Khandwa में वन विभाग की टीम पर बड़ा हमला, अतिक्रमण रोकने पहुंची टीम पर ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से किया हमला, 8 वनकर्मी घायल
Khandwa मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में वन विभाग की टीम पर गंभीर हमला होने की घटना सामने आई है। आमा खुजरी जंगल क्षेत्र में अतिक्रमण रोकने गई वन विभाग की स्पेशल फ्लाइंग स्क्वॉड टीम पर सैकड़ों ग्रामीणों ने अचानक हमला कर दिया। इस हिंसक झड़प में 8 वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें कई कर्मचारियों के सिर फट गए और कुछ के कान व शरीर पर गहरी चोटें आई हैं। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है।
जंगल की जमीन पर कब्जे की तैयारी के दौरान पहुंची थी वन टीम
जानकारी के अनुसार, खंडवा के आमा खुजरी वन क्षेत्र में बारिश के बाद ग्रामीण जंगल की जमीन पर खेती करने और फसल बोने की तैयारी कर रहे थे। वन विभाग को इसकी सूचना मिली, जिसके बाद रविवार दोपहर लगभग 12 बजे 40 वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंची।
टीम का उद्देश्य जंगल की जमीन पर हो रहे अतिक्रमण को रोकना था। जैसे ही वनकर्मियों ने ग्रामीणों को समझाने और कार्रवाई शुरू करने का प्रयास किया, स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए।
करीब 400 ग्रामीणों ने किया घेराव
प्रत्यक्षदर्शियों और वन विभाग के कर्मचारियों के अनुसार, करीब 400 ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को चारों ओर से घेर लिया। शुरुआत में बहस और विरोध हुआ, लेकिन कुछ ही समय में मामला हिंसक हो गया।
वनकर्मियों का कहना है कि भीड़ पहले से ही संगठित थी और अचानक हमला करने की योजना जैसी स्थिति दिखाई दी। भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने महिलाओं को आगे कर दिया, जिससे वनकर्मी तत्काल सख्त कार्रवाई नहीं कर सके।
महिलाओं को आगे करके किया गया हमला
वन विभाग के कर्मचारियों का आरोप है कि ग्रामीणों ने रणनीति के तहत महिलाओं को आगे कर दिया, जिससे वनकर्मी किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई करने से हिचकिचाते रहे। इसी दौरान भीड़ में पीछे खड़े लोगों ने अचानक लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला शुरू कर दिया।
गोफन (पत्थर फेंकने वाले औजार) से बड़े-बड़े पत्थर बरसाए गए। कई वनकर्मियों को सिर, हाथ, पैर और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। कुछ कर्मचारियों के सिर पर गहरी चोट लगने से खून बहने लगा, जिससे स्थिति और भयावह हो गई।
8 वनकर्मी गंभीर रूप से घायल
इस हमले में ज्वाला सिंह, रोमांक नायक, शैलेंद्र यादव, राजेंद्र सिंह सक्तावत, राजेंद्र बागड़ी, प्रदीप बघेल, चंद्रपाल तोमर और राहुल लोधी सहित कई वनकर्मी घायल हुए हैं।
ये सभी कर्मचारी वन विभाग की स्पेशल फ्लाइंग स्क्वॉड में शामिल हैं, जिन्हें जंगलों में अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए तैनात किया गया है। घायल कर्मचारियों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
हमले के बाद दो घंटे तक मदद नहीं मिलने का आरोप
घटना के बाद घायल वनकर्मियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्हें समय पर सहायता नहीं मिल सकी। उनका कहना है कि हमले के बाद करीब दो घंटे तक न तो पुलिस मौके पर पहुंची और न ही एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध हो सकी।
इस देरी के कारण घायल कर्मचारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई कर्मचारी जंगल क्षेत्र में ही दर्द से तड़पते रहे। इस लापरवाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मौके पर अफरा-तफरी, वनकर्मियों को पीछे हटना पड़ा
हमले के दौरान स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वन विभाग की टीम को पीछे हटना पड़ा। ग्रामीणों की संख्या अधिक होने और हिंसा बढ़ने के कारण टीम अपनी कार्रवाई पूरी नहीं कर सकी।
घटना स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई वाहन क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है। वनकर्मियों ने किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकलने का प्रयास किया।
वन विभाग ने शुरू की जांच
घटना के बाद वन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। गुड़ी रेंजर नरेंद्र पटेल ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और हमले में शामिल सभी लोगों की पहचान की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति इस घटना में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस प्रशासन पर भी उठे सवाल
इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। वनकर्मियों का आरोप है कि समय पर पुलिस सहायता नहीं मिलने से स्थिति और बिगड़ गई। अगर समय पर पुलिस पहुंचती तो हालात को नियंत्रित किया जा सकता था।
प्रशासनिक स्तर पर इस देरी की जांच की मांग भी उठ रही है।
इलाके में तनाव, सुरक्षा बढ़ाई गई
घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। आसपास के गांवों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
अतिक्रमण और वन भूमि विवाद का पुराना मुद्दा
इस क्षेत्र में जंगल की जमीन पर अतिक्रमण का मामला लंबे समय से चला आ रहा है। स्थानीय ग्रामीण कई बार इसे अपनी खेती योग्य जमीन बताते हैं, जबकि वन विभाग इसे संरक्षित वन भूमि मानता है।
इसी विवाद के चलते समय-समय पर टकराव की स्थिति बनती रही है, लेकिन इस बार मामला हिंसक रूप ले बैठा।
आगे की कार्रवाई
Khandwa वन विभाग ने साफ कर दिया है कि जंगल की जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन अब इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम जल्द ही आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई करेगी। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।
