खंडवा में स्वामित्व योजना के 51 पट्टों पर गड़बड़ी का आरोप, पटवारी राजेश मंडलोई निलंबित
ग्रामीणों और जिला कांग्रेस अध्यक्ष की शिकायत के बाद कलेक्टर ने की कार्रवाई; जमीन के रिकॉर्ड और वास्तविक हकदारों की जांच अहम
खंडवा, 25 सितंबर 2026। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में स्वामित्व भू-अधिकार से जुड़े पट्टों में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने पटवारी राजेश मंडलोई के खिलाफ कलेक्टर से शिकायत की थी। आरोप है कि सरकारी जमीन तथा किसानों के मकानों से जुड़े भू-अधिकार रिकॉर्ड में अनियमितताएं कर 51 पट्टों में नाम दर्ज किए गए। शिकायत के बाद कलेक्टर ने पटवारी को निलंबित कर दिया है।
इस मामले में निलंबन प्रशासनिक कार्रवाई है, जबकि जमीन हड़पने और दस्तावेजों में हेरफेर के आरोपों की जांच जरूरी है। उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि सभी 51 पट्टे एक ही व्यक्ति के नाम दर्ज हुए थे या अलग-अलग प्रविष्टियों में गड़बड़ी की शिकायत की गई है। जांच में प्रत्येक पट्टे और उससे जुड़े रिकॉर्ड की स्थिति सामने आने पर ही पूरे मामले का दायरा स्पष्ट होगा।
अपने और पत्नी के नाम रिकॉर्ड दर्ज कराने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पटवारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कुछ संपत्तियों के रिकॉर्ड अपने और पत्नी के नाम दर्ज कराए। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इनमें सरकारी भूमि और किसानों के मकानों से जुड़े भू-अधिकार भी शामिल हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल रिकॉर्ड में त्रुटि का मामला नहीं होगा; इससे उन लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं जो संबंधित जमीन या मकान के वास्तविक हकदार हैं।
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों और जांच में प्रमाणित तथ्यों को अलग-अलग देखना जरूरी है। संबंधित जमीन का पुराना रिकॉर्ड क्या था, किस आधार पर नया नाम दर्ज हुआ और पट्टे जारी करते समय किन अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की—ये सवाल प्रशासनिक पड़ताल का विषय हैं।
शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
ग्रामीणों और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने मामले की शिकायत कलेक्टर से की। शिकायत सामने आने के बाद पटवारी राजेश मंडलोई को निलंबित किए जाने की जानकारी दी गई है। निलंबन के बाद संबंधित रिकॉर्ड की जांच से यह पता चल सकेगा कि कथित अनियमितता किन भूखंडों और हितग्राहियों से जुड़ी है।
प्रशासन के लिए एक अहम काम उन 51 पट्टों की अलग-अलग जांच करना होगा जिनका उल्लेख शिकायत में किया गया है। हर पट्टे में दर्ज नाम, भूमि या मकान का विवरण और पहले के दस्तावेजों का मिलान होने पर ही यह स्पष्ट होगा कि कहां त्रुटि हुई और उसका असर किस व्यक्ति पर पड़ा। शिकायत में बताए गए नामों को अंतिम सत्य मानना या सभी पट्टों को एक ही तरह की गड़बड़ी बताना अभी जल्दबाजी होगी।
स्वामित्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी क्यों गंभीर है?
मकान या जमीन से जुड़े भू-अधिकार दस्तावेज किसी व्यक्ति के अधिकार के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इनमें गलत नाम दर्ज होने से वास्तविक हितग्राही को अपने दावे के समर्थन में अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ सकते हैं। विवाद की स्थिति में रिकॉर्ड का संशोधन भी समय लेने वाली प्रक्रिया बन सकता है।
खंडवा के इस मामले में शिकायतकर्ताओं का आरोप सीधे उन दस्तावेजों से जुड़ा है जिन पर ग्रामीण अपने अधिकार के लिए भरोसा करते हैं। इसलिए जांच का असर केवल संबंधित पटवारी पर होने वाली विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। यदि रिकॉर्ड में गलती मिलती है, तो प्रभावित लोगों की प्रविष्टियां सुधारना भी उतना ही जरूरी होगा।
जांच में किन सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं?
सबसे पहले यह स्पष्ट होना है कि शिकायत में बताए गए 51 पट्टे किन व्यक्तियों और संपत्तियों से संबंधित हैं। इसके बाद पुराने और नए रिकॉर्ड का मिलान करके यह देखना होगा कि नाम बदलने या पट्टा जारी करने का आधार क्या था। जिन किसानों या ग्रामीणों के मकानों का उल्लेख शिकायत में है, उनका पक्ष भी दर्ज किया जाना चाहिए।
यह भी जांच का विषय है कि रिकॉर्ड तैयार होने से लेकर पट्टा जारी होने तक सत्यापन की जिम्मेदारी किस-किस स्तर पर थी। यदि कहीं दस्तावेजों में गड़बड़ी प्रमाणित होती है, तो प्रशासन को यह तय करना होगा कि संबंधित प्रविष्टि कैसे सुधरेगी और वास्तविक हकदार को सही दस्तावेज कब मिलेगा।
अभी सामने आई जानकारी के अनुसार पटवारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। आरोपों की पुष्टि, 51 पट्टों की वास्तविक स्थिति और प्रभावित लोगों की संख्या जांच के निष्कर्ष के बाद ही स्पष्ट होगी।
