Sadhvishri से खाचरौद चातुर्मास हेतु संघ की ऐतिहासिक और भावपूर्ण विनती
खाचरौद पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के समुदायवर्ती साध्वी श्री शाश्वतप्रिया श्रीजी म.सा. आदि ठाणा 24 फरवरी से खाचरौद स्थित श्री राजेंद्र सूरी पौषधशाला में विराजमान हैं। इस अवसर पर खाचरौद नगर में जैन समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, श्रावक-श्राविकाएँ और परिषद सदस्य उपस्थित रहे और वर्ष 2026 के चातुर्मास हेतु साध्वीश्रीजी से ऐतिहासिक एवं भावपूर्ण विनती की।
प्रवचन और सामाजिक एकता का उत्सव
Sadhvishri के विराजमान होने के अवसर पर आयोजित प्रवचन में सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ के अध्यक्ष माणकलाल जी नांदेचा, वरिष्ठ श्रावक घेवरमल जी नांदेचा, पूर्व संघ अध्यक्ष सुरेश जी मेहता, अनिल जी वागरेचा, देवेन्द्र जी वनवट, हेमंत जी जैन, राजेंद्र जी मालक, परिषद अध्यक्ष पंकज चौहान, राजेश जी सेठिया, राजेश जी वनवट, धर्मचन्द जी नांदेचा, ललित जी नागदा, राजेंद्र जी नागदा, अनिल जी गांधी, अभय जी भारतीय, सुरेश जी छाजेड, राजेश जी सुराणा, पंकज जी डूंगरवाल सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित थीं।
इन सभी ने साध्वीश्रीजी के समक्ष चातुर्मास में खाचरौद नगर में निवास करने के लिए अत्यंत ससम्मान और आदर के साथ विनती की। इस अवसर पर उपस्थित समाजजन भावविभोर थे और सभी ने साध्वीश्रीजी के चातुर्मास प्रवास को ऐतिहासिक महत्व देने की इच्छा व्यक्त की।
Sadhvishri का चातुर्मास प्रवास
Sadhvishri शाश्वतप्रिया श्रीजी म.सा. आदि ठाणा, पुण्यसम्राट की सांसारिक पौत्री और धरू परिवार की कुलदीपिका होने के नाते, जैन समाज में विशेष श्रद्धा और मान्यता रखती हैं। उनकी उपस्थिति से खाचरौद नगर में धार्मिक चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि हुई है। 24 फरवरी से साध्वीश्रीजी श्री राजेंद्र सूरी पौषधशाला में विराजमान होकर अपने प्रवचन और ध्यान कार्यों के माध्यम से श्रावकों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं।
चातुर्मास के दौरान साध्वीश्रीजी का प्रवास केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह समाज में अनुशासन, संयम और एकजुटता का संदेश भी देता है। खाचरौद के जैन समाज ने इस अवसर को अपने लिए विशेष महत्व का बताया है।
ऐतिहासिक और भावपूर्ण विनती
Sadhvishri से चातुर्मास हेतु खाचरौद नगर में पधारने की विनती इस प्रकार की गई कि इसे संघ की ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस मांग को साध्वीश्रीजी ने गौरवपूर्वक स्वीकार किया और समाज के प्रति अपने कर्तव्य और दायित्व को स्वीकार किया।
अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद् के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा के अनुसार, यह विनती केवल एक आध्यात्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जैन समाज में आपसी प्रेम, सहयोग और धार्मिक आदर्शों को जीवंत बनाए रखने का प्रतीक है।
नेमि जयन्तराज विहारधाम उद्घाटन
Sadhvishri 26 फरवरी को खाचरौद से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय करके नेमि जयन्तराज विहारधाम के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लेंगी। इस अवसर पर उन्हें निश्रा प्रदान की जाएगी। निश्रा का कार्यक्रम जैन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और साध्वीश्रीजी की उपस्थिति इसे और अधिक पवित्र और आदर्श बनाती है।
नेमि जयन्तराज विहारधाम का उद्घाटन जैन समाज के लिए आध्यात्मिक महोत्सव के समान है। इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जैन समाज के प्रतिनिधि और श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित होंगे। साध्वीश्रीजी द्वारा निश्रा प्रदान करने से यह कार्यक्रम और भी प्रभावशाली और स्मरणीय बन जाएगा।
समाज और युवा वर्ग में जागरूकता
Sadhvishri का चातुर्मास और विहारधाम उद्घाटन कार्यक्रम केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि समाज और युवा वर्ग में जागरूकता और अनुशासन की भावना को भी बढ़ावा देगा। युवा वर्ग को साध्वीश्रीजी के जीवन और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।
इस अवसर पर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों और परिषदों ने साध्वीश्रीजी की सेवा और सम्मान में विभिन्न सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। प्रवचन, भजन और ध्यान सत्र के माध्यम से उपस्थित श्रावकों को धार्मिक और नैतिक शिक्षा दी गई।
निष्कर्ष
खाचरौद में साध्वीश्रीजी का चातुर्मास प्रवास और उनके लिए ऐतिहासिक विनती का महत्व केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि यह जैन समाज में सामाजिक एकता, धार्मिक अनुशासन और आध्यात्मिक जागरूकता का प्रतीक भी है। साध्वीश्रीजी के मार्गदर्शन में समाज के प्रत्येक सदस्य को अपने जीवन में संयम, सेवा और साधुता के मूल्यों को अपनाने का अवसर मिलेगा।
Sadhvishri का खाचरौद आगमन और नेमि जयन्तराज विहारधाम में उनके द्वारा निश्रा प्रदान करना जैन समाज के लिए प्रेरणादायक और स्मरणीय क्षण साबित होगा। यह आयोजन न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आदर्श और प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
