Karnataka Cabinet में विभाग बंटवारे के बाद बगावत: रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा,
Karnataka Cabinet में विभागों के बंटवारे के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सरकार में मंत्रियों को विभाग आवंटित किए जाने के तुरंत बाद ही असंतोष खुलकर सामने आ गया है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और आठ बार के विधायक रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफा देकर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है।
रेड्डी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि 2023 में उनसे किया गया वादा पूरा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मनचाहा विभाग नहीं दिया गया, जिससे वे आहत हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस पार्टी और विधायक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।
विभाग बंटवारे के बाद बढ़ा विवाद
गुरुवार रात मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने 13 मंत्रियों को विभागों का आवंटन किया था। जैसे ही विभागों की सूची सामने आई, कैबिनेट के भीतर असंतोष की स्थिति बन गई।
माना जा रहा है कि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को उनके अपेक्षित विभाग नहीं मिले, जिससे नाराजगी बढ़ी। इसी क्रम में रामलिंगा रेड्डी सबसे पहले खुलकर सामने आए और उन्होंने अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
‘वादा पूरा नहीं किया गया’ – रामलिंगा रेड्डी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि वर्ष 2023 में उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने उनसे वादा किया था कि जब भी कैबिनेट का गठन होगा, उन्हें बेंगलुरु विकास मंत्रालय दिया जाएगा।
रेड्डी के अनुसार, शपथ ग्रहण से ठीक एक दिन पहले भी उनकी मुलाकात शिवकुमार से हुई थी, जिसमें उन्हें दोबारा आश्वासन दिया गया था कि उन्हें वही विभाग मिलेगा जिसकी उन्हें अपेक्षा थी।
लेकिन अंतिम सूची में उन्हें ‘वृहद और मध्यम सिंचाई विभाग’ आवंटित कर दिया गया, जिससे वे संतुष्ट नहीं थे।
इस्तीफा समर्थक के जरिए सौंपा गया
सूत्रों के अनुसार, रामलिंगा रेड्डी ने अपना इस्तीफा सीधे मुख्यमंत्री को नहीं सौंपा। उन्होंने इसे अपने एक समर्थक के माध्यम से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव तक पहुंचाया।
अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि वे मंत्री पद पर रहते हुए अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम नहीं कर सकते। उन्होंने पार्टी और सरकार का आभार जताते हुए कहा कि वे केवल मंत्री पद छोड़ रहे हैं, लेकिन विधायक और कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते रहेंगे।
बैठक छोड़कर चले गए थे रेड्डी
जानकारी के अनुसार, विभाग आवंटन की घोषणा के बाद हुई बैठक में जब रामलिंगा रेड्डी को उनके मंत्रालय की जानकारी दी गई, तो वे असंतुष्ट होकर बैठक से बाहर चले गए थे।
उनकी नाराजगी उसी समय से स्पष्ट दिखाई दे रही थी, लेकिन अब उन्होंने इसे औपचारिक रूप से इस्तीफे में बदल दिया है।
बेंगलुरु विकास मंत्रालय की मांग
रामलिंगा रेड्डी लंबे समय से बेंगलुरु विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी चाहते थे। उनका कहना था कि वे केवल वही विभाग स्वीकार करेंगे।
उन्होंने मुख्यमंत्री को यह भी स्पष्ट किया था कि वे किसी अन्य मंत्रालय को स्वीकार नहीं करेंगे। हालांकि सरकार ने उनकी मांग को दरकिनार करते हुए उन्हें सिंचाई विभाग सौंप दिया।
वरिष्ठ नेता और 8 बार के विधायक
रामलिंगा रेड्डी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और वे आठ बार विधायक रह चुके हैं। संगठन और सरकार दोनों स्तर पर उनका लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है।
उनके इस कदम को पार्टी के भीतर असंतोष के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस में अंदरूनी तनाव बढ़ा
इस घटनाक्रम के बाद कर्नाटक कांग्रेस में अंदरूनी तनाव और बढ़ने की संभावना है। विभागों के बंटवारे को लेकर पहले से ही असंतोष की चर्चाएं थीं, लेकिन अब एक वरिष्ठ मंत्री का इस्तीफा स्थिति को और गंभीर बना सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस तरह की नाराजगी अन्य मंत्रियों में भी बढ़ती है, तो सरकार के भीतर अस्थिरता की स्थिति पैदा हो सकती है।
सरकार के सामने नई चुनौती
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए यह घटनाक्रम एक गंभीर राजनीतिक चुनौती बनकर सामने आया है। एक ओर सरकार को प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखनी है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर वरिष्ठ नेताओं की बढ़ती नाराजगी को भी संतुलित करना जरूरी हो गया है। विभागों के बंटवारे के बाद जिस तरह असंतोष सामने आया है, उसने पार्टी संगठन की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या रणनीति अपनाता है। क्या पार्टी हाईकमान हस्तक्षेप करेगा और नेताओं के बीच सुलह कराएगा, या फिर स्थिति और जटिल हो सकती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा या उन्हें मनाने का प्रयास किया जाएगा। आने वाले दिनों में लिए जाने वाले निर्णय न केवल राज्य की राजनीति को प्रभावित करेंगे, बल्कि सरकार की स्थिरता की दिशा भी तय करेंगे।
निष्कर्ष
कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार के बाद शुरू हुआ विवाद अब खुली बगावत का रूप ले चुका है। रामलिंगा रेड्डी के मंत्री पद से इस्तीफे ने कांग्रेस सरकार के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे पार्टी और विधायक के रूप में कार्य करते रहेंगे, लेकिन यह घटना राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा करती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस संकट को कैसे संभालता है।
