Karera हादसे के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद: विधायक के वायरल वीडियो से प्रशासनिक तकरार तेज
शिवपुरी जिले के Karera क्षेत्र में हुए एक सड़क हादसे के बाद अब पूरा मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है। हादसे के बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और उसके जवाब में आए वायरल वीडियो ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
पिछोर विधायक प्रीतम लोधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे करैरा के एसडीओपी और आईपीएस अधिकारी डॉ. आयुष जाखड़ को कथित रूप से धमकी देते हुए और तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है और प्रशासनिक महकमे में भी चर्चा का विषय बन गया है।
Karera हादसा: कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
पूरा विवाद 16 अप्रैल 2026 की सुबह करैरा थाना क्षेत्र से शुरू हुआ। सुबह करीब 7:30 बजे पिछोर विधायक के पुत्र दिनेश लोधी अपनी थार गाड़ी से थाने के पास स्थित जिम की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कथित रूप से तेज और लापरवाही से वाहन चलाते हुए सड़क पर जा रहे राहगीरों को टक्कर मार दी।
इस दुर्घटना में कई लोग घायल हो गए, जिनमें संजय परिहार, आशीष परिहार, अंशुल परिहार, सीता वर्मा और पूजा सोनी शामिल हैं। सभी घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई, जिससे इलाके में तनाव और चिंता का माहौल बन गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना के बाद संजय परिहार की शिकायत पर पुलिस ने दिनेश लोधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 और 125ए के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपी को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। इस दौरान वाहन की जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। गाड़ी पर काली फिल्म चढ़ी हुई थी, हूटर लगा था और सबसे बड़ी बात यह कि वाहन पर रजिस्ट्रेशन नंबर भी अंकित नहीं था।
इन सभी उल्लंघनों के आधार पर पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट के तहत भी कार्रवाई की और वाहन से काली फिल्म तथा हूटर हटवा दिए। इसके साथ ही चालान भी काटा गया।
पैदल कराई गई घटनास्थल की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीओपी डॉ. आयुष जाखड़ और थाना प्रभारी विनोद छावई ने आरोपी दिनेश लोधी को थाने से घटनास्थल तक पैदल लेकर जाने का निर्णय लिया। इसका उद्देश्य घटनाक्रम को दोबारा समझना और जांच को मजबूत करना था।
इस दौरान पुलिस बल भी मौजूद रहा और घटनास्थल पर जाकर पूरी घटना का पुनर्निर्माण किया गया। पुलिस का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी तरीके से की गई।
वायरल वीडियो ने बढ़ाया विवाद
पुलिस कार्रवाई के बाद अचानक एक वीडियो सामने आया, जिसने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया। इस वीडियो में पिछोर विधायक प्रीतम लोधी एसडीओपी डॉ. आयुष जाखड़ को संबोधित करते हुए तीखी भाषा का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में विधायक कहते नजर आते हैं—
“क्या करैरा तुम्हारे डैडी की है? मेरा बेटा यहां आएगा भी और चुनाव भी लड़ेगा, उसे कोई रोक नहीं सकता।”
इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी अपनी “औकात” में रहें और कानून सभी को पता है, हमें भी कानून की जानकारी है।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और लोगों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
विधायक के आरोप: पुलिस पर पक्षपात का दावा
विधायक प्रीतम लोधी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस चुनिंदा मामलों में कार्रवाई करती है और हर घटना में समान दृष्टिकोण नहीं अपनाती।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब क्षेत्र में एक आदिवासी महिला का हादसा हुआ था, तब पुलिस मौके पर नहीं पहुंची थी। विधायक का आरोप है कि पुलिस केवल उन मामलों में सक्रिय होती है जहां आर्थिक या अन्य लाभ की संभावना होती है।
उन्होंने एसडीओपी और पुलिस प्रशासन को लेकर भी कई सवाल खड़े किए और कहा कि प्रशासन को निष्पक्ष रहकर काम करना चाहिए।
एसडीओपी का पक्ष
इस पूरे विवाद पर एसडीओपी डॉ. आयुष जाखड़ ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो किसी को धमकी दी और न ही किसी प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी की है।
उनके अनुसार, पुलिस ने केवल कानून के अनुसार कार्रवाई की है और आरोपी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं।
एसडीओपी ने कहा कि पुलिस का काम कानून लागू करना है और यह कार्रवाई बिना किसी दबाव के की गई है।
राजनीतिक हलचल तेज
इस घटना और वायरल वीडियो के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है और पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अब केवल एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासन और राजनीतिक शक्ति के बीच टकराव का प्रतीक बन गया है।
जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई को सही बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप हो रहा है।
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं।
कानून और सत्ता के बीच टकराव की बहस
यह मामला एक बार फिर इस बहस को जन्म दे रहा है कि क्या कानून सभी के लिए समान है या फिर राजनीतिक प्रभाव कुछ मामलों को प्रभावित करता है।
जहां एक तरफ पुलिस अपनी कार्रवाई को पूरी तरह नियमों के अनुसार बता रही है, वहीं दूसरी तरफ जनप्रतिनिधि इसे पक्षपातपूर्ण बता रहे हैं।
निष्कर्ष
करैरा हादसे से शुरू हुआ यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है। एक सड़क दुर्घटना से शुरू हुआ विवाद अब पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच तनाव का कारण बन गया है।
वायरल वीडियो ने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। आने वाले समय में इस पर राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक जांच दोनों आगे बढ़ने की संभावना है।
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह विवाद अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन चुका है।
