मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य सरकार की प्रमुख लाड़ली लक्ष्मी योजना पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि योजना पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद आज भी सिर्फ 30% बेटियां ही बारहवीं कक्षा तक पहुंच पा रही हैं, जो बताता है कि लाभ सही जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रहा।
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों की कमी, बेटियों की सुरक्षा और सामाजिक माहौल जैसे बुनियादी मुद्दों की ओर कोई गंभीर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस योजना को सिर्फ राजनीतिक प्रचार का जरिया बना दिया है।
“सरकार चुनावी मोड में रहती है, जनता की सेवा पीछे छूट गई”
कमलनाथ ने कहा कि सरकार का काम केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है। लेकिन मध्यप्रदेश सरकार योजना की वास्तविक सफलता के बजाय सिर्फ उसके प्रचार पर ध्यान दे रही है।

- गौरतलब है कि लाड़ली लक्ष्मी योजना 2007 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य—
- लिंगानुपात सुधारना
- कन्या भ्रूण हत्या रोकना
- बेटियों की शिक्षा और स्वास्थ्य को बेहतर बनाना था।
योजना के तहत राज्य सरकार बेटियों के नाम से लगभग 1.43 लाख रुपये की राशि विभिन्न किस्तों में देती है।
“17 साल बाद भी तस्वीर नहीं बदली— यह विफलता का संकेत”
कमलनाथ ने कहा कि इतनी बड़ी वित्तीय निवेश के बावजूद शिक्षा के स्तर में सुधार न होना बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने कहा—
“अगर सरकार की नीयत शिक्षा सुधार की होती, तो आज ज्यादातर बेटियां 12वीं तक पहुंच रही होतीं।”

उनका कहना है कि सरकार ने पोस्टर–बैनर पर बेटियों की तस्वीरों से प्रचार तो खूब किया, लेकिन स्कूलों की गुणवत्ता, शिक्षकों की भर्ती, सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता जैसे मुद्दों को पूरी तरह अनदेखा कर दिया।
“बेटियों को वादों की नहीं, अवसरों की जरूरत है”

कमलनाथ ने जोर देकर कहा कि मध्यप्रदेश की बेटियों को राजनीतिक घोषणाओं की नहीं, बल्कि—
- अच्छी शिक्षा
- सुरक्षित वातावरण
- संसाधन
- और बेहतर अवसर की जरूरत है।
उन्होंने कहा—
“बेटियां सिर्फ पोस्टर की तस्वीर नहीं हैं, वे इस राज्य की शक्ति हैं। उन्हें वास्तविक समर्थन मिलना चाहिए, न कि केवल चुनावी मंचों पर किए गए वादे।”
