड़े कानूनी प्रावधानों का कथित दुरुपयोग कर झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत दर्ज कराने वालों की भी जांच हो तथा यदि शिकायत निराधार पाई जाए तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर समाज को भ्रमित करने वाले कथित कुसाधुओं और उनकी गलत गतिविधियों का समर्थन करने वालों के खिलाफ भी निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि कानून का उद्देश्य सत्य को सामने लाना और न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि किसी भी पक्ष को बिना जांच के परेशान करना।
हालांकि, इस पूरे मामले में जिन व्यक्तियों या पक्षों का उल्लेख किया गया है, उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि संबंधित पक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
हार्दिक हुंडिया (कल्याणी मित्र)
