—Advertisement—

कुक्षी में बारिश की बेरुखी से किसान परेशान, सोयाबीन-कपास-मक्का पर संकट

Author Picture
Published On: 31 August 2026
06bf08a3 77c7 4be3 8ef6 5deb49fa3c5c

—Advertisement—

धार जिले की कुक्षी तहसील में कम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ी। कापसी नदी और जलस्रोत सूखने लगे हैं, जबकि सोयाबीन, कपास और मक्का की फसल पर असर पड़ रहा है

कुक्षी में कम बारिश से गंभीर संकट: जिले में सबसे कम वर्षा, किसानों ने सूखा घोषित करने की उठाई मांग

रिपोर्ट: नरेन्द्र सिरवी
लोकेशन: कुक्षी, धार

Focus Keyword: कुक्षी में कम बारिश

कुक्षी में कम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के कई जिलों में लगातार भारी बारिश हो रही है, लेकिन धार जिले के निमाड़ क्षेत्र की कुक्षी तहसील में मानसून की बेरुखी देखने को मिल रही है। पूरा श्रावण माह सूखा निकलने के बाद भादों की शुरुआत में भी पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसलों पर बुरा असर पड़ने लगा है।

धार जिले में सबसे कम वर्षा कुक्षी तहसील के कुक्षी, निसरपुर और डही क्षेत्र में हुई है। क्षेत्र के किसानों को अभी तक हल्की एवं रिमझिम बारिश से ही संतुष्ट होना पड़ा है। लगातार कम बारिश के कारण किसानों को अब क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बनने की चिंता सता रही है।

कुक्षी में कम बारिश का सोयाबीन, कपास और मक्का पर गहरा असर

कुक्षी तहसील में सामान्य वर्षा के मुकाबले काफी कम बारिश दर्ज की गई है। 13 अगस्त तक मात्र 181 एमएम बारिश दर्ज हुई थी। इसके बाद भी केवल हल्की बारिश हुई। मानसून का पूरा अगस्त बीत जाने के बाद भी अच्छी वर्षा नहीं होने से क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।

ग्राम कापसी के किसान तेजालाल गेहलोत, अंतिम राठौर और शंकरलाल सिर्वी ने बताया कि शुरू से ही कम बारिश होने के कारण फसलों की बढ़वार रुक गई है।

क्षेत्र में मक्का, कपास और सोयाबीन मुख्य फसलें हैं। अच्छी बारिश नहीं होने के कारण फसलें मुरझाने लगी हैं। हल्की जमीन वाले कई किसानों की फसल सूख चुकी है और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

खाद, बीज और दवाई का खर्च निकल पाना भी मुश्किल

एक ओर कुक्षी में कम बारिश से किसान चिंतित हैं, वहीं दूसरी ओर पिछले दो दिनों से तेज धूप ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी है। अब किसानों के लिए महंगे खाद, बीज और दवाइयों पर किया गया खर्च निकाल पाना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है।

किसान ओंकार लाल कोटवाल और हीराचंद मुकाती (सीरवी) ने बताया कि शुरुआत में दो बार बोवनी करने के बाद फसल तैयार हुई थी, लेकिन बारिश की लंबी खेंच के कारण सोयाबीन की फसल के फूल एवं फल पर बुरा असर पड़ रहा है।

कई जगह कपास की फसल पीली पड़ गई है, जबकि सोयाबीन की फसल मुरझा रही है। समय पर बारिश नहीं होने से उत्पादन पर बड़ा प्रभाव पड़ने की आशंका है। किसान अब भी बारिश की उम्मीद में आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।

किसानों ने कुक्षी क्षेत्र को सूखा घोषित करने की मांग की

लगातार बिगड़ रहे हालात को देखते हुए किसानों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से क्षेत्र को सूखा घोषित करने और किसानों का कर्ज माफ करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों से लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।

कुएं, ट्यूबवेल और नदियां रीतीं

जिन किसानों ने बारिश नहीं होने के बावजूद किसी तरह अपने कुओं से फसलों को सिंचित कर रखा था, उनकी मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। कुएं एवं अन्य जलस्रोत सूखने लगे हैं। पर्याप्त पानी नहीं होने से फसलों की बढ़वार रुक गई है।

क्षेत्र की प्रमुख कापसी नदी, जिससे सैकड़ों किसानों की आस बंधी हुई थी, वह भी सूख गई है। कापसी नदी में पानी नहीं होने से आने वाले दिनों में पशुओं के लिए भी पानी की गंभीर समस्या पैदा होने की आशंका है।

खरीफ के साथ रबी की फसल पर भी पड़ सकता है असर

कुक्षी में कम बारिश का संकट केवल वर्तमान खरीफ फसलों तक सीमित नहीं रह सकता। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण भूमिगत जलस्तर और जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। ऐसे में आने वाले रबी सीजन में सिंचाई के लिए भी किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सोयाबीन, कपास और मक्का की फसलों को बचाने के लिए किसान अब अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खरीफ के साथ-साथ रबी की फसल पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp