जावरा में 17 मई को होगा Kastur Pavan Dham का लोकार्पण एवं भूमि पूजन,
जावरा शहर एक बार फिर एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। गुरु परंपरा के प्रति समर्पण, श्रद्धा और आस्था का अनूठा संगम 17 मई को देखने को मिलेगा, जब नवनिर्मित श्री कस्तूर मुनि पावन धाम के प्रथम चरण का लोकार्पण और द्वितीय चरण का भूमि पूजन समारोह भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन न केवल जैन समाज के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक गौरवपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
गुरु परंपरा के प्रति समर्पण का प्रतीक
भारतीय संस्कृति में गुरु परंपरा का विशेष महत्व रहा है। गुरु को ज्ञान का स्रोत और जीवन का मार्गदर्शक माना जाता है। गुरु के प्रति समर्पण और उनकी स्मृतियों को सहेजकर रखना हर श्रद्धालु के लिए गर्व और सौभाग्य की बात होती है।
इसी भावना को साकार रूप देने के लिए जावरा के गौरव, चपडोद कुलदीपक और ज्योतिषाचार्य मालवरत्न उपाध्याय श्री कस्तूरचंद जी म सा की स्मृति में इस पावन धाम का निर्माण किया गया है। यह धाम न केवल उनकी स्मृतियों को जीवित रखेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को आध्यात्मिक प्रेरणा भी देगा।
संतों के सानिध्य में भव्य आयोजन
इस भव्य आयोजन में देशभर के प्रतिष्ठित संतों और साधु-साध्वियों का पावन सानिध्य प्राप्त होगा। कार्यक्रम में आगम मनस्वी बहुश्रुत कवि प्रवर्तक श्री विजय मुनि जी म सा, दक्षिण भूषण जैन मार्तण्ड उपाध्याय श्री गौतम मुनि जी म सा, उपप्रवर्तक श्री चंद्रेश मुनि जी म सा और सेवाभावी श्री वैभव मुनि जी म सा सहित अनेक संतगण उपस्थित रहेंगे।
इसके अलावा महासती डॉ. कुमुदलता जी म सा, डॉ. महाप्रज्ञा जी म सा, डॉ. पदमकीर्ति जी म सा और डॉ. राजकीर्ति जी म सा का भी सानिध्य कार्यक्रम को और अधिक दिव्य बनाएगा।
स्थान और आयोजन की रूपरेखा
यह आयोजन खाचरोद रोड स्थित ग्राम सेजावता में आयोजित किया जाएगा, जहां पावन धाम का निर्माण किया गया है। कार्यक्रम में देशभर से गुरुभक्त, श्रद्धालु और दानदाता बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
समारोह के दौरान प्रथम चरण का लोकार्पण किया जाएगा, जिसमें धाम के प्रमुख निर्माण कार्यों का उद्घाटन होगा। वहीं द्वितीय चरण के लिए भूमि पूजन भी किया जाएगा, जिससे भविष्य में और विस्तार की योजना को गति मिलेगी।
पत्रिका लेखन से हुआ शुभारंभ
इस भव्य आयोजन की शुरुआत 6 मई को जैन दिवाकर भवन, जावरा में पत्रिका लेखन के साथ की गई। इस अवसर पर जैन समाज के प्रमुख सदस्यों और विभिन्न ट्रस्टों के पदाधिकारियों की उपस्थिति रही।
पत्रिका लेखन कार्यक्रम में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, उपाध्याय श्री कस्तूर मुनि पावन धाम ट्रस्ट, मन्नालाल ट्रस्ट, जैन दिवाकर नवयुवक मंडल और महिला मंडल के सदस्यों ने भाग लिया।
समाज के प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति
कार्यक्रम के दौरान कई प्रमुख समाजसेवी और पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें कस्तूर धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष राकेश मेहता, सचिव सुजानमल कोच्चटा, पूर्व अध्यक्ष बसंतीलाल चपडोद, पारसमल बरडिया, पुखराज कोच्चटा, सुशील चपडोद शामिल थे।
इसके अलावा मन्नालाल ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीपाल कोच्चटा, कोषाध्यक्ष पारसमल गादिया, नवयुवक मंडल अध्यक्ष आकाश जैन सहित कई अन्य समाजजन भी उपस्थित रहे।
आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व
कस्तूर पावन धाम का निर्माण केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में किया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल पूजा-अर्चना करेंगे, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान और शांति का अनुभव भी करेंगे।
यह धाम समाज में नैतिक मूल्यों, करुणा और सदाचार की भावना को बढ़ावा देने का कार्य करेगा।
युवाओं के लिए प्रेरणास्थल
इस पावन धाम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य युवाओं को धर्म और संस्कृति से जोड़ना भी है। आधुनिक जीवनशैली के बीच जहां युवा अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में यह धाम उन्हें अपनी परंपराओं और मूल्यों से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
यहां आयोजित होने वाले प्रवचन, सत्संग और धार्मिक कार्यक्रम युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
गुरुभक्ति का अनूठा उदाहरण
यह आयोजन गुरुभक्ति का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। गुरुदेवों के प्रति श्रद्धा और उनके आशीर्वाद से प्रेरित होकर इस धाम का निर्माण किया गया है।
गुरुभक्तों के लिए यह अवसर अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण है, क्योंकि वे अपने पूज्य गुरुओं की स्मृति को सजीव रूप में देख पाएंगे।
समाज की एकजुटता का प्रतीक
इस आयोजन में समाज के सभी वर्गों की सहभागिता देखने को मिल रही है। विभिन्न ट्रस्ट, मंडल और सामाजिक संगठनों ने मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेदारी उठाई है।
यह आयोजन समाज की एकजुटता, सहयोग और सामूहिक प्रयास का भी प्रतीक है।
आयोजन को लेकर उत्साह
जावरा और आसपास के क्षेत्रों में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। लोग बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करें।
निष्कर्ष
Kastur Pavan Dham का लोकार्पण और भूमि पूजन समारोह जावरा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज की एकता, गुरुभक्ति और सांस्कृतिक धरोहर का भी परिचायक है।
17 मई को होने वाला यह भव्य आयोजन निश्चित रूप से श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित होगा और आने वाले समय में यह धाम आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनेगा।
