कारीटोरन में 3 से 9 सितंबर तक ‘प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ कार्यशाला’, देशभर के जैन विद्वान करेंगे प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन
आगम सम्मत प्रतिष्ठा विधि के संकलन पर होगा मंथन, हस्तलिखित एवं प्रकाशित प्राचीन ग्रंथों के शोध के आधार पर तैयार होगा ‘प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ’
घुवारा। श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में 3 से 9 सितंबर 2026 तक सात दिवसीय ‘प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ कार्यशाला’ का आयोजन किया जाएगा। कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से जैन विद्वान, प्रतिष्ठाचार्य और आगम के जानकार शामिल होकर प्राचीन प्रतिष्ठा ग्रंथों का शोधपरक अध्ययन करेंगे। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य विभिन्न प्राचीन स्रोतों के आधार पर आगम सम्मत प्रतिष्ठा विधि का व्यवस्थित संकलन कर समाज के लिए एक प्रमाणिक ग्रंथ तैयार करना बताया गया है।
कार्यशाला का आयोजन भारतवर्षीय दिगम्बर जैन आगम मार्गी विद्वत समिति के तत्वावधान एवं श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन के आयोजन में किया जा रहा है। ज्योतिषाचार्य एवं प्रतिष्ठाचार्य पंडित महेश कुमार डीमापुर इसके मुख्य संचालक होंगे।
प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों पर होगा शोध
आयोजन समिति के अनुसार कार्यशाला की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता प्राचीन हस्तलिखित एवं पूर्व में प्रकाशित प्रतिष्ठा संबंधी ग्रंथों का तुलनात्मक और शोधपरक अध्ययन होगा।
कार्यशाला में ताड़पत्र पर हस्तलिखित प्राचीन ग्रंथों के साथ पूर्वाचार्यों एवं विद्वानों द्वारा प्रणीत प्रकाशित ग्रंथों का अध्ययन किया जाएगा। इनमें वर्णित प्रतिष्ठा विधियों, धार्मिक क्रियाओं, मंत्रों और परंपराओं को प्रमाण सहित समझने तथा उनका व्यवस्थित संकलन करने का प्रयास होगा।
आयोजकों के अनुसार लगभग पांचवीं से तेरहवीं शताब्दी के बीच के बताए जा रहे प्राचीन स्रोतों का भी अध्ययन प्रस्तावित है। उपलब्ध पांडुलिपियों की प्रामाणिकता, काल निर्धारण और पाठ संबंधी निष्कर्ष कार्यशाला में विद्वानों के अध्ययन के आधार पर स्पष्ट होंगे।
आगम सम्मत प्रतिष्ठा विधि तैयार करना उद्देश्य
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जैन समाज को ऐसी प्रतिष्ठा विधि उपलब्ध कराना बताया गया है, जिसमें प्रत्येक प्रमुख धार्मिक क्रिया का आगमिक एवं ग्रंथीय आधार प्रस्तुत किया जा सके।
आयोजकों का कहना है कि प्रतिष्ठा विधि में पंथ या संघ के आधार पर अनावश्यक भिन्नता और मूल धार्मिक क्रियाओं में मनमाने बदलाव से बचने के लिए प्राचीन ग्रंथों के आधार पर प्रमाणिक सामग्री का संकलन आवश्यक है।
इसी उद्देश्य से अलग-अलग ग्रंथों में उपलब्ध सामग्री का अध्ययन कर ‘प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ’ का संकलन किया जाएगा।
अप्रकाशित ग्रंथों के प्रकाशन की भी योजना
भारतवर्षीय दिगम्बर जैन आगम मार्गी विद्वत समिति की ओर से ऐसे प्रतिष्ठा ग्रंथों को भी प्रकाश में लाने की योजना है, जो अब तक अप्रकाशित हैं।
आयोजन समिति के मुताबिक प्राचीन हस्तलिखित सामग्री को संरक्षित करने के साथ उसका विधिवत अध्ययन और प्रकाशन आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण होगा। कार्यशाला में विद्वान अलग-अलग पांडुलिपियों और प्रकाशित सामग्री का अध्ययन कर उनके महत्वपूर्ण अंशों पर विचार-विमर्श करेंगे।
देशभर से विद्वानों और प्रतिष्ठाचार्यों की सहभागिता
कार्यशाला में उत्तर और दक्षिण भारत सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में विद्वानों एवं प्रतिष्ठाचार्यों के पहुंचने की संभावना है। आयोजन समिति ने लगभग 200 विद्वानों के स्वागत-सम्मान के साथ प्रथम सत्र प्रारंभ करने की तैयारी की है।
कार्यशाला के अध्यक्ष पंडित बाल ब्रह्मचारी धर्मचंद शास्त्री, दिल्ली होंगे। पंडित महेंद्र कुमार व्याकरणाचार्य, मुरैना सहित अन्य वरिष्ठ विद्वान आयोजन में मार्गदर्शन करेंगे।
बाल ब्रह्मचारी अरुण भैया सुधांशु संयोजक तथा बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया पुण्यांश मुख्य सूत्रधार की भूमिका में रहेंगे। प्रतिष्ठाचार्य अखिलेश शास्त्री सुप्रज्ञ सहित अनेक विद्वान कार्यशाला में सहभागिता करेंगे।
पंडित महेश कुमार डीमापुर करेंगे मुख्य संचालन
आयोजन के मुख्य संचालक प्रतिष्ठाचार्य पंडित महेश कुमार डीमापुर लंबे समय से जैन प्रतिष्ठा विधि और पंचांग गणना सहित विभिन्न धार्मिक-अध्ययन गतिविधियों से जुड़े हैं।
आयोजन समिति के अनुसार उन्हें देश के विभिन्न स्थानों पर अनेक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सवों के संचालन का अनुभव है। कार्यशाला में उनके निर्देशन में प्रतिष्ठा संबंधी अलग-अलग प्राचीन ग्रंथों की सामग्री को एकत्रित एवं व्यवस्थित करने का प्रयास किया जाएगा।
विशाल शिलालेख पर संरक्षित होगी कार्यशाला की स्मृति
आयोजन समिति ने कार्यशाला को स्मरणीय बनाने के लिए अतिशय क्षेत्र परिसर में एक विशाल शिलालेख स्थापित करने की योजना भी बनाई है। इस पर कार्यशाला से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी अंकित कर आयोजन की स्मृति को संरक्षित किया जाएगा।
आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों को इस शोध एवं ग्रंथ-संकलन कार्य की जानकारी उपलब्ध कराना है।
विद्वानों के स्वागत से होगा प्रथम सत्र का शुभारंभ
कार्यशाला के प्रथम सत्र की शुरुआत देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले करीब 200 विद्वानों के स्वागत और सम्मान के साथ किए जाने की तैयारी है।
भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के राष्ट्रीय मंत्री पवन कुमार गोधा, दिल्ली द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा। आयोजन में विभिन्न जैन संस्थाओं से जुड़े पदाधिकारियों, विद्वानों और समाजसेवियों के शामिल होने की संभावना है।
देश के विभिन्न शहरों से मिल रहा सहयोग
आयोजन समिति के अनुसार इंदौर, भिवाड़ी, डीमापुर, किशनगढ़, जयपुर, लखनऊ, दमोह, रामगंज मंडी, दिल्ली सहित कई शहरों के श्रावक-श्राविकाओं और समाजजनों द्वारा कार्यशाला में सहयोग दिया जा रहा है।
डॉ. अखिलेश जैन एवं श्रीमती ग्रीष्मा परिवार इंदौर, भूपेंद्र कुमार एवं श्रीमती ऋतु भिवाड़ी, क्रांति प्रसाद एवं श्रीमती प्रभा छावड़ा डीमापुर, सुमेर-विमला छावड़ा किशनगढ़, संजीव जैन-मनीषा लखनऊ सहित विभिन्न परिवार आयोजन से जुड़े हैं।
श्री दिगम्बर जैन ग्लोबल महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमनालाल हपावत, मुंबई की ओर से भी आयोजन में सहयोग दिए जाने की जानकारी दी गई है।
आवास, भोजन और सुरक्षा की तैयारियां
देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले विद्वानों और अतिथियों को देखते हुए आयोजन समिति ने आवास, भोजन, परिवहन और सुरक्षा सहित आवश्यक व्यवस्थाओं की तैयारी की है।
सात दिनों तक चलने वाली कार्यशाला में विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्राचीन जैन प्रतिष्ठा साहित्य पर चर्चा, अध्ययन और संकलन का कार्य किया जाएगा।
आयोजकों का कहना है कि कार्यशाला के माध्यम से प्राचीन जैन आगम और प्रतिष्ठा साहित्य की अमूल्य सामग्री को व्यवस्थित रूप से संरक्षित करने तथा भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
