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Kamal Nath ने रसोई गैस किल्लत और पेट्रोल अफरा-तफरी पर सरकार को घेरा, पूछा “कब तक रहेंगे ऐसे हालात”

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Published On: 26 March 2026
Kamal Nath,

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रसोई गैस किल्लत और पेट्रोल को लेकर अफरा-तफरी पर कमलनाथ ने सरकार को घेरा

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत और पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Kamal Nath ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल एक शहर की नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की लापरवाही, कमजोर प्रबंधन और गलत नीतियों का परिणाम है।

कमलनाथ ने कहा, “सरकार हर मंच पर दावा करती है कि व्यवस्था मजबूत है, लेकिन जमीन पर स्थिति बिल्कुल उलट है। आम आदमी अपनी रसोई चलाने के लिए लाइन में खड़ा है, अपनी गाड़ी चलाने के लिए घंटों भटक रहा है। सवाल यह है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई?”

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उनका कहना है कि सरकार का काम संकट को टालना नहीं बल्कि पहले से तैयारी करना होता है।

रसोई गैस की किल्लत: उज्ज्वला योजना पर सवाल

Kamal Nath ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि “उज्ज्वला योजना के नाम पर लाखों कनेक्शन दिए गए, लेकिन जब जरूरत पड़ी तो गैस ही उपलब्ध नहीं हुई। क्या सिर्फ कनेक्शन देना ही सरकार का काम था, या उसकी निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करना भी जिम्मेदारी थी?”

उन्होंने बताया कि अब गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए आम लोगों को 35 से 45 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। कमलनाथ ने कहा कि यह स्थिति 21वीं सदी के भारत के लिए बिल्कुल अस्वीकार्य है और यह किसी संकटग्रस्त देश की तस्वीर की तरह लग रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि रसोई गैस की कमी के कारण महिलाएं और परिवार अपने घर का खाना बनाने में बाधाओं का सामना कर रहे हैं। छोटे व्यवसाय और होटल भी इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं। इससे न केवल दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है बल्कि आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।

पेट्रोल-डीजल को लेकर अफरा-तफरी

कमलनाथ ने पेट्रोल और डीजल की स्थिति को भी चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि कहीं पेट्रोल खत्म हो रहा है, कहीं लिमिट लगाई जा रही है और कुछ जगह प्रीमियम पेट्रोल थमाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिस्टम पूरी तरह चरमरा चुका है, लेकिन सरकार इस पर जवाब देने के बजाय चुप्पी साधे बैठी है।

पूर्व सीएम ने बताया कि पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ और लंबी लाइनें आम बात हो गई हैं। लोगों को कई घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है और कई बार उन्हें अपने वाहन के लिए आवश्यक ईंधन भी नहीं मिल पा रहा है। यह स्थिति ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखने को मिल रही है।

सरकार से सवाल और जवाबदेही की मांग

कमलनाथ ने सरकार से कई सीधे सवाल किए। उन्होंने पूछा कि जब आम जनता परेशान है तो जिम्मेदार लोग कहां हैं? क्या उन्हें सिर्फ चुनाव के समय ही जनता याद आती है? उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि जनता सवाल पूछे कि क्यों बार-बार ऐसी स्थिति बनती है, क्यों हर बार आम आदमी ही इसकी कीमत चुकाता है और आखिर कब तक यह हालात रहेंगे।

उन्होंने यह भी चेताया कि इस तरह की अफरा-तफरी केवल जनता के लिए मुश्किलें नहीं बढ़ाती बल्कि सरकार की विश्वसनीयता और विश्वास को भी कमजोर करती है।

प्रशासनिक विफलता या नीति की कमजोरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि रसोई गैस और पेट्रोल की इस स्थिति के पीछे सिर्फ आपूर्ति की कमी नहीं बल्कि नीति और प्रबंधन की कमज़ोरी भी है। उद्योग विशेषज्ञ डॉ. रवि मेहता के अनुसार, “एलपीजी और ईंधन की आपूर्ति में व्यवस्थित लॉजिस्टिक्स और समय पर वितरण का अभाव है। केंद्र और राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी क्षेत्र में अचानक संकट न पैदा हो।”

विशेषज्ञों ने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन तो दिए गए, लेकिन गैस आपूर्ति की निगरानी, स्टॉक प्रबंधन और वितरण नेटवर्क को कमजोर रखा गया। इसी कारण कई शहरों में सिलेंडर की लंबी लाइनें बन रही हैं।

आम जनता की प्रतिक्रिया

भोपाल के नागरिकों ने भी अपनी परेशानी साझा की। राधा शुक्ला, एक गृहिणी, ने कहा, “हम लाइन में घंटों खड़े रहते हैं और कभी-कभी हमें सिलेंडर नहीं मिलता। इससे हमारे रोजमर्रा के काम बाधित हो रहे हैं।”

वहीं, अनिल वर्मा, एक वाहन चालक, ने पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी की स्थिति को लेकर कहा, “लोग घंटों इंतजार कर रहे हैं, कहीं पेट्रोल खत्म तो कहीं लिमिट लगाई गई। सिस्टम पूरी तरह विफल है। सरकार को जल्दी से जल्दी समाधान निकालना होगा।”

व्यापारी और व्यवसाय प्रभावित

छोटे व्यवसाय और होटल उद्योग भी इस संकट से प्रभावित हुए हैं। रसोई गैस की कमी और पेट्रोल-डीजल की अनियमितता के कारण दैनिक संचालन बाधित हो रहा है। एक होटल व्यवसायी, रोहित अग्रवाल ने कहा, “हमारे पास खाना बनाने के लिए सिलेंडर की कमी हो रही है। यदि यह समस्या बनी रही तो व्यवसाय प्रभावित होगा और कर्मचारियों की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।”

समाधान और संभावित कदम

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि सरकार को तुरंत आपूर्ति चेन का ऑडिट करना चाहिए। एलपीजी सिलेंडर और ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लॉजिस्टिक्स, वितरण और स्टॉक प्रबंधन की समीक्षा आवश्यक है।

कमलनाथ ने भी यह स्पष्ट किया कि सरकार को केवल दिखावे के लिए दावा नहीं करना चाहिए, बल्कि वास्तविक तैयारी करनी होगी। उनके अनुसार, “आपदा और संकट प्रबंधन के लिए सरकार को लंबी अवधि की योजना बनानी होगी। जनता को बार-बार परेशान नहीं होना चाहिए।”

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश में रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की समस्या केवल प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह सरकारी नीतियों और उनके कार्यान्वयन में कमी का परिणाम है। पूर्व मुख्यमंत्री Kamal Nath  ने इस मुद्दे को उठाते हुए जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाया है और उनसे जवाबदेही की मांग की है।

हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो यह राजनीतिक और सामाजिक दोनों रूप से बड़ा मुद्दा बन सकता है। आम नागरिकों की परेशानियों को देखते हुए विशेषज्ञ और नेता दोनों ही इसे गंभीर समस्या मान रहे हैं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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