Indore करुणा दिवस 2026 पर राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन ने भारत वर्षीय सकल जैन समाज से 28 मई को निर्दोष जीवों की आत्मा की शांति हेतु सामूहिक प्रार्थना, भक्ताम्बर पाठ एवं णमोकार महामंत्र जाप करने की अपील की है।
राजेश जैन दद्दू
इंदौर
करुणा दिवस 2026 : करोड़ों निर्दोष जीवों की स्मृति में सामूहिक प्रार्थना का आह्वान
Indore। करुणा दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन Indore द्वारा भारत वर्षीय सकल जैन समाज से विशेष आह्वान किया गया है कि 28 मई 2026, गुरुवार, जेठ सुदी 12 को “करुणा दिवस” के रूप में मनाया जाए। इस दिन विश्वभर में वध होने वाले करोड़ों निर्दोष मूक जीवों की स्मृति में सामूहिक प्रार्थना, भक्ताम्बर पाठ एवं समूहिक णमोकार महामंत्र का आयोजन किया जाएगा।
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं मयंक जैन ने समाजजनों से भावपूर्ण अपील करते हुए कहा कि —
“कल दुनिया भर में करोड़ों निर्दोष जीवों का वध होगा… उनकी चीखें आसमान को चीर देंगी… पर क्या हम भारत वर्षीय सकल जैन समाजजन अपने हृदय को प्रार्थना में बदल सकते हैं?”
उन्होंने कहा कि
“हम उनके शरीर नहीं बचा सकते… पर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना तो कर सकते हैं।”
इसी करुणा और जीवदया की भावना के साथ सभी जैन समाजजनों से अपने-अपने मंदिरों, घरों एवं संस्थानों में सामूहिक प्रार्थना करने का आह्वान किया गया है।
करुणा दिवस 2026 का उद्देश्य
करुणा दिवस 2026 का मुख्य उद्देश्य समाज में जीवदया, करुणा, अनुकंपा एवं अहिंसा के भावों को जागृत करना है। जैन धर्म सदैव से “जियो और जीने दो” तथा “अहिंसा परमो धर्म:” का संदेश देता आया है।
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन का मानना है कि वर्तमान समय में मानवता को सबसे अधिक आवश्यकता संवेदनशीलता और करुणा की है। ऐसे में यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि समस्त जीवों के प्रति दया और संवेदना प्रकट करने का माध्यम बनेगा।
करोड़ों निर्दोष जीवों की स्मृति में होगी प्रार्थना
विश्वभर में प्रतिदिन असंख्य मूक एवं निर्दोष जीव हिंसा का शिकार बनते हैं। करुणा दिवस के माध्यम से उन सभी जीवों की आत्मा की शांति हेतु सामूहिक प्रार्थना की जाएगी।इस अवसर पर समाजजनों से अपील की गई है कि वे —
- भक्ताम्बर पाठ करें
- णमोकार महामंत्र जाप करें
- 2 मिनट का मौन रखें
- जीवदया एवं अहिंसा का संदेश फैलाएं
जैन धर्म का मूल सिद्धांत — “जियो और जीने दो”
जैन धर्म विश्व को सदैव अहिंसा, करुणा एवं आत्मसंयम का संदेश देता आया है।करुणा दिवस 2026 इसी मूल भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास है।जैन दर्शन मानता है कि प्रत्येक जीव में आत्मा होती है और हर आत्मा समान रूप से सम्मान की अधिकारी है। ऐसे में किसी भी प्रकार की हिंसा केवल शरीर को नहीं बल्कि मानवता की संवेदनाओं को भी आहत करती है।
भक्ताम्बर पाठ एवं णमोकार महामंत्र का आयोजन
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन ने सभी समाजजनों से आग्रह किया है कि 28 मई गुरुवार को अपने-अपने घरों, मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर —
- भक्ताम्बर पाठ
- सामूहिक णमोकार महामंत्र जाप
- मौन प्रार्थना
- जीवदया संकल्प
का आयोजन अवश्य करें।
समाज से विशेष अपील
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन द्वारा भारत वर्षीय सकल जैन समाज एवं समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं से विशेष अपील की गई है कि वे इस दिन कम से कम 2 मिनट मौन रखकर निर्दोष जीवों की आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना करें।संगठन ने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर करुणा का भाव जागृत कर ले तो संसार में हिंसा स्वतः कम हो सकती है।
करुणा दिवस 2026 क्यों है विशेष
आज के आधुनिक समय में जहां हिंसा, क्रूरता और संवेदनहीनता लगातार बढ़ती जा रही है, वहां करुणा दिवस 2026 जैसे आयोजन समाज को मानवता और संवेदनशीलता का संदेश देते हैं।यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि एक सामाजिक चेतना अभियान भी है, जो प्रत्येक व्यक्ति को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम वास्तव में जीवों के प्रति दयालु हैं?
अहिंसा का संदेश देगा करुणा दिवस
जैन समाज द्वारा मनाया जाने वाला यह विशेष दिवस समाज में यह संदेश देगा कि —
- जीव हत्या पाप है
- हर जीव को जीने का अधिकार है
- करुणा मानवता की सबसे बड़ी पहचान है
- अहिंसा ही सच्चा धर्म है
निष्कर्ष
Indore करुणा दिवस 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि संवेदनशील मानवता का प्रतीक है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन द्वारा किया गया यह आह्वान समाज में करुणा, दया और अहिंसा की भावना को और मजबूत करेगा।28 मई को आयोजित होने वाली यह सामूहिक प्रार्थना करोड़ों निर्दोष जीवों की आत्मा की शांति के लिए समर्पित रहेगी।
अहिंसा मंई जैन धर्म की जय।

