Khargone में 150 तोतों की अचानक मौत: फूड पॉइजनिंग की आशंका
Khargone जिले के बड़वाह क्षेत्र में पिछले 72 घंटों में लगभग 150 तोतों की अचानक मौत ने वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। घटना नर्मदा नदी के किनारे हुई, जहां स्थानीय लोगों द्वारा पक्षियों को खिलाए गए भोजन और गलत खान-पान को मौत का संभावित कारण माना जा रहा है।
जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर बड़वाह के नर्मदा नदी पर बने एक्वाडक्ट पुल के पास यह मामला सामने आया। मौत की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला और पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर पहुंची। मृत तोतों के पोस्टमार्टम और विसरा (Tissue) जांच के लिए नमूने भोपाल और जबलपुर की लैब भेजे गए हैं।
मौत का कारण: फूड पॉइजनिंग या बर्ड फ्लू?
पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डॉ. जीएस सोलंकी ने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच में तोतों की मौत का कारण फूड पॉइजनिंग (विषाक्त भोजन) प्रतीत हो रहा है। उन्होंने बताया कि मामला बर्ड फ्लू या किसी संक्रामक बीमारी से संबंधित नहीं है।
सोलंकी ने कहा कि कुछ पक्षी प्रेमियों ने तोतों को चावल, मिक्चर और अन्य खाद्य सामग्री दी थी, जो उनके पाचन तंत्र के लिए हानिकारक साबित हुई। रेस्क्यू के दौरान कुछ तोते जीवित भी पाए गए, लेकिन फूड पॉइजनिंग का प्रभाव इतना गंभीर था कि कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई।
पुल पर तोते मृत अवस्था में पाए जाने और मृतकों की संख्या इतनी अधिक होने से स्थानीय लोग और प्रशासन दोनों ही चिंतित हैं। विसरा रिपोर्ट आने के बाद मौत का स्पष्ट कारण सामने आएगा।
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बड़वाह में पदस्थ पशु चिकित्सक डॉ. मनीषा चौहान ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान मृत तोतों में फूड पॉइजनिंग के स्पष्ट लक्षण मिले। कई बार लोग पक्षियों को पका हुआ खाना, मसालेदार भोजन या बचा हुआ खाना डाल देते हैं, जो उनके लिए घातक साबित होता है।
पोस्टमार्टम में मृत तोतों के पेट से चावल और छोटे पत्थर/कंकड़ भी मिले। डॉ. चौहान ने कहा कि प्रारंभिक जांच में बर्ड फ्लू या अन्य संक्रामक बीमारियों के कोई लक्षण नहीं पाए गए। उनका मानना है कि यह पूरी तरह खाने में गड़बड़ी और गलत खान-पान का मामला है।
पुल के आसपास खेतों में कीटनाशक छिड़काव के बाद दाने चुगना भी पक्षियों के लिए खतरे का कारण बन सकता है। यही वजह है कि प्रशासन और वन विभाग इस घटना को गंभीरता से ले रहा है और सभी पक्षियों की सुरक्षा के उपाय कर रहा है।
Khargone प्रशासन की कार्रवाई और जांच
कलेक्टर भव्या मित्तल के निर्देश पर पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक जीएस सोलंकी घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने वन विभाग के एसडीओ से भी मोबाइल पर चर्चा की और मृत तोतों के विसरा नमूने जांच के लिए भोपाल और जबलपुर भेजे।
सोलंकी ने कहा कि विसरा रिपोर्ट के बाद ही मौत के पूर्ण कारण की पुष्टि की जा सकेगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन और वन विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
स्थानीय अधिकारियों ने पुल और नदी किनारे साफ-सफाई और सुरक्षित भोजन देने की व्यवस्था करने की भी योजना बनाई है। पशु चिकित्सा विभाग और वन विभाग मिलकर यह प्रयास कर रहे हैं कि पक्षियों को केवल सुरक्षित और स्वच्छ दाना ही दिया जाए।
पक्षी प्रेमियों और विशेषज्ञों की अपील
वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट टोनी शर्मा ने जनता से अपील की है कि पक्षियों को सेवा भाव से भोजन जरूर दें, लेकिन केवल कच्चे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, गेहूं ही डालें। पका हुआ खाना, मसाले या बचा हुआ भोजन पक्षियों के लिए घातक हो सकता है।
स्थानीय पक्षी प्रेमियों ने भी इस घटना के बाद लोगों को सचेत किया है कि गलत भोजन से पक्षियों की मौत हो सकती है और उन्हें केवल सुरक्षित और स्वच्छ दाने ही प्रदान किए जाएं।
इस घटना ने यह साफ कर दिया कि मानव और पक्षियों के बीच सही तालमेल और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। साथ ही यह याद दिलाता है कि पक्षियों को खिलाने के दौरान सही खान-पान और स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है।
निष्कर्ष:
Khargone के बड़वाह में हुई 150 तोतों की अचानक मौत ने वन विभाग, पशु चिकित्सा विभाग और स्थानीय जनता को चिंता में डाल दिया है। प्रारंभिक जांच में फूड पॉइजनिंग को मौत का प्रमुख कारण माना जा रहा है। प्रशासन ने विसरा जांच के लिए नमूने लैब भेजे हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए विशेषज्ञ और प्रशासन मिलकर पक्षियों के लिए सुरक्षित भोजन और साफ-सुथरी जगह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं।
