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कुक्षी में श्रीमद्भागवत कथा का पांचवां दिन: पुतना वध प्रसंग ने दिया बच्चों की सुरक्षा का संदेश

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Published On: 10 August 2026
Bhagwat Katha at Shri Swaminarayan Temple in Kukshi, featuring speaker Satyaprakashdas Ji narrating Lord Krishna’s Putana Vadh story and sharing a message on child safety
— Bhagwat Katha at Shri Swaminarayan Temple in Kukshi, featuring speaker Satyaprakashdas Ji narrating Lord Krishna’s Putana Vadh story and sharing a message on child safety

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कुक्षी में श्रीमद्भागवत कथा का पांचवां दिन: पुतना वध प्रसंग ने दिया बच्चों की सुरक्षा का संदेश

रिपोर्ट: नरेन्द्र सिरवी

कुक्षी। नगर के समीप बाग रोड स्थित श्री स्वामिनारायण मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, नंद बाबा की गोकुल के प्रति चिंता और पुतना वध का प्रसंग श्रद्धालुओं के बीच प्रमुख आकर्षण रहा। व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए वक्ता सत्यप्रकाशदास जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया और उनके माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन में सतर्कता, धर्म और अपने परिवार की जिम्मेदारी का संदेश दिया।

कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। धार्मिक प्रसंगों के बीच वक्ता ने वर्तमान समय में माता-पिता को बच्चों की सुरक्षा को लेकर सजग रहने की भी बात कही।

कंस के षड्यंत्र और भगवान कृष्ण के प्राकट्य का वर्णन

कथा के पांचवें दिन वक्ता सत्यप्रकाशदास जी ने भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद कंस के मन में उत्पन्न भय और उसके द्वारा किए गए षड्यंत्रों का विस्तार से वर्णन किया।

उन्होंने कथा प्रसंग के माध्यम से बताया कि भगवान के प्राकट्य के बाद कंस को इस बात का पता चलता है कि उसका वध करने वाला इस धरती पर जन्म ले चुका है। इस सूचना के बाद कंस भयभीत हो जाता है और भगवान श्रीकृष्ण को खोजने तथा उन्हें समाप्त करने के लिए विभिन्न उपाय करने लगता है।

वक्ता ने कहा कि कंस के स्वभाव में षड्यंत्र और छल प्रमुख था। उसके मन में लगातार भगवान कृष्ण को लेकर भय बना हुआ था। इसी क्रम में पुतना का प्रसंग सामने आता है, जिसे कंस भगवान कृष्ण को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से गोकुल भेजता है।

पुतना ने बच्चों को नुकसान पहुंचाने की कही बात

कथा के अनुसार कंस अपनी बहन पुतना को राजमहल में बुलाकर भगवान कृष्ण के बारे में जानकारी देता है। पुतना कंस को आश्वस्त करती है कि उसे चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और वह अपनी मायावी शक्ति का उपयोग कर गोकुल सहित आसपास के क्षेत्रों में जन्मे बच्चों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेगी।

कथा वाचन के दौरान इस प्रसंग को भगवान कृष्ण की दिव्य शक्ति और उनकी बाल लीला से जोड़कर समझाया गया। वक्ता ने बताया कि पुतना अपने वास्तविक स्वरूप को छिपाकर गोकुल पहुंचती है और भगवान कृष्ण को अपने मायावी रूप से भ्रमित करने का प्रयास करती है।

नंद बाबा को हमेशा रहती थी गोकुल की चिंता

कथा में नंद बाबा के चरित्र और गोकुल के प्रति उनकी जिम्मेदारी का भी वर्णन किया गया। वक्ता सत्यप्रकाशदास जी ने बताया कि नंद बाबा को गोकुल और वहां रहने वाले लोगों की हमेशा चिंता रहती थी।

कथा प्रसंग के अनुसार नंद बाबा जब मथुरा की ओर जाते हैं तो गोकुल की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने ग्वाल-बाल मित्रों को सौंपते हैं। वे उनसे कहते हैं कि लाला के जन्म के बाद से गोकुल पर खतरा मंडरा रहा है, इसलिए सभी लोग मिलकर गांव की रक्षा करें।

नंद बाबा इसके बाद वासुदेव जी से मिलने मथुरा पहुंचते हैं। कथा में दोनों के बीच हुई मुलाकात और भगवान कृष्ण के जन्म के बाद गोकुल में छाई खुशियों का भावपूर्ण वर्णन किया गया।

गोकुल में कृष्ण के जन्म से छाई खुशियां

वक्ता ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद गोकुल में उत्सव जैसा वातावरण बन गया था। गांव के लोग बाल कृष्ण को देखने के लिए नंद बाबा के घर पहुंचते और उनके बाल स्वरूप का दर्शन कर स्नेह और आशीर्वाद देते थे।

कथा में नंद बाबा और वासुदेव जी के संवाद के माध्यम से यह बताया गया कि दोनों परिवारों के बीच प्रेम, विश्वास और आत्मीयता का भाव था। भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का वर्णन सुनकर कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।

मायावी रूप में गोकुल पहुंची पुतना

कथा के अगले प्रसंग में पुतना के गोकुल पहुंचने और भगवान कृष्ण के समीप जाने का वर्णन किया गया। कथा के अनुसार पुतना ने अपना वास्तविक रूप छिपाकर स्वयं को आकर्षक महिला के रूप में प्रस्तुत किया।

वह माता यशोदा के पास पहुंची और बाल कृष्ण को दुलार करने की इच्छा जताई। कथा प्रसंग के अनुसार यशोदा को पुतना के वास्तविक उद्देश्य की जानकारी नहीं थी। इसी का लाभ उठाकर पुतना बाल कृष्ण को अपने पास ले गई।

इसके बाद उसने भगवान कृष्ण को अपना विषैला स्तनपान कराने का प्रयास किया। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसके मायावी स्वरूप को पहचान लिया और उसकी शक्ति को समाप्त कर दिया। कथा वाचक ने इस प्रसंग को भगवान की दिव्य शक्ति और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बताया।

पुतना वध से दिया गया विशेष संदेश

वक्ता सत्यप्रकाशदास जी ने पुतना वध प्रसंग को वर्तमान जीवन से जोड़ते हुए कहा कि धार्मिक कथाएं केवल मनोरंजन या परंपरा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनसे जीवन के लिए महत्वपूर्ण संदेश भी प्राप्त होते हैं।

उन्होंने माता-पिता से बच्चों की सुरक्षा और उनकी गतिविधियों को लेकर सजग रहने का आह्वान किया। पुतना के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि माता-पिता को बच्चों की सुरक्षा के प्रति किसी भी स्थिति में लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने वर्तमान समय में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने की बात कही और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों के आसपास के लोगों तथा परिस्थितियों को लेकर जागरूक रहें। कथा में बच्चों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता को धार्मिक प्रसंग के साथ जोड़कर समझाया गया।

भाजपा जिला अध्यक्ष चंचल पाटीदार भी पहुंचे

कथा के पांचवें दिन भाजपा जिला अध्यक्ष चंचल पाटीदार भी कार्यक्रम में पहुंचे। बताया गया कि वे अपने जन्मदिन के अवसर पर संतों का आशीर्वाद प्राप्त करने और श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने के लिए मंदिर पहुंचे थे।

इस दौरान उन्होंने संतों का आशीर्वाद लिया और कथा का श्रवण किया। धार्मिक आयोजन में उनकी उपस्थिति भी चर्चा का विषय रही।

विभिन्न परिवारों ने संभाली यजमान की जिम्मेदारी

पांचवें दिन कथा आयोजन के दौरान विभिन्न धार्मिक सेवाओं के लिए श्रद्धालु परिवारों ने यजमान के रूप में अपनी भूमिका निभाई।

भगवान के झूले के यजमान श्री संजय गोकुल जी कालसरा परिवार रहे। वहीं महाप्रसादी की व्यवस्था के यजमान श्री मोहन (अंकल) सुखलाल जी जिराती परिवार रहे।

इसके अलावा चाय प्रसादी की सेवा श्री सुखदेव भिक्या जी गंगाजलिया परिवार द्वारा की गई। श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में अपनी सहभागिता दर्ज कराते हुए सेवा कार्य में योगदान दिया।

संतों के सान्निध्य में हुआ कथा का संचालन

कथा के पांचवें दिन का संचालन शा. स्वामी श्री सूर्यप्रकाशदास द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक कथा का श्रवण किया और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े प्रसंगों का आनंद लिया।

कथा से संबंधित जानकारी मुकुंद स्वामी जी द्वारा प्रदान की गई। आयोजकों की ओर से श्रद्धालुओं से कथा के आगामी प्रसंगों में भी अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया गया।

कथा में धर्म के साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश

कुक्षी के श्री स्वामिनारायण मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में धार्मिक प्रसंगों के साथ सामाजिक जीवन से जुड़े संदेश भी श्रद्धालुओं तक पहुंचाए जा रहे हैं। पांचवें दिन पुतना वध प्रसंग के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बच्चों की सुरक्षा और अभिभावकों की जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया गया।

कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और धार्मिक वातावरण में कथा का श्रवण किया। आयोजन में संतों, श्रद्धालुओं और विभिन्न परिवारों की सहभागिता से कार्यक्रम भक्तिमय बना रहा।

 

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