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Kharmas समाप्त, 14 अप्रैल से फिर गूंजेंगी शहनाइयां: जानें अप्रैल से जुलाई तक के विवाह मुहूर्त और ज्योतिषीय महत्व

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Published On: 13 April 2026
Kharmas

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Kharmas समाप्त, 14 अप्रैल से फिर शुरू होंगे शुभ कार्य और विवाह मुहूर्त

बीते लगभग एक महीने से चल रहा खरमास 14 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। हिन्दू पंचांग और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार Kharmas का समय शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। अब 14 अप्रैल को सूर्य के अपनी उच्च राशि में प्रवेश करने के साथ ही यह अवधि समाप्त हो जाएगी और एक बार फिर शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी।

जैसे ही खरमास समाप्त होगा, समाज में विवाह और मांगलिक कार्यों की रौनक लौट आएगी। बाजारों में खरीदारी बढ़ेगी, शादी-ब्याह की तैयारियां तेज होंगी और पूरे देश में फिर से शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगेगी।

Kharmas क्या होता है और क्यों माने जाते हैं शुभ कार्य वर्जित?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब उनका प्रभाव अपेक्षाकृत कमजोर माना जाता है। इस अवधि को खरमास कहा जाता है। माना जाता है कि इस समय सूर्य का तेज कम हो जाता है, जिसके कारण किसी भी शुभ कार्य का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

इसी कारण से हिन्दू परंपरा में खरमास के दौरान विवाह जैसे मांगलिक कार्यों को स्थगित कर दिया जाता है। इस अवधि में केवल धार्मिक कार्य, दान-पुण्य, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक साधना को ही श्रेष्ठ माना जाता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार खरमास की शुरुआत 13 मार्च 2026 से हुई थी और यह 14 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है।

14 अप्रैल से फिर शुरू होंगे शुभ कार्य

14 अप्रैल 2026 को सूर्य के अपनी उच्च राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा। इसके बाद से सभी प्रकार के शुभ कार्य पुनः शुरू किए जा सकेंगे।

इस बदलाव के साथ ही विवाह सीजन की औपचारिक शुरुआत भी मानी जाती है। कई परिवार जो लंबे समय से विवाह की प्रतीक्षा कर रहे थे, अब अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट जाएंगे।

अप्रैल में अक्षय तृतीया से शुरू होगा विवाह सीजन

ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार इस वर्ष विवाह के शुभ मुहूर्तों की शुरुआत 20 अप्रैल 2026 से होगी। यह दिन अक्षय तृतीया का है, जिसे हिन्दू धर्म में अत्यंत शुभ तिथि माना जाता है।

अक्षय तृतीया के दिन किए गए कार्यों का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला माना जाता है। इसी कारण इस दिन विवाह करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

अप्रैल महीने में कुल 5 प्रमुख विवाह मुहूर्त बताए गए हैं, जिनमें 20, 21, 27, 28 और 29 अप्रैल शामिल हैं। इन दिनों में बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होने की संभावना है।

मई में विवाह के 7 शुभ मुहूर्त, फिर लगेगा विराम

मई 2026 में विवाह के कुल 7 शुभ मुहूर्त रहेंगे। इस दौरान देशभर में विवाह समारोहों की धूम रहने की संभावना है।

हालांकि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 17 मई 2026 से पुरुषोत्तम मास प्रारंभ हो जाएगा। इसे अधिक मास या मलमास भी कहा जाता है, जिसे धार्मिक दृष्टि से शुभ कार्यों के लिए अनुपयुक्त माना जाता है।

इस कारण मई के मध्य से विवाह कार्यों पर लगभग एक महीने का विराम लग जाएगा। इस अवधि में लोग केवल धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और तीर्थ यात्रा को प्राथमिकता देते हैं।

पुरुषोत्तम मास का धार्मिक महत्व

पुरुषोत्तम मास को हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है, लेकिन इस दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत नहीं की जाती।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह समय आत्मचिंतन, साधना और ईश्वर आराधना के लिए सर्वोत्तम होता है। इसी कारण इस पूरे एक महीने को शांत और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए समर्पित किया जाता है।

जून में फिर लौटेगा विवाह का शुभ समय

पुरुषोत्तम मास समाप्त होने के बाद जून 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त पुनः शुरू हो जाएंगे।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जून महीने में 21, 27, 28 और 29 तारीखों को विवाह के प्रमुख मुहूर्त रहेंगे। इन दिनों को विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

जून में फिर से शादी-ब्याह का माहौल बन जाएगा और विवाह स्थलों, होटल्स, मैरिज गार्डन और बाजारों में रौनक बढ़ जाएगी।

जुलाई में सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश और विवाह पर रोक

ज्योतिषीय गणना के अनुसार जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करता है, तब शुभ कार्यों पर पुनः रोक लग जाती है।

14 जुलाई 2026 को सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके बाद विवाह जैसे मांगलिक कार्यों को शुभ नहीं माना जाएगा।

हालांकि जुलाई महीने में 1, 7 और 8 तारीख को अंतिम विवाह मुहूर्त बताए गए हैं, जिसके बाद एक बार फिर विवाह कार्यों पर विराम लग जाएगा।

विवाह मुहूर्त का सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव

भारत में विवाह केवल एक सामाजिक अनुबंध नहीं बल्कि एक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा भी है। यही कारण है कि विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है।

शुभ तिथियों के आधार पर ही लाखों परिवार अपनी शादियों की योजना बनाते हैं। इससे न केवल धार्मिक आस्था जुड़ी होती है, बल्कि सामाजिक व्यवस्था और परंपरा भी मजबूत होती है।

विवाह मुहूर्तों के आधार पर बाजारों में भी भारी हलचल देखी जाती है। कपड़े, आभूषण, होटल बुकिंग और अन्य सेवाओं में तेजी आ जाती है।

ज्योतिषाचार्य की राय

ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार इस वर्ष विवाह के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं। खरमास समाप्त होने के बाद विवाह सीजन की शुरुआत एक सकारात्मक संकेत है।

उनके अनुसार, अक्षय तृतीया से शुरू होकर मई और जून तक विवाह के अच्छे अवसर रहेंगे। हालांकि बीच-बीच में पुरुषोत्तम मास और सूर्य गोचर के कारण कुछ समय के लिए विराम रहेगा।

निष्कर्ष

खरमास के समाप्त होने के साथ ही एक बार फिर से शुभ कार्यों और विवाह समारोहों का दौर शुरू होने जा रहा है। 14 अप्रैल 2026 के बाद से समाज में मांगलिक कार्यों की रौनक लौटेगी।

अक्षय तृतीया से शुरू होकर मई और जून तक विवाह सीजन पूरे जोश में रहेगा, जबकि जुलाई में सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश के साथ फिर से विराम लगेगा।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह पूरा काल विवाह और धार्मिक परंपराओं के संतुलन का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिसमें आस्था और परंपरा दोनों का विशेष महत्व है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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