Manawar के जुलवानिया में कृषि विज्ञान केंद्र ने आयोजित किया प्रक्षेत्र दिवस
किसानों को JS 2172 सोयाबीन किस्म की दी जानकारी, संतुलित उर्वरक और जैविक खाद के उपयोग पर जोर
Manawar । कृषि विज्ञान केंद्र मनावर की ओर से 24 सितंबर 2026 को विकासखंड मनावर के ग्राम जुलवानिया में क्लस्टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन तिलहन के अंतर्गत प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एएल बसेड़िया के मार्गदर्शन में हुआ। इसमें कृषि वैज्ञानिक डॉ. डीके सूर्यवंशी, डॉ. नरेश गुप्ता और वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डीआर चौहान मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को सोयाबीन की उन्नत किस्म JS 2172 की विशेषताओं, उत्पादन क्षमता और फसल प्रबंधन की जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिक डॉ. सूर्यवंशी ने बताया कि JS 2172 मध्यम अवधि की किस्म है, जो करीब 95 से 100 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। अनुकूल परिस्थितियों में इससे 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिलने की जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया कि इस किस्म में रोयेदार फली होने के कारण कीटों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना रहती है। इसके पौधे मध्यम ऊंचाई वाले, मजबूत तने और अच्छी शाखाओं वाले होते हैं। इसके कारण तेज हवा की स्थिति में भी पौधों के बेहतर टिके रहने की क्षमता बताई गई। फसल पकने के बाद फलियों के चटकने की समस्या कम होने से कटाई में देरी होने पर दाने झड़ने का जोखिम भी कम रहता है।
डॉ. सूर्यवंशी ने बताया कि JS 2172 में येलो मोजेक वायरस, चारकोल रॉट और फली झुलसा जैसे प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बताई गई है।
मिट्टी के स्वास्थ्य पर दिया जोर
केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. नरेश गुप्ता ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक खादों के उपयोग की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आवश्यकता से अधिक रासायनिक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी में कार्बन की मात्रा प्रभावित हो सकती है, जिसका असर मिट्टी की जैविक संरचना पर पड़ता है। उन्होंने संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने और मिट्टी के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि JS 2172 किस्म बदलते मौसम, सूखे और लगातार बारिश जैसी परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम बताई जाती है।
किसान सारथी एप की दी जानकारी
वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डीआर चौहान ने किसानों को किसान सारथी एप के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसान एंड्रॉयड मोबाइल पर एप इंस्टॉल कर सीधे कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क कर खेत से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026 के तहत किसानों को गांव और खेतों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में ग्राम के प्रगतिशील किसान करण सिंह का विशेष योगदान रहा।
