आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र चरणतीर्थ पावन धाम में 20 जुलाई को गुरुपूर्णिमा महोत्सव
संवाददाता :अभिषेक द्विवेदी
जगद्गुरु श्री रामलला आचार्य जी महाराज के सान्निध्य में होगा भव्य धार्मिक आयोजन
कोतमा। आध्यात्मिक आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले चरणतीर्थ पावन धाम, ग्राम मुसवा झोरखी, ग्राम पंचायत रेउसा में आगामी 20 जुलाई को गुरुपूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन का शुभारंभ प्रातः 10 बजे से होगा।
गुरुपूर्णिमा महोत्सव का आयोजन श्री मानसपीठ खजुरीताल, मैहर के पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्री रामलला आचार्य जी महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा। आयोजन को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
700 वर्ष प्राचीन पावन पादुकाओं के पूजन का मिलेगा अवसर
गुरुपूर्णिमा महोत्सव का मुख्य आकर्षण जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य भगवान की लगभग 700 वर्ष प्राचीन पावन पादुकाओं का पूजन रहेगा। श्रद्धालुओं को इस दुर्लभ अवसर का लाभ प्राप्त होगा।
कार्यक्रम में श्री सद्गुरु पूजन, जगद्गुरु महाराज के आशीर्वचन, भजन संध्या और विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालु गुरु कृपा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करेंगे।
हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना
चरणतीर्थ पावन धाम के व्यवस्थापक श्री सीताराम दास जी ने क्षेत्रवासियों और समस्त श्रद्धालुओं से गुरुपूर्णिमा महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से श्री मानसपीठ परिवार के हजारों श्रद्धालुओं के इस महोत्सव में पहुंचने की संभावना है। आयोजन को सफल बनाने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
भगवान श्रीराम की वनवास लीला से जुड़ा है पावन धाम
चरणतीर्थ पावन धाम को भगवान श्रीराम की वनवास लीला से जुड़ा अत्यंत पवित्र और दिव्य स्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी का इस स्थान पर आगमन हुआ था।
यहां स्थित पवित्र शिला श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि जिस शिला पर भगवान श्रीराम के विराजमान होने की कथा जुड़ी है, वह भीषण गर्मी में भी शीतल बनी रहती है।
पौराणिक धरोहरों से समृद्ध है चरणतीर्थ धाम
चरणतीर्थ पावन धाम परिसर में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के चरण चिह्न, सप्त कुंड के उद्गम स्थल, सीता रसोई, प्राचीन गुफाएं और अन्य पौराणिक धरोहरें मौजूद हैं।
इन धार्मिक स्थलों के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र बना हुआ है। यहां आने वाले भक्त शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति करते हैं।

दिव्य घटनाओं से जुड़ी हैं स्थानीय मान्यताएं
स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार इस क्षेत्र में समय-समय पर कई दिव्य घटनाओं के अनुभव भी सामने आते रहे हैं। अलौकिक प्रकाश के दर्शन, सप्तबाणों के चिह्न, विद्युत गिरने के निशान और रहस्यमयी गौवंश के दर्शन जैसी मान्यताएं इस स्थान की धार्मिक आस्था को और मजबूत करती हैं।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि चरणतीर्थ पावन धाम में आने से आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
भक्ति और आस्था का बनेगा संगम
20 जुलाई को आयोजित होने वाला गुरुपूर्णिमा महोत्सव चरणतीर्थ पावन धाम में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गुरु भक्ति को समर्पित इस आयोजन में सद्गुरु पूजन, आशीर्वचन, भजन संध्या और विशाल भंडारे जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
गुरुपूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति सम्मान, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। चरणतीर्थ पावन धाम में आयोजित होने वाला यह महोत्सव श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव प्रदान करेगा। जगद्गुरु श्री रामलला आचार्य जी महाराज के सान्निध्य में होने वाले इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का वातावरण है।
आयोजकों ने बताया कि महोत्सव में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि सभी भक्त सुगमता से धार्मिक कार्यक्रमों में भाग ले सकें। उन्होंने क्षेत्रवासियों सहित दूर-दराज से आने वाले सभी श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचकर गुरु पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बनने और इस पावन अवसर का पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है।
