कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। कांग्रेस की सरकार बनने के डेढ़ साल बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता संतुलन को लेकर उठी चर्चाएँ तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी उच्च नेतृत्व इस मुद्दे पर 1 दिसंबर से पहले बड़ा निर्णय ले सकता है। इसी सिलसिले में दोनों नेताओं को जल्द दिल्ली बुलाए जाने की संभावना है।
मई 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत के बाद से ही यह चर्चा चलती रही है कि आलाकमान ने दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई वर्ष का पावर-शेयरिंग फॉर्मूला तैयार किया था। हालांकि, कांग्रेस ने इस समझौते को कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया। अब, जैसे-जैसे यह “अनौपचारिक समझौता” अपने कथित मध्य बिंदु के करीब पहुँच रहा है, दोनों पक्षों के समर्थकों की बयानबाजी ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।

आलाकमान करेगा अंतिम निर्णय :
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी इस मुद्दे पर अगले 48 घंटों में महत्वपूर्ण बैठकों का नेतृत्व करेंगे। संभावना है कि सिद्धारमैया और शिवकुमार को 28 या 29 नवंबर को दिल्ली तलब किया जाएगा। पार्टी चाहती है कि संसद के शीतकालीन सत्र से पहले आंतरिक विवाद को शांत कर दिया जाए, ताकि विपक्ष इसे मुद्दा न बना सके।
दोनों खेमों का दावा मजबूत :
सिद्धारमैया समर्थक दावा करते हैं कि बहुमत विधायकों का समर्थन उन्हीं के साथ है, साथ ही उन्हें राहुल गांधी की सहमति भी मिलेगी। दूसरी ओर, शिवकुमार खेमे के विधायक इकबाल हुसैन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके नेता जल्द ही मुख्यमंत्री बनने वाले हैं।

शिवकुमार समर्थक कुछ विधायक हाल ही में दिल्ली भी पहुंचे थे और उन्होंने आलाकमान से इस राजनीतिक अनिश्चितता को खत्म करने की अपील की है।
डीके शिवकुमार का ‘गुप्त समझौते’ वाला बयान :
मंगलवार को शिवकुमार ने कहा कि सीएम बदलने के मुद्दे पर वे सार्वजनिक चर्चा नहीं करना चाहते क्योंकि “यह पार्टी के चार-पांच लोगों के बीच का एक गुप्त समझौता” है। उनके बयान ने सत्ता परिवर्तन की अटकलों को और तेज कर दिया है।
अब निगाहें पूरी तरह कांग्रेस नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में कर्नाटक की सियासत की दिशा तय करेगा।
