कुक्षी स्वामिनारायण मंदिर युवा शिविर में आत्मस्वरूप स्वामी ने युवाओं को व्यसन मुक्ति, तिलक, कंठी और जिम्मेदारी का महत्व समझाया। विजेता बच्चों को पुरस्कार देकर शिविर का समापन हुआ।
कुक्षी में युवा शिविर: व्यसन मुक्ति और संस्कारों का संदेश, आत्मस्वरूप स्वामी ने युवाओं को बताए जीवन के 4 सूत्र
ढोलेरा धाम द्विशताब्दी महोत्सव के अंतर्गत स्वामिनारायण मंदिर में आयोजन, तिलक-कंठी और जिम्मेदारी का बताया महत्व
रिपोर्ट: नरेन्द्र सिरवी
कुक्षी। श्री स्वामिनारायण मंदिर वडताल संस्था, बाग रोड कुक्षी में ढोलेरा धाम द्विशताब्दी महोत्सव के अंतर्गत युवा शिविर का आयोजन किया गया। कुक्षी स्वामिनारायण मंदिर युवा शिविर में युवाओं को व्यसन से मुक्ति, ललाट पर तिलक लगाने, गले में कंठी धारण करने और जीवन में जिम्मेदारी का महत्व समझाया गया।
शिविर के मुख्य वक्ता आत्मस्वरूप स्वामी जी ने युवाओं से संवाद करते हुए शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों से डिग्रियां प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन परिवार, समाज और राष्ट्र को सही दिशा देने वाले संस्कार संतों के सानिध्य तथा माता-पिता के मार्गदर्शन से प्राप्त होते हैं।
‘डिग्रियां अर्जित कर लेना ही पर्याप्त नहीं’
आत्मस्वरूप स्वामी जी ने कहा कि व्यक्ति कितनी भी डिग्रियां अर्जित कर ले, लेकिन जब तक वह माता-पिता की बात और संतों के सानिध्य के महत्व को नहीं समझता, तब तक जीवन में संस्कारों की प्राप्ति अधूरी रहती है।
उन्होंने वर्तमान समय में युवाओं की बदलती जीवनशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे लेकर परिवार, समाज और संतों द्वारा चिंता व्यक्त की जा रही है। युवाओं को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़े रहने की आवश्यकता है।
युवाओं को बताया तिलक लगाने का महत्व
आत्मस्वरूप स्वामी जी ने कहा कि पूर्व में बुजुर्ग प्रतिदिन ललाट पर तिलक लगाते थे, लेकिन आज कई युवा तिलक लगाने में संकोच महसूस करते हैं।
उन्होंने धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि तिलक जीवन में पवित्रता और ईश्वर के प्रति आस्था का प्रतीक है। जिस प्रकार विवाहित स्त्री के लिए मंगलसूत्र और सिंदूर की धार्मिक-सामाजिक पहचान है, उसी प्रकार सनातन परंपरा में पुरुष के ललाट पर तिलक को धार्मिक पहचान के रूप में देखा जाता है।
कंठी धारण करने की विधि और धार्मिक महत्व बताया
शिविर में युवाओं को कंठी धारण करने की धार्मिक विधि भी बताई गई। स्वामी जी ने कहा कि कंठी को भगवान के चरणों में रखकर संतों के मंत्रोच्चार के साथ धारण करना चाहिए और वह भगवान की प्रसादी के रूप में होनी चाहिए।
उन्होंने कंठी धारण करने से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के बारे में भी युवाओं को जानकारी दी।
जिम्मेदार व्यक्ति में होने चाहिए ये गुण
युवा शिविर में जीवन की जिम्मेदारियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। आत्मस्वरूप स्वामी जी ने कहा कि एक जिम्मेदार व्यक्ति के भीतर ईमानदारी, समर्पण, जवाबदेही, सहयोग की भावना और निर्णय लेने की क्षमता जैसे गुण होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि इन गुणों को जीवन में अपनाने वाला व्यक्ति अपने परिवार और समाज के साथ राष्ट्र के विकास में भी सकारात्मक योगदान दे सकता है।
शास्त्री स्वामी सूर्यप्रकाशदासजी ने युवाओं से किया संवाद
शिविर के समापन अवसर पर मंदिर के कोठारी शास्त्री स्वामी सूर्यप्रकाशदासजी स्वामी ने उपस्थित युवाओं से प्रश्नों के माध्यम से संवाद किया और उनकी जिज्ञासाओं को परखा।
उन्होंने युवाओं को जिज्ञासु बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि जिज्ञासा और सही ज्ञान व्यक्ति को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाते हैं। युवाओं को श्रेष्ठ नागरिक बनकर राष्ट्र के विकास में योगदान देना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में विभिन्न गतिविधियों में विजेता रहे बच्चों को पुरस्कार वितरित किए गए और इसके साथ युवा शिविर का समापन हुआ।
कार्यक्रम की जानकारी मंदिर समिति के घनश्याम भाई पाटीदार सिलकुआ वाले द्वारा प्रदान की गई।

